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सतलुज और यमुना के मध्य बह रही सरस्वती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 01:27 AM IST
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Saraswati flowing between Sutlej and Yamuna, Kurukshetra
पंचनद अध्ययन केंद्र में गोष्ठी को संबोधित करते निदेशक प्रो. एआर चौधरी। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। पंचनद अध्ययन केंद्र कुरुक्षेत्र की ओर से ‘सरस्वती नदी तंत्र - भारतीय सभ्यता की जननी’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। सरस्वती नदी उत्कृष्ट शोध केंद्र कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में शोध केंद्र के निदेशक प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि सरस्वती नदी का मुख्य केंद्र उत्तरी हरियाणा रहा है। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन की मदद प्रतिभागियों को दिखाया कि किस तरह से सरस्वती नदी यमुना और सतलुज के बीच से बहती चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि प्रमाणों से पता चलता है कि सरस्वती नदी का इतिहास चौदह हजार साल पुराना है और 1902 ई. में उनका अंतिम प्रवाह देखने को मिला है। शोध से पता चला है कि लेह-लद्दाख में जो रेत और नदी में पाए जाने वाले खनिज पदार्थ मिलते हैं, वह पदार्थ हरियाणा में मिल रहे हैं। इससे ऐसा भी प्रतीत होता है कि सरस्वती नदी का उद्गम स्थल हिमालय रहा है। उन्होंने बताया कि इस नदी की गर्जना इतनी तेज थी कि दूर-दूर तक आवाज सुनाई देती थी, जो साबित करती है कि इसका पानी कहीं ऊंची चोटी से आ रहा होगा।
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उन्होंने वामन पुराण के एक श्लोक का जिक्र करते हुए कहा कि एक ऐसी नदी जो कुरुक्षेत्र धरा के बीचो-बीच बह रही है, उसका नाम सरस्वती है। पिपली से अंबाला रोड पर तीन किलोमीटर का क्षेत्र जो कि सामान्य क्षेत्र से नीचे है, इस बात का प्रमाण है कि यह नदी तीन किलोमीटर चौड़ी रही होगी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में अनेकों ऐसे प्रमाण प्रस्तुत किए जिनमें आदि बद्री से लेकर लोहखंड, गांवकलायत, भौर सैयदागांव, बालू हिसार के देव मुकलैण तक में चले रहे शोध कार्य, वहां की खुदाई से निकली अनेक तरह की मिट्टी की परतें, खनिज पदाथ शामिल थे।
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पंचनद अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष प्रो. सीडीएस कौशल ने कहा कि आज हमें ऐसी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते थे। केंद्र के कोषाध्यक्ष कंवरदीप शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि केंद्र की उपाध्यक्ष डॉ. मधुदीप सिंह के प्रयास से आज इतना अच्छा वक्तव्य सुनने को मिला।संचालन राजेश शर्मा ने किया। इस मौके पर डॉ. अजयजांगड़ा, जितेंद्र रोहिला, डॉ. योगेंद्र, डॉ. सुभाष,डॉ. सुनील नैन,डॉ. संगीता सैनी, रामेश्वर सैनी व डॉ. कांता सहित विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।
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