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मौसम परिवर्तन के साथ ही एलएनजेपी अस्पताल में बढ़ने लगी ओपीडी, सबसे अधिक बुखार व जुकाम के मरीज
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एलएनजेपी अस्पताल में पर्ची बनवाने के लिए लाइन में लगे मरीज।
- फोटो : Kurukshetra
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मौसम में परिवर्तन शुरू होते ही जिला अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में 20 प्रतिशत मरीजों की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है। लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल में भी बुखार और जुकाम के अधिक मरीज पहुंचने लगे हैं। रात के मौसम में पिछले कुछ दिनों से बदलाव हुआ है। मौसम के इस उतार चढ़ाव से वायरल फीवर, सर्दी, जुकाम, बच्चों में कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियां फैलने लगी हैं।
हालांकि दिन के समय अभी सर्दी नहीं पड़ रही है। मौसम के बदलते मिजाज ने जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। सामान्य दिनों में चार सौ से पांच सौ मरीज ही जिला अस्पताल में पहुंचते हैं, लेकिन वीरवार को 700 से अधिक ओपीडी रही। इसके अलावा पुराने पर्चों पर भी मरीजों ने दवा ली। इसके चलते सुबह से ही जिला अस्पताल की ओपीडी भी भीड़ रही। मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक देखने को मिली। अस्पताल में सुबह आठ बजे से दो बजे तक पर्ची कटवाने के लिए लंबी कतार से लगनी आम बात हो गई है। एलएनजेपी अस्पताल में सबसे ज्यादा ओपीडी फिजीशियन की है। विभाग के अनुसार रोजाना 300 से 400 मरीज फिजीशियन से चेकअप कराने पहुंच रहे हैं। इन दिनों बुखार और जुकाम की शिकायत होनी आम बात हो गई है, लेकिन कौन मरीज कोरोना संक्रमित हो यह पता लगाना चिकित्सकों के लिए काफी चुनौती भरा हो चुका है। वहीं, उपचार कराने पहुंच रहे मरीज दूसरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं, क्योंकि पंजीकरण खिड़की से लेकर फिजीशियन की ओपीडी तक मरीजों की भीड़ उमड़ी रहती है, जो कोविड-19 की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन व्यवस्था बनाने में जुटा हुआ है, बावजूद इसके कोई समाधान नहीं निकला।
नवजात बच्चों का रखे विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मौद्गिल का कहना है कि मौसम में हो रहे परिवर्तन के कारण छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। दिन में तो मौसम गर्म होता है, लेकिन सुबह और रात में पहनावे पर ध्यान रखना चाहिए। कहा कि इन दिनों हमें सुबह-सुबह ठंड महसूस नहीं होती, लेकिन बच्चों के लिए यह काफी हानिकारक है। ऐसे मौसम में ठंडी चीजों से परहेज करें। बच्चों को सुबह बेड से उठ कर सीधे बाहर न जाने दें। बच्चों को सुबह फर्श पर नंगे पैर चलने से बचे। छोटे बच्चों के गीले कपड़े समय पर बदलते रहें, जिससे बच्चों को सर्दी, जुकाम खांसी से बचाया जा सके।
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लक्षण दिखाई देने में भेजते है फ्लू ओपीडी में : चिकित्सा अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक एवं हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि जैसे-जैसे मौसम में परिवर्तन होना शुरू हो गया है। तभी से अस्पताल की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर के आ रहे हैं। कहा कि मौसम परिवर्तन से बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी के मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन जिन मरीजों को कोरोना वायरस के लक्षण दिखाजई देते हैं तो उन्हें फ्लू ओपीडी में रेफर किया जाता है, जहां उनका कोविड-19 टेस्ट करवाया जाता है। कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान खान पान और रहन सहन पर ध्यान दिया जाना अति आवश्यक है। तभी मौसमी बीमारियों के प्रकोप बचा जा सकता है। इसके अलावा अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर व्यवस्था बनाई जा रही है। सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि ओपीडी व पंजीकरण खिड़की पर मरीजों की भीड़ न उमड़े।
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हालांकि दिन के समय अभी सर्दी नहीं पड़ रही है। मौसम के बदलते मिजाज ने जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ा दी है। सामान्य दिनों में चार सौ से पांच सौ मरीज ही जिला अस्पताल में पहुंचते हैं, लेकिन वीरवार को 700 से अधिक ओपीडी रही। इसके अलावा पुराने पर्चों पर भी मरीजों ने दवा ली। इसके चलते सुबह से ही जिला अस्पताल की ओपीडी भी भीड़ रही। मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक देखने को मिली। अस्पताल में सुबह आठ बजे से दो बजे तक पर्ची कटवाने के लिए लंबी कतार से लगनी आम बात हो गई है। एलएनजेपी अस्पताल में सबसे ज्यादा ओपीडी फिजीशियन की है। विभाग के अनुसार रोजाना 300 से 400 मरीज फिजीशियन से चेकअप कराने पहुंच रहे हैं। इन दिनों बुखार और जुकाम की शिकायत होनी आम बात हो गई है, लेकिन कौन मरीज कोरोना संक्रमित हो यह पता लगाना चिकित्सकों के लिए काफी चुनौती भरा हो चुका है। वहीं, उपचार कराने पहुंच रहे मरीज दूसरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं, क्योंकि पंजीकरण खिड़की से लेकर फिजीशियन की ओपीडी तक मरीजों की भीड़ उमड़ी रहती है, जो कोविड-19 की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन व्यवस्था बनाने में जुटा हुआ है, बावजूद इसके कोई समाधान नहीं निकला।
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नवजात बच्चों का रखे विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मौद्गिल का कहना है कि मौसम में हो रहे परिवर्तन के कारण छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। दिन में तो मौसम गर्म होता है, लेकिन सुबह और रात में पहनावे पर ध्यान रखना चाहिए। कहा कि इन दिनों हमें सुबह-सुबह ठंड महसूस नहीं होती, लेकिन बच्चों के लिए यह काफी हानिकारक है। ऐसे मौसम में ठंडी चीजों से परहेज करें। बच्चों को सुबह बेड से उठ कर सीधे बाहर न जाने दें। बच्चों को सुबह फर्श पर नंगे पैर चलने से बचे। छोटे बच्चों के गीले कपड़े समय पर बदलते रहें, जिससे बच्चों को सर्दी, जुकाम खांसी से बचाया जा सके।
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लक्षण दिखाई देने में भेजते है फ्लू ओपीडी में : चिकित्सा अधीक्षक
चिकित्सा अधीक्षक एवं हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि जैसे-जैसे मौसम में परिवर्तन होना शुरू हो गया है। तभी से अस्पताल की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर के आ रहे हैं। कहा कि मौसम परिवर्तन से बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी के मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन जिन मरीजों को कोरोना वायरस के लक्षण दिखाजई देते हैं तो उन्हें फ्लू ओपीडी में रेफर किया जाता है, जहां उनका कोविड-19 टेस्ट करवाया जाता है। कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान खान पान और रहन सहन पर ध्यान दिया जाना अति आवश्यक है। तभी मौसमी बीमारियों के प्रकोप बचा जा सकता है। इसके अलावा अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर व्यवस्था बनाई जा रही है। सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि ओपीडी व पंजीकरण खिड़की पर मरीजों की भीड़ न उमड़े।