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Kurukshetra News: ओलंपियन गुरजीत कौर 19 नवंबर को शाहाबाद के जसदीप खैरा के साथ रचाएगी शादी
Fri, 14 Nov 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:38 AM IST
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कुरुक्षेत्र। ओलंपियन गुरजीत कौर और जसदीप खैरा। स्वयं
- फोटो : भेड़िये के हमले का शिकार बनी जाह्नवी।
कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। हॉकी नगरी शाहाबाद एक बार फिर खुशियों से सराबोर है। 2 नवंबर को हुई ओलंपियन रानी रामपाल की शादी ने सुर्खियां बटोरी थीं, वहीं अब भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी गुरजीत कौर दुल्हन बनकर शाहाबाद आ रही हैं। गुरजीत 19 नवंबर को शाहाबाद के युवा हॉकी कोच जसदीप सिंह खैरा के साथ सात फेरे लेंगी। विवाह समारोह अमृतसर में 19 नवंबर को होगा और रिसेप्शन 20 नवंबर को शाहाबाद के दी एंपिरियर पैलेस में आयोजित किया जाएगा।
टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक गोल दागकर भारत को पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचाने वाली गुरजीत कौर का नाम इतिहास में दर्ज है। पंजाब के अमृतसर जिले के गांव मियांदी कलां की रहने वाली गुरजीत, सतनाम सिंह और हरिजंद्र कौर की बेटी हैं। अपनी लगन और मेहनत से उन्होंने न सिर्फ देश का नाम रोशन किया बल्कि महिला हॉकी की नई पहचान बनाई।
दूल्हा जसदीप सिंह खैरा भी हॉकी से गहरा जुड़ाव रखते हैं। वह दो बार नेशनल स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं और वर्ष 2021 में एनआईएस कोच बने। वर्तमान में अंबाला सिटी में इमिग्रेशन व्यवसाय चला रहे जसदीप एक किसान परिवार से हैं। उनके पिता गुरदर्शन सिंह और मां स्वर्ण कौर गृहिणी हैं। शाहाबाद के एसजीएनपी स्कूल के बंद पड़े हॉकी मैदान को फिर से सक्रिय करने में जसदीप की अहम भूमिका रही है। शादी के बाद गुरजीत और जसदीप मिलकर नई पीढ़ी के हॉकी खिलाड़ियों को तैयार करेंगे। जसदीप सिंह ने कहा कि शादी के बाद भी गुरजीत का हॉकी कॅरिअर जारी रहेगा। वह जल्द ही हॉकी लीग में खेलने जाएंगी।
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गौरवशाली सफर और संघर्ष की मिसाल
गुरजीत कौर भारतीय रेलवे में ओएसडी स्पोर्ट्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एशिया कप 2017 में भारत को गोल्ड दिलाने में अहम भूमिका निभाई और एशियाई खेल 2018 में रजत तथा राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं। पिता सतनाम सिंह रोजाना उन्हें और उनकी बहन को साइकिल पर 13 किलोमीटर दूर स्कूल छोड़ने जाते थे। मेहनत और समर्पण ने ही उन्हें देश की शीर्ष हॉकी खिलाड़ियों में स्थान दिलाया।
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टोक्यो ओलंपिक 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ निर्णायक गोल दागकर भारत को पहली बार ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचाने वाली गुरजीत कौर का नाम इतिहास में दर्ज है। पंजाब के अमृतसर जिले के गांव मियांदी कलां की रहने वाली गुरजीत, सतनाम सिंह और हरिजंद्र कौर की बेटी हैं। अपनी लगन और मेहनत से उन्होंने न सिर्फ देश का नाम रोशन किया बल्कि महिला हॉकी की नई पहचान बनाई।
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दूल्हा जसदीप सिंह खैरा भी हॉकी से गहरा जुड़ाव रखते हैं। वह दो बार नेशनल स्तर पर हॉकी खेल चुके हैं और वर्ष 2021 में एनआईएस कोच बने। वर्तमान में अंबाला सिटी में इमिग्रेशन व्यवसाय चला रहे जसदीप एक किसान परिवार से हैं। उनके पिता गुरदर्शन सिंह और मां स्वर्ण कौर गृहिणी हैं। शाहाबाद के एसजीएनपी स्कूल के बंद पड़े हॉकी मैदान को फिर से सक्रिय करने में जसदीप की अहम भूमिका रही है। शादी के बाद गुरजीत और जसदीप मिलकर नई पीढ़ी के हॉकी खिलाड़ियों को तैयार करेंगे। जसदीप सिंह ने कहा कि शादी के बाद भी गुरजीत का हॉकी कॅरिअर जारी रहेगा। वह जल्द ही हॉकी लीग में खेलने जाएंगी।
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गौरवशाली सफर और संघर्ष की मिसाल
गुरजीत कौर भारतीय रेलवे में ओएसडी स्पोर्ट्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने एशिया कप 2017 में भारत को गोल्ड दिलाने में अहम भूमिका निभाई और एशियाई खेल 2018 में रजत तथा राष्ट्रमंडल खेल 2022 में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहीं। पिता सतनाम सिंह रोजाना उन्हें और उनकी बहन को साइकिल पर 13 किलोमीटर दूर स्कूल छोड़ने जाते थे। मेहनत और समर्पण ने ही उन्हें देश की शीर्ष हॉकी खिलाड़ियों में स्थान दिलाया।