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शिक्षा विभाग ने मारी पीजीटी की 80 लाख की एलटीसी पर कुंडली
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:09 AM IST
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जिले भर के सैकड़ों पीजीटी की लगभग 80 लाख रुपये की वर्ष 2012 से 15 ब्लॉक वर्ष की एलटीसी पर शिक्षा विभाग ने कुंडली मार ली है। निदेशालय के आदेशों के बावजूद भी यह कुंडली खुलने का नाम नहीं ले रही है। एलटीसी जारी किए जाने की मांग को लेकर ये शिक्षक न केवल जिला शिक्षा विभाग व निदेशालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे है बल्कि अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन भी बना लिया है। जानकारी के मुताबिक एलटीसी चार ब्लॉक वर्ष में एक बार एक माह की सैलरी के बराबर दी जाती है। बताया जा रहा है कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में के पीजीटी की एलटीसी का भुगतान किया जा चुका है जबकि कुरुक्षेत्र जिले के लगभग 200 पीजीटी न केवल कई वर्षों से इसके लिए धक्के खाने को मजबूर हो रहे है बल्कि निदेशालय के आदेशों के बाद भी कई माह से उन्हें यह एलटीसी जारी नहीं की जा सकी है। पीड़ित शिक्षकों की मानें तो वह जिला शिक्षा कार्यालय में लंबित एलटीसी को लेकर संबंधित पीजीटी की सूची भी दो बार विभाग को सौंप चुके है तो वहीं शिक्षा निदेशालय ने कई बार पत्र जारी कर इसकी पूरी जानकारी देने के साथ-साथ बजट जारी होने पर भुगतान के भी आदेश दिए है। इसके बावजूद विभाग के अधिकारी इन सैकड़ों पीजीटी की एलटीसी अटकाए हुए है।
शिक्षा निदेशालय ने 21 सितंबर को भी सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेज वर्ष 2012 से 15 के ब्लॉक वर्ष यहां तक की वर्ष 2016 तक की एलटीसी को लेकर मंजूरी भेजे जाने के आदेश दिए गए थे। जिन्हें कई जगहों पर गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके चलते ही 24 अक्तूबर को फिर निदेशालय की ओर से पत्र जारी कर तीन दिन में एलटीसी से महरूम रहे शिक्षकों की पूरी जानकारी दिए जाने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा था कि 9 से 12 तक पढ़ाई करवा रहे उन पीजीटी की पूरी जानकारी दी जाए, जिनकी एलटीसी बाकी है और मंजूरी नहीं हो पाई। इसके बावजूद भी आज तक उक्त सैकड़ों शिक्षक एलटीसी के लिए सड़कों पर उतने को मजबूर हो रहे है।
आपात बैठक कर जताया रोष
पीड़ित पीजीटी की रविवार को फिर आपात बैठक हुई, जिसमें विभाग की मनमानी पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। हरियाणा स्कूल पीजीटी एसोसिएशन के बैनर तले कुंवर अजय सिंह, ओमवीर, राजेश कुमार, नरेेश, प्रवीण, ईश्वर सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों ने कहा कि वह शिक्षा विभाग व निदेशालय के अनेकों चक्कर एलटीसी जारी किए जाने के लिए काट चुके है। अब जल्द ही उनकी एलटीसी जारी नहीं की गई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि अधिकारी जानबूझ कर उन्हें दरकिनार कर रहे है।
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बजट आ गया है मंजूरी दी जा रही है
जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य का कहना है कि पहले एलटीसी का बजट नहीं आया था और बजट के बिना सेंक्सन नहीं दी जा सकती थी। अब बजट आ गया है और मंजूरी दी जा रही है। जल्द ही सभी शिक्षकों को एलटीसी की मंजूरी जारी कर दी जाएगी। पहले जितना बजट आया है उसी अनुसार मंजूरी दी जाएगी और बाकी शिक्षक रहे तो फिर से बजट की डिमांड की जाएगी।
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शिक्षा निदेशालय ने 21 सितंबर को भी सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेज वर्ष 2012 से 15 के ब्लॉक वर्ष यहां तक की वर्ष 2016 तक की एलटीसी को लेकर मंजूरी भेजे जाने के आदेश दिए गए थे। जिन्हें कई जगहों पर गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके चलते ही 24 अक्तूबर को फिर निदेशालय की ओर से पत्र जारी कर तीन दिन में एलटीसी से महरूम रहे शिक्षकों की पूरी जानकारी दिए जाने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर कहा था कि 9 से 12 तक पढ़ाई करवा रहे उन पीजीटी की पूरी जानकारी दी जाए, जिनकी एलटीसी बाकी है और मंजूरी नहीं हो पाई। इसके बावजूद भी आज तक उक्त सैकड़ों शिक्षक एलटीसी के लिए सड़कों पर उतने को मजबूर हो रहे है।
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आपात बैठक कर जताया रोष
पीड़ित पीजीटी की रविवार को फिर आपात बैठक हुई, जिसमें विभाग की मनमानी पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। हरियाणा स्कूल पीजीटी एसोसिएशन के बैनर तले कुंवर अजय सिंह, ओमवीर, राजेश कुमार, नरेेश, प्रवीण, ईश्वर सिंह सहित दर्जनों शिक्षकों ने कहा कि वह शिक्षा विभाग व निदेशालय के अनेकों चक्कर एलटीसी जारी किए जाने के लिए काट चुके है। अब जल्द ही उनकी एलटीसी जारी नहीं की गई तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। उन्होंने आरोप लगाते हुए बताया कि अधिकारी जानबूझ कर उन्हें दरकिनार कर रहे है।
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बजट आ गया है मंजूरी दी जा रही है
जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य का कहना है कि पहले एलटीसी का बजट नहीं आया था और बजट के बिना सेंक्सन नहीं दी जा सकती थी। अब बजट आ गया है और मंजूरी दी जा रही है। जल्द ही सभी शिक्षकों को एलटीसी की मंजूरी जारी कर दी जाएगी। पहले जितना बजट आया है उसी अनुसार मंजूरी दी जाएगी और बाकी शिक्षक रहे तो फिर से बजट की डिमांड की जाएगी।