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देश की उन्नति में मातृभाषा का महत्वपूर्व योगदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2020 12:21 AM IST
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hindi caimpain in kurukshetra
कुरुक्षेत्र। जिस भाषा में हम हंसते और स्वप्न देखते है उसे भूल कर हम अपना ही नुकसान करेंगे, इतिहास गवाह है की उन्हीं राष्ट्र को ने तरक्की की है जिन्होंने अपनी मातृभाषा का सम्मान किया है, जबकि कितने ही देशों की तरक्की में उनकी मातृभाषा का हाथ रहा है। अमर उजाला द्वारा शुरू किया गया हिंदी हैं हम अभियान में हिंदी प्रेमी अपने विचार साझा कर रहे हैं और मातृभाषा हिंदी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
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हिंदी एक भाषा ही नहीं, बल्कि एक जीवन जीने की कला : डॉ. अशोक वर्मा
हिंदी प्रेमी, लेखक, कवि, पुलिस अधिकारी डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि हिंदी हमारे लिए एक भाषा ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह न केवल कला है, बल्कि विज्ञान भी है। जिस प्रकार जीवन को चलाने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है उसी प्रकार जीवन में उन्नति प्राप्त करने के लिए भाषा का प्रयोग अनिवार्य है और वो भाषा केवल और केवल हिंदी है। हिंदी का प्रयोग प्रत्येक भारतीय के लिए ऐसा है जैसे अपनी मां की सेवा करना। दूसरी ओर अन्य भाषा का ज्ञान तो हो लेकिन प्रयोग उसी प्रकार है जैसे अपनी बीमार मां को छोड़कर अन्य की मां की सेवा करना। कहने का तात्पर्य यह है कि सबसे पहले हमें अपनी मातृभाषा हिंदी का प्रचार प्रसार इतना करना चाहिए कि जन जन तक सरल भाषा में जनकल्याण और सर्व जन हिताय सर्वजन सुखाय का बोध हो सके। बताया कि वे अपने सभी कार्य हिंदी में करते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने अपने मोबाइल फोन में भी 3500 संपर्क हिंदी में ही संग्रहित किए हुए हैं। उनका कहना है कि हिंदी न केवल सरल भाषा है, बल्कि मानव मात्र के कल्याण के लिए एक संयोग भी है।
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देश को भावनात्मक एकता के सूत्र में बांधती है हिंदी : विनोद
हिंदी प्रेमी विनोद शर्मा ने कहा कि हिंदी भावनात्मक एकता सूत्र में बनाए रखने की अदम्य क्षमता रखती है। हिंदी भाषी होने पर मुझे गर्व है, क्योंकि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो हमारे देश के लगभग सभी राज्यों में बोली समझी जाती है और जो देश को भावनात्मक एकता सूत्र में बनाए रखने की अदम्य क्षमता रखती है। इसलिए ही तो स्वतंत्रता संग्राम के दौर में भी हिंदी भाषा में ही देश भक्ति की अलौकिक अलख जगाई गई थी और हिंदी के लिए हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सहयोग तथा बलिदान को हमें भूलना नहीं चाहिए।
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उन्हीं राष्ट्रों ने तरक्की की, जिन्होंने अपनी मातृभाषा का किया सम्मान : महाबीर
हिंदी प्रेमी महाबीर ने कहा कि जिस भाषा में हम हंसते और स्वप्न देखते है उसे भूल कर हम अपना ही नुकसान करेंगे, इतिहास गवाह है की उन्हीं राष्ट्र को ने तरक्की की है जिन्होंने अपनी मातृभाषा का सम्मान किया है, जबकि कितने ही देशों की तरक्की में उनकी मातृभाषा का हाथ रहा है। यही सही समय है कि हम अपनी मातृभाषा को संजोना शुरू करे और गर्व के साथ बोलने व कार्य स्थल पर हिंदी का प्रयोग करें।

विदेशी भाषाओं में मात्र अनुवाद, मूलविचार नहीं होते : सुनिधि शर्मा
छात्रा सुनिधि शर्मा ने कहा कि मनुष्य केवल अपनी मातृभाषा में ही सोच सकता है। अन्य भाषाओं मे तो मातृभाषा का अनुवाद ही होता है,जो मूलविचार नहीं होते। इसलिए केवल हिंदी भाषी ही नहीं सब अपनी मातृभाषा में ही बात करना पसंद करते है,क्योंकि उसमें विचारों की सही अभिव्यक्ति होती है। मातृभाषा के अलावा अन्य भाषा में उचित अभिव्यक्ति संभव नहीं है। अभिव्यक्ति के दौरान कहीं न कहीं वापस अपनी मातृभाषा पर लौटना ही होता है, उचित शब्द नहीं मिल पाते। इसीलिए अपनी मातृभाषा का सम्मान करें।
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