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गुरु ग्रंथ साहिब की छत्र छाया में फतेही जत्थे का जिले में तीन जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत
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गुरु ग्रंथ साहिब की छत्र छाया में फतेही जत्था रविवार दोपहर 2 बजे पिपली चौक पर पहुंचा। यहां भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूूनी का पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया। गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने भी हाथ जोड़कर उनका अभिवादन स्वीकार किया और सभी से उनका कुशल मंगल पूछा। वहीं जिस पालकी में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश कराया गया था उसे फूल मालाओं से सजाया गया था। पंच प्यारे और निहंगों के जत्थेदार राजा राज सिंह जत्थे की अगुवाई कर रहे थे। पिपली चौक पर चढ़ूनी ने दिल्ली आंदोलन की कई महत्वपूर्ण जानकारी किसानों के साथ साझा की। यहां 20 मिनट के ठहराव के बाद उनका जत्था शाहाबाद की ओर रवाना होगा। 15 दिसंबर को यह जत्था अमृतसर साहिब में पूर्ण होगा।
इससे पहले गुरनाम सिंह चढ़ूनी का उमरी चौक पर स्वागत किया गया। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे मौजूद रहे। जत्थे के स्वागत के लिए हाईवे के दोनों ओर किसान यूनियन के झंडे लगाए गए थे। वहीं शाहाबाद में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि 714 किसानों की शहादत के बाद किसान आंदोलन में जीत हासिल मिली है। सवा साल के लंबे संघर्ष के बाद कृषि कानून वापस हुए हैं। इससे साबित हो गया है कि अधिकार मांगने से नहीं बल्कि छीनने से ही मिलते हैं। कहा कि इस आंदोलन की जीत से पूंजीवाद ब्रेक लगी है। यह जीत दुनिया के लिए सबक है कि लोग पूंजीवाद नहीं बल्कि समाजवाद चाहते हैं। शाहाबाद के गांव रतनगढ़ में नरेंद्र सिंह हैप्पी चीमा और मारकंडा पुल पर जसबीर सिंह मामू माजरा, पवन बैंस व पंकज के नेतृत्व में जत्थे का जोरदार स्वागत किया गया। काफिले में कई जत्थेबंदी मौजूद रही। काफिले के शाहाबाद पहुंचने पर आतिशबाजी और पुष्प वर्षा की गई। इस मौके पर समय सिंह, साहब सिंह, विक्की मदान, जसबीर सिंह, मलकीत सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
बाक्स
15 जनवरी को बुलाई बैठक
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि यह आंदोलन स्थगित हुआ है खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने जिन बातों पर हामी भरी है उस पर नजर रखने की जरूरत है। इसलिए 15 जनवरी को बैठक बुलाई है ताकि सरकार अपनी बातों पर हेर-फेर न कर दें। अगर सरकार कोई गड़बड़ी करती है तो किसान फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे।
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इससे पहले गुरनाम सिंह चढ़ूनी का उमरी चौक पर स्वागत किया गया। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे मौजूद रहे। जत्थे के स्वागत के लिए हाईवे के दोनों ओर किसान यूनियन के झंडे लगाए गए थे। वहीं शाहाबाद में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि 714 किसानों की शहादत के बाद किसान आंदोलन में जीत हासिल मिली है। सवा साल के लंबे संघर्ष के बाद कृषि कानून वापस हुए हैं। इससे साबित हो गया है कि अधिकार मांगने से नहीं बल्कि छीनने से ही मिलते हैं। कहा कि इस आंदोलन की जीत से पूंजीवाद ब्रेक लगी है। यह जीत दुनिया के लिए सबक है कि लोग पूंजीवाद नहीं बल्कि समाजवाद चाहते हैं। शाहाबाद के गांव रतनगढ़ में नरेंद्र सिंह हैप्पी चीमा और मारकंडा पुल पर जसबीर सिंह मामू माजरा, पवन बैंस व पंकज के नेतृत्व में जत्थे का जोरदार स्वागत किया गया। काफिले में कई जत्थेबंदी मौजूद रही। काफिले के शाहाबाद पहुंचने पर आतिशबाजी और पुष्प वर्षा की गई। इस मौके पर समय सिंह, साहब सिंह, विक्की मदान, जसबीर सिंह, मलकीत सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
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15 जनवरी को बुलाई बैठक
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि यह आंदोलन स्थगित हुआ है खत्म नहीं हुआ है। सरकार ने जिन बातों पर हामी भरी है उस पर नजर रखने की जरूरत है। इसलिए 15 जनवरी को बैठक बुलाई है ताकि सरकार अपनी बातों पर हेर-फेर न कर दें। अगर सरकार कोई गड़बड़ी करती है तो किसान फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे।
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