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गरीब का आशियाना ढहाया, पाई-पाई को मोहताज हुआ परिवार

Tue, 02 Jan 2018 12:45 AM IST
Updated Tue, 02 Jan 2018 12:45 AM IST
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गरीब का आशियाना ढहाया, पाई-पाई को मोहताज हुआ परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
विभागीय तालमेल में गड़बड़ी के बाद अपनी नाकामी छुपाने के लिए जिले के अधिकारियों ने पिपली-लाडवा रोड पर दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले परिवार को 15 लाख तक का झटका दे दिया। रोड पर 30 मीटर दायरे में वैध जगह पर बने मकान और दुकानों को टाउन प्लानिंग विभाग के गिराने के बाद पीड़ित परिवार पाई-पाई को मोहताज हो गया है। इस निर्माण को अपने निवास और कामकाज के लिए बनाया परिवार ने बनाया था। इसे ही डीटीपी ने तोड़ डाला। हालत ये है कि दो लड़कियों के पिता को 60 वर्ष की उम्र में भी रेहड़ी लगाकर गुजर-बसर करनी पड़ रही है। लेकिन, लाडवा में रैली सहित अन्य कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए इस रोड से आए दिन गुजरने के बावजूद सरकार की तरफ से न सीएम, न कैबिनेट मंत्री, न राज्यमंत्री, न ही हलका विधायक पवन सैनी ने इस समस्या पर कोई संज्ञान लिया।
अमर उजाला ने पीड़ित गुरचरण की परेशानी को सुना तो उन्होंने बताया कि वैध रजिस्ट्री के बाद भी जगह पर बने निर्माण को अधिकारियों ने स्वाहा कर दिया। उन्होंने यहां निर्माण इस उम्मीद के साथ किया था कि पीछे की तरफ रिहायश और सामने की तरफ दुकानों में अपना कारोबार कर सकेंगे, लेकिन अधिकारियों ने बिना कुछ सोचे-समझे निर्माण के साथ उनकी उम्मीदों को भी ढहा दिया है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई वर्ष 2013 में टाउन प्लानिंग विभाग ने की है।
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पीड़ित ने कहा कि यदि पिपली-लाडवा रोड पर सड़क के दोनों तरफ 30 मीटर की जगह प्रतिबंधित थी, तो यहां शनि मंदिर के निकट 550 गज के प्लॉट की रजिस्ट्री कैसे हो गई। यदि रजिस्ट्री वैध है तो फिर निर्माण कैसे अवैध हो सकता है। उन्होंने कहा कि असल दोषी अधिकारी है। न तो यहां प्रतिबंधित जगह में रजिस्ट्री करते और न ही उनको लाखों का नुकसान होता। लिहाजा, आमजन को पीड़ा देने वाले और सरकारी सिस्टम पर धब्बा लगाने वाले अधिकारियों पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। उनके नुकसान की भरपाई कर निर्माण को बनने दिया जाए।
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निर्माण टूटने से 12 लाख का नुकसान : पीड़ित गुरचरण
उन्होंने बताया कि टाउन प्लानर की कार्रवाई में लेंटर, दीवारें, शटर और गेट गिरने से उन्हें करीब 12 लाख का नुकसान हुआ। सामने की करीब 10 फुट जगह छोड़कर निर्माण कामचलाऊ बनाने में ढाई-तीन लाख रुपये फिर खर्च हो गए। पिपली-लाडवा रोड से सीएम, मंत्री, विधायक और नेताओं का काफिला आए दिन निकलता है। लेकिन, करीब पांच साल से टूटे मकान-दुकानों को देखकर भी उनकी हालत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

दो लड़कियों का पिता हूं, उधार लेकर करनी पड़ रही शादी : गुरचरण
पीड़ित गुरचरण ने कहा कि दो लड़कियों का पिता हूं, जिसमें से एक की शादी किसी से उधार मांगकर की। दूसरी बेटी की शादी के लिए 60 साल की उम्र में अंडे की रेहड़ी लगाकर पैसे जुटाना मजबूरी हो गई है। चार भाइयों के परिवार में बड़ा भाई भाग सिंह अधरंग पीड़ित है। इनसे छोटा लाभ सिंह और कृपाल सिंह ड्राइक्लीनिंग और पाइप फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। वे इकट्ठे रहते हैं और करीब 30 लोगों का बड़ी मुश्किल से गुजारा कर पाता है। कोई सरकारी नौकरी पर नहीं है। बच्चे भी दिहाड़ी करते हैं। अधिकारियों ने पाई-पाई का मोहताज बना दिया है। भाजपा सरकार से मांग है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

बैंक, पेट्रोल पंप, थाना, शैलर, पाइप फैक्टरी चल सकती है तो उनका निर्माण क्यू नहीं : पीड़ित
पीड़ित गुरचरण सिंह ने कहा कि लाडवा-पिपली रोड पर प्रतिबंधित 30 मीटर दायरे में सरकारी-प्राइवेट बैंक, पेट्रोल पंप, पैलेस, ढाबे, अस्पताल आदि बने हुए हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी, गोदाम, पाइप फैक्टरी, राइस मिल-शैलर, पुलिस थाना और ट्रैक्टर एजेंसी आदि भी चल रही हैं। उन्होंने सरकारी सिस्टम और अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि जब इस दायरे में निर्माण के भीतर इतने उपक्रम चल सकते हैं तो गरीब परिवार यहां अपना रोजगार क्यू नहीं कर सकता। उन्हें क्यू परेशान किया जा रहा है।


रजिस्ट्री से मना नहीं, लेकिन निर्माण नहीं कर सकते : डीसी
इस मामले में डीसी भी अपने अधीन अधिकारियों का बचाव करती नजर आई। पीड़ितों को न्याय दिलाने और मामले में जांच कराने की बजाय डीसी ने तहसीलदार और टाउन प्लानिंग विभाग के अलग-अलग एक्ट का हवाला दिया। डीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि रेवेन्यू एक्ट के अनुसार रजिस्ट्री से मना नहीं किया जा सकता। रजिस्ट्री से निर्माण का अधिकार नहीं मिलता। तहसीलदार और टाउन प्लानिंग विभाग अपने-अपने एक्ट के अनुसार कार्य करते हैं। जब डीसी से पूछा गया कि प्रतिबंधित जगह में रजिस्ट्री कैसे हो गई, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई।
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