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Kurukshetra News: 375 महिला अधिवक्ता करेंगी बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान, खुद नहीं बन पाई आज तक प्रधान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:52 AM IST
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375 women advocates will vote in the Bar Association elections, but have not yet become president.
कुरुक्षेत्र। जिला बार एसोसिएशन के चुनाव 11 सितंबर को होंगे। इस बार महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी नेतृत्व का फैसला करने में अहम रहेगी। मतदान में प्रभावी हिस्सेदारी के बावजूद महिलाएं अब तक नेतृत्व में पिछड़ी हुई हैं। बार एसोसिएशन की प्रधानगी के पद पर कोई महिला अधिवक्ता नहीं पहुंच पाई है। इस चुनाव में 375 महिला अधिवक्ताओं के मत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने उनसे संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अधिवक्ताओं में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। महिला अधिवक्ताओं के मत चुनावी समीकरण में खास माने जा रहे हैं।
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पहली बार महिला अधिवक्ता बनीं एआरओ

इस बार चुनाव प्रक्रिया में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। पहली बार किसी महिला अधिवक्ता रेखा सैनी को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) की जिम्मेदारी दी गई है। इसे महिला अधिवक्ताओं के लिए संगठनात्मक स्तर पर बढ़ती भागीदारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले करीब दो साल से बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में दो महिला अधिवक्ताओं को एग्जीक्यूटिव सदस्य के तौर पर शामिल किया जाने लगा है। इससे महिलाओं को एसोसिएशन की निर्णय प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर मिल रहा है।
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मतदान में मजबूत, नेतृत्व में अब भी पीछे
बार एसोसिएशन के चुनाव में महिला अधिवक्ताओं की संख्या इतनी है कि वे किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती हैं लेकिन प्रधान, उपप्रधान और अन्य प्रमुख पदों पर महिलाओं की दावेदारी अभी भी सीमित रही है। खासतौर पर प्रधान पद तक आज तक किसी महिला अधिवक्ता का न पहुंचना चर्चा का विषय है। कई महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि अब समय आ गया है कि मतदान तक सीमित भागीदारी के बजाय महिलाएं चुनाव लड़कर संगठन के नेतृत्व में भी आगे आएं। इसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार के माहौल को भी महिलाओं के लिए अधिक प्रोत्साहन वाला बनाने की जरूरत है।
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चुनाव लड़ने से ही पीछे हटती रही महिला अधिवक्ता

बार से जुड़े कई अधिवक्ताओं का कहना है कि अभी तक चुनाव लड़ने से ही महिला अधिवक्ता पीछे हटती रही है। आज तक प्रधान पद के लिए करीब 30 साल पहले अधिवक्ता शारदा ने प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ा था जिसमें वे हार गई थीं। इसके बाद किसी ने इस पद के लिए चुनाव ही नहीं लड़ा। वर्ष 2016 में रेखा सैनी पहली बार एसोसिएशन में संयुक्त सचिव बनी थीं, जिन्होंने अधिवक्ता जसप्रीत को हराया था। वहीं वर्ष 2019 में वे सचिव के लिए मैदान में उतरी थी और उनके सामने दो पुरुष अधिवक्ता विकास तोमर व सोमनाथ कक्कड़ मैदान में थे। इस चुनाव में विकास तोमर जीते थे।

पहली बार उपप्रधान पद पर महिलाओं को मौका

सहायक चुनाव अधिकारी रेखा सैनी बताती है कि पहली बार इस चुनाव में उपप्रधान पद के लिए महिलाओं को मौका दिया गया है, जिसके चलते विक्रम शर्मा पैनल से आरती अग्रवाल व सहदेव रढान पैनल से मंजू रानी मैदान में उतरी है। हालांकि एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट के लिए पुरुष अधिवक्ताओं सतपाल सिंह व प्रवीन चोपड़ा आमने-सामने आए हैं।

नेतृत्व में भी आगे आना जरूरी : रेखा सैनी
अधिवक्ता रेखा सैनी का कहना है कि महिलाओं की संख्या बार में लगातार बढ़ रही है। चुनाव में हमारा वोट महत्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही महिलाओं को खुद भी चुनाव लड़कर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। आने वाले समय में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है। पहली बार महिला अधिवक्ता को एआरओ की जिम्मेदारी मिलना भी महत्वपूर्ण है। इससे अन्य महिला अधिवक्ताओं को भी आगे आने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।


अधिवक्ता पूजा बिशीर का कहना है कि बार की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़नी चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि महिलाएं प्रमुख पदों के लिए भी आगे आएं और चुनाव लड़ें।
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