{"_id":"5c6718d9bdec2273ab6076e7","slug":"161550260441-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंडियन एकेडमी ऑफ अप्लाईड साइकोलॉजी की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंडियन एकेडमी ऑफ अप्लाईड साइकोलॉजी की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सेना में मनोविज्ञान की जरूरत पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से इंडियन एकेडमी ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी की 54वीं राष्ट्रीय एवं 23वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मनोवैज्ञानिकों ने सेना में मनोविज्ञान विषय पर विशेष सिंफोजियम में हिस्सा लिया। मनोवैज्ञानिकों ने सेना में मनोविज्ञान की विभिन्न आवश्यकताओं पर चर्चा की। व्यक्तित्व, स्ट्रैटेजिक बिहेवियर सहित विभिन्न विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कांफ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. हरदीप जोशी एवं डॉ. रंजना ने बताया कि दूसरे दिन 18 तकनीकी सत्रों में 180 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए। शोध पत्रों में मुख्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग, स्वास्थ्य मनोविज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर शोधपत्र पढ़े गए। तीन दिवसीय कांफ्रेंस के विभिन्न तकनीकी सत्रों में मनोवैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों द्वारा शोध-पत्र पढ़े जा रहे हैं। इस अवसर पर शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से इंडियन एकेडमी ऑफ एप्लाइड साइकोलॉजी की 54वीं राष्ट्रीय एवं 23वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मनोवैज्ञानिकों ने सेना में मनोविज्ञान विषय पर विशेष सिंफोजियम में हिस्सा लिया। मनोवैज्ञानिकों ने सेना में मनोविज्ञान की विभिन्न आवश्यकताओं पर चर्चा की। व्यक्तित्व, स्ट्रैटेजिक बिहेवियर सहित विभिन्न विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। कांफ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. हरदीप जोशी एवं डॉ. रंजना ने बताया कि दूसरे दिन 18 तकनीकी सत्रों में 180 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए। शोध पत्रों में मुख्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग, स्वास्थ्य मनोविज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर शोधपत्र पढ़े गए। तीन दिवसीय कांफ्रेंस के विभिन्न तकनीकी सत्रों में मनोवैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों द्वारा शोध-पत्र पढ़े जा रहे हैं। इस अवसर पर शिक्षक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे।