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भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणि विवाह ं ं
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:14 AM IST
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भागवत कथा में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा पिपली के श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 7वें दिन कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी प्रसंग विस्तार से सुनाया। इस मौके पर श्रीकृष्ण-रुक्मिणी बने बाल कलाकारों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। कथा आयोजकों एवं श्रद्धालुओं ने भागवत पूजन करके दीप प्रज्ज्वलित किया। गायकों द्वारा सुनाए गए भजन राधिका गौरी से, बृज की छोरी से मईया करा दे मोरा ब्याह....और आओ मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगा दो, मेहंदी लगाके मुझे ऐसा सजा दो, मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो....पर सभी श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा करके श्रीकृष्ण-रुक्मिणी को उपहारों की सौगात दी। शास्त्री ने कहा कि जिन लोगों की कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें रुक्मणी मंगल का पाठ कराना चाहिए। प्रवचनों में बताया गया कि संसार में केवल रोगों की दवा है, मृत्यु की नहीं। मृत्यु की दवा केवल हरिनाम संकीर्तन में है जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाता है। भागवत आरती में आचार्य श्रीकांत तिवारी, पुजारी बैजनाथ शर्मा, पंच विमला देवी, सुदेश रानी, रानी देवी, मोनिका अरोड़ा, अनिल अरोड़ा, विजय गांधी, लक्ष्मी नारायण शर्मा, नीरज मदान, पंच चरणजीत मेंहदीरत्ता, हेमंत वधवा, राजीव कौशिक, अवतार सैनी, डॉ. राजेश गौतम, भूपेंद्र चौपड़ा, धर्मपाल गर्ग, विरेंद्र परूथी, हरदेव जोशी, दयानंद दीक्षित, कृष्णा देवी, रानी सैनी, रेयान वधवा, कमल कक्कड़, पूजा कुकरेजा, सुमन गोयल और ऋतु वधवा मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गो-गीता-गायत्री सत्संग सेवा समिति द्वारा पिपली के श्रीराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 7वें दिन कथावाचक पंडित अनिल शास्त्री ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी प्रसंग विस्तार से सुनाया। इस मौके पर श्रीकृष्ण-रुक्मिणी बने बाल कलाकारों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। कथा आयोजकों एवं श्रद्धालुओं ने भागवत पूजन करके दीप प्रज्ज्वलित किया। गायकों द्वारा सुनाए गए भजन राधिका गौरी से, बृज की छोरी से मईया करा दे मोरा ब्याह....और आओ मेरी सखियों मुझे मेहंदी लगा दो, मेहंदी लगाके मुझे ऐसा सजा दो, मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो....पर सभी श्रद्धालु झूम उठे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा करके श्रीकृष्ण-रुक्मिणी को उपहारों की सौगात दी। शास्त्री ने कहा कि जिन लोगों की कन्याओं के विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें रुक्मणी मंगल का पाठ कराना चाहिए। प्रवचनों में बताया गया कि संसार में केवल रोगों की दवा है, मृत्यु की नहीं। मृत्यु की दवा केवल हरिनाम संकीर्तन में है जो मनुष्य को भवसागर से पार लगाता है। भागवत आरती में आचार्य श्रीकांत तिवारी, पुजारी बैजनाथ शर्मा, पंच विमला देवी, सुदेश रानी, रानी देवी, मोनिका अरोड़ा, अनिल अरोड़ा, विजय गांधी, लक्ष्मी नारायण शर्मा, नीरज मदान, पंच चरणजीत मेंहदीरत्ता, हेमंत वधवा, राजीव कौशिक, अवतार सैनी, डॉ. राजेश गौतम, भूपेंद्र चौपड़ा, धर्मपाल गर्ग, विरेंद्र परूथी, हरदेव जोशी, दयानंद दीक्षित, कृष्णा देवी, रानी सैनी, रेयान वधवा, कमल कक्कड़, पूजा कुकरेजा, सुमन गोयल और ऋतु वधवा मौजूद रहे।