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रविवारीय शुक्ल सप्तमी के मेले में लगा श्रद्धालुओं का तांता
Updated Mon, 27 Nov 2017 12:14 AM IST
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रविवारीय शुक्ल सप्तमी के मेले में लगा श्रद्धालुओं का तांता
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर मार्गशीर्ष मास में रविवारीय शुक्ल सप्तमी का मेला लगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव का परिचय दिया। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक रविवारीय शुक्ल सप्तमी के अवसर पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के गांव कमौदा में स्थित काम्यकेश्वर तीर्थ में मेला लगता है। श्रद्धालुओं ने तीर्थ के तालाब में स्नान करने के उपरांत मंदिर में भक्तिभाव के साथ पूजन किया।
मंदिर के सेवक सुमिंद्र शास्त्री और रोहित कौशिक ने बताया कि इस वर्ष गीता जयंती के अवसर पर रविवारीय शुक्ल सप्तमी का योग बना है। काम्यकेश्वर महादेव मंदिर और तीर्थ में विशाल मेले में दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ऐसी मान्यता है कि इसी तीर्थ पर भगवान श्री कृष्ण और पांडवों का अज्ञातवास के दौरान मिलन हुआ था। यहीं भगवान सूर्य का अपनी पत्नी छाया से मिलन हुआ था। ऋषि ने हजारों ब्राह्मणों के साथ पांडवों ने इस तीर्थ पर अनुष्ठान करवाया। इसके बाद भगवान शिव की कृपा से पांडवों को खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ। मेले में जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी भी पहुंचे। उनके सानिध्य में मेले के अवसर पर श्रद्धालुओं और सेवकों ने गीता के 700 श्लोकों के साथ यज्ञ में पूर्णाहुति दी।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर मार्गशीर्ष मास में रविवारीय शुक्ल सप्तमी का मेला लगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव का परिचय दिया। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक रविवारीय शुक्ल सप्तमी के अवसर पर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के गांव कमौदा में स्थित काम्यकेश्वर तीर्थ में मेला लगता है। श्रद्धालुओं ने तीर्थ के तालाब में स्नान करने के उपरांत मंदिर में भक्तिभाव के साथ पूजन किया।
मंदिर के सेवक सुमिंद्र शास्त्री और रोहित कौशिक ने बताया कि इस वर्ष गीता जयंती के अवसर पर रविवारीय शुक्ल सप्तमी का योग बना है। काम्यकेश्वर महादेव मंदिर और तीर्थ में विशाल मेले में दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ऐसी मान्यता है कि इसी तीर्थ पर भगवान श्री कृष्ण और पांडवों का अज्ञातवास के दौरान मिलन हुआ था। यहीं भगवान सूर्य का अपनी पत्नी छाया से मिलन हुआ था। ऋषि ने हजारों ब्राह्मणों के साथ पांडवों ने इस तीर्थ पर अनुष्ठान करवाया। इसके बाद भगवान शिव की कृपा से पांडवों को खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ। मेले में जयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी भी पहुंचे। उनके सानिध्य में मेले के अवसर पर श्रद्धालुओं और सेवकों ने गीता के 700 श्लोकों के साथ यज्ञ में पूर्णाहुति दी।
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