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Karnal News: किशोरों और युवाओं में कमजोर हो रहा पाचन तंत्र
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करनाल। जंक फूड और शक्कर युक्त पेय पदार्थों से लोगों का पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। इनमें किशोर व युवा भी शामिल हैं, क्योंकि यही वर्ग सबसे ज्यादा जंक फूड का सेवन कर रहा है। चिकित्सक इसे बड़ी चिंता का विषय मानते हुए जंक फूड व पेय पदार्थों का सेवन न करने की सलाह दे रहे हैं।
करनाल जिले में इन दिनों ऐसे फूड का प्रचलन बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। विभिन्न सेक्टरों, बाजारों व मोहल्लों में छोटी-बड़ी स्ट्रीट फूड मार्केट में ऐसा खाना खूब परोसा जा रहा है। हैरत की बात यह कि ऐसी दुकानों व स्टॉलों पर लोगों खासकर युवाओं व किशोरों की भीड़ भी बहुत ज्यादा रहती है।
विशेषज्ञ डॉ. संजीव कौशिक कहते हैं कि युवाओं में बढ़ रही यही प्रवृति स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक बन रही है और इसका सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ रहा है। उनकी पाचन शक्ति बिगड़ रही है और इस खाने को पचाना अब उनके लिए मुश्किल हो रहा है। इस वजह से कई अन्य तरह की बीमारियां भी पनप सकती हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि दरअसल, ये आदतें बच्चों में परिवार के भोजन पैटर्न, विज्ञापन प्रभाव और बाहर के खाने-पीने की आदतों से जुड़ीं होती हैं। जंक फूड, शक्कर युक्त पेय पदार्थों की बढ़ती खपत बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसके लिए
अभिभावकों को ज्यादा सजग रहना होगा। जैसे, भोजन को अधिक पौष्टिक बनाने के साथ-साथ उसमें थोड़ा बदलाव लाएं और घर पर ही अपने बच्चों को ऐसा ताजा भोजन बनाकर खिलाएं, जिनके लिए वे बाहर जाते हैं।
उन्होंने बताया कि फूड स्ट्रीट मार्केट में अधिकतर दुकानदार एक बार इस्तेमाल किया गए तेल व घी का कई बार इस्तेमाल करते हैं। ऐसे तेल व घी में बना खाद्य पदार्थ सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
डॉ. वंदना बताती हैं कि इस तरह तैयार खाने के सेवन से शरीर में बासे तेल की मात्रा अधिक होने लगती है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।
फूड के इसी पैटर्न को बार-बार दोहराने से गंभीर बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जंक फूड में बहुत ज्यादा कैलोरी और वसा होती है, जिससे माेटापे का खतरा भी बना रहता है। साथ ही इसके अत्यधिक सेवन से लीवर के पूरी तरह खराब होने की संभावना अधिक हो जाती है क्योंकि फाइबर की कमी वाले भोजन से कब्ज और गैस जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी के दौरान ऐसे काफी मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें कम उम्र के लोगों को कमजोर पाचन तंत्र की शिकायतें हैं। इसके अलावा आने वाले हर दूसरे मरीज को उच्च वसा और कोलेस्ट्रॉल वाले पदार्थों के सेवन से दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक और अत्यधिक बीपी रहने का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे मरीजों में 18 से 30 वर्ष के लोग ज्यादा हैं।
डॉ. वंदना का मानना है कि स्वस्थ खाना केवल शारीरिक वृद्धि के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। सही खानपान और संतुलित आहार युवाओं को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकता है।
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करनाल जिले में इन दिनों ऐसे फूड का प्रचलन बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। विभिन्न सेक्टरों, बाजारों व मोहल्लों में छोटी-बड़ी स्ट्रीट फूड मार्केट में ऐसा खाना खूब परोसा जा रहा है। हैरत की बात यह कि ऐसी दुकानों व स्टॉलों पर लोगों खासकर युवाओं व किशोरों की भीड़ भी बहुत ज्यादा रहती है।
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विशेषज्ञ डॉ. संजीव कौशिक कहते हैं कि युवाओं में बढ़ रही यही प्रवृति स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक बन रही है और इसका सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ रहा है। उनकी पाचन शक्ति बिगड़ रही है और इस खाने को पचाना अब उनके लिए मुश्किल हो रहा है। इस वजह से कई अन्य तरह की बीमारियां भी पनप सकती हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल की आहार विशेषज्ञ डॉ. वंदना ने बताया कि दरअसल, ये आदतें बच्चों में परिवार के भोजन पैटर्न, विज्ञापन प्रभाव और बाहर के खाने-पीने की आदतों से जुड़ीं होती हैं। जंक फूड, शक्कर युक्त पेय पदार्थों की बढ़ती खपत बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसके लिए
अभिभावकों को ज्यादा सजग रहना होगा। जैसे, भोजन को अधिक पौष्टिक बनाने के साथ-साथ उसमें थोड़ा बदलाव लाएं और घर पर ही अपने बच्चों को ऐसा ताजा भोजन बनाकर खिलाएं, जिनके लिए वे बाहर जाते हैं।
उन्होंने बताया कि फूड स्ट्रीट मार्केट में अधिकतर दुकानदार एक बार इस्तेमाल किया गए तेल व घी का कई बार इस्तेमाल करते हैं। ऐसे तेल व घी में बना खाद्य पदार्थ सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
डॉ. वंदना बताती हैं कि इस तरह तैयार खाने के सेवन से शरीर में बासे तेल की मात्रा अधिक होने लगती है और पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।
फूड के इसी पैटर्न को बार-बार दोहराने से गंभीर बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा जंक फूड में बहुत ज्यादा कैलोरी और वसा होती है, जिससे माेटापे का खतरा भी बना रहता है। साथ ही इसके अत्यधिक सेवन से लीवर के पूरी तरह खराब होने की संभावना अधिक हो जाती है क्योंकि फाइबर की कमी वाले भोजन से कब्ज और गैस जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में ओपीडी के दौरान ऐसे काफी मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें कम उम्र के लोगों को कमजोर पाचन तंत्र की शिकायतें हैं। इसके अलावा आने वाले हर दूसरे मरीज को उच्च वसा और कोलेस्ट्रॉल वाले पदार्थों के सेवन से दिल की बीमारियां जैसे हार्ट अटैक और अत्यधिक बीपी रहने का खतरा भी बढ़ रहा है। ऐसे मरीजों में 18 से 30 वर्ष के लोग ज्यादा हैं।
डॉ. वंदना का मानना है कि स्वस्थ खाना केवल शारीरिक वृद्धि के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। सही खानपान और संतुलित आहार युवाओं को एक बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकता है।