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Karnal News: एमडीएच डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर सवा पांच लाख की ठगी करने के दो गिरफ्तार
Thu, 16 Apr 2026 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:22 AM IST
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यमुनानगर। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एमडीएच कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर सवा पांच लाख रुपये की ठगी करने वाले दो आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी बिहार के जिला नालंदा के गांव हुसैना के निवासी हैं और वर्ष 2024 में दर्ज इस मामले में फरार चल रहे थे। बुधवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश कर छह दिन के रिमांड पर लिया गया है।
थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतापनगर निवासी कुमार गौरव ने शिकायत दी थी कि उसने अपने परिचित के साथ नया कारोबार शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी दौरान फेसबुक पर एमडीएच मसालों की डीलरशिप से जुड़ा विज्ञापन देखा। आवेदन करने के बाद पीड़ित से अलग-अलग फीस के नाम पर पहले 39 हजार 800 रुपये, फिर 98 हजार 725 रुपये और बाद में एनओसी व अन्य चार्ज के रूप में 2.83 लाख रुपये जमा कराए गए।
इतना ही नहीं, फाइनल डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर 92 हजार 800 रुपये भी ठग लिए गए। आरोपियों ने कंपनी के नाम से फर्जी बैंक खाता और ईमेल का इस्तेमाल कर विश्वास जीत लिया। जब बार-बार भुगतान के बावजूद डीलरशिप नहीं मिली और तीन लाख रुपये की और मांग की गई, तब पीड़ित को ठगी शक हुआ। असली कंपनी से संपर्क करने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। इसके बाद 31 जनवरी को साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब रिमांड के दौरान पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
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थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतापनगर निवासी कुमार गौरव ने शिकायत दी थी कि उसने अपने परिचित के साथ नया कारोबार शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी दौरान फेसबुक पर एमडीएच मसालों की डीलरशिप से जुड़ा विज्ञापन देखा। आवेदन करने के बाद पीड़ित से अलग-अलग फीस के नाम पर पहले 39 हजार 800 रुपये, फिर 98 हजार 725 रुपये और बाद में एनओसी व अन्य चार्ज के रूप में 2.83 लाख रुपये जमा कराए गए।
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इतना ही नहीं, फाइनल डिस्ट्रीब्यूटरशिप के नाम पर 92 हजार 800 रुपये भी ठग लिए गए। आरोपियों ने कंपनी के नाम से फर्जी बैंक खाता और ईमेल का इस्तेमाल कर विश्वास जीत लिया। जब बार-बार भुगतान के बावजूद डीलरशिप नहीं मिली और तीन लाख रुपये की और मांग की गई, तब पीड़ित को ठगी शक हुआ। असली कंपनी से संपर्क करने पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। इसके बाद 31 जनवरी को साइबर थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब रिमांड के दौरान पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
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