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Karnal News: न्याय की गुहार लगाते फफक पड़ी नवविवाहिता, महिला जज ने बंधाया ढांढस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Nov 2022 09:00 AM IST
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The newly wed woman burst into tears pleading for justice, the female judge consoled her
लोक अदालत में केस की सुनवाई करते जज। संवाद
अनुज शर्मा
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करनाल। राष्ट्रीय लोक अदालत की फैमिली कोर्ट में पहुंची एक नवविवाहिता महिला जज को अपनी आपबीति सुनाते हुए फफक पड़ी। ऐसे में तुरंत महिला जज ने सुनवाई को रोकते हुए नवविवाहिता को ढांढस बंधाया। साथ ही भविष्य में किसी के भी सामने न रोने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रोने से आरोपी पक्ष के सामने आप कमजोर लगते हैं। पुरुषों का वर्चस्व भी महिलाओं से ही है। ऐसे में महिलाओं को किसी भी परिस्थिति में रोना नहीं चाहिए।
यह मामला करनाल की राष्ट्रीय लोक अदालत में फैमिली कोर्ट की प्रिंसिपल जज रितू वाई के बहल की कोर्ट में सामने आया। जहां एक नवविवाहिता ने अपने पति से तंग आकर तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में केस डाला था। वहीं शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में केस के बारे में बताते हुए नवविवाहिता ने पति के साथ न रहने की बात कही और उस पर हुए अत्याचारों के बारे में बताते हुए रो पड़ी।
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हरियाणा राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंद्र शेखर के मार्गदर्शन और कंचन माही अतिरिक्त जिला एवं न्यायाधीश प्रथम की अध्यक्षता में आठ बैंचों में राष्ट्रीय लोक अदालत संपन्न हुई। वहीं ईशा खत्री चीफ ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिसमें 15082 मामलों को शामिल किया गया। इनमें से 4464 मामलों को दोनों पक्षों द्वारा सौहार्दपूर्ण समझौते के माध्यम से निपटाया गया।
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नागरिक विवाद और घरेलू हिंसा पर हुई सुनवाई
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सीजेएम जसबीर कौर ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में दुर्घटना के दावों, चेक बाउंस, बैंक वसूली, जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित नागरिक विवादों और यहां तक कि घरेलू हिंसा अधिनियम आदि से संबंधित मामलों सहित कंपाउंडेबल अपराधों के आपराधिक मामलों को लिया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत ने सभी माध्यमों से व्हाट्सएप, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और यहां तक कि कोर्ट परिसर में भौतिक उपस्थिति का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि पीएलए चेयरमैन अजय कुमार जैन व सदस्य गोपाल कृष्ण कौशिश स्थायी लोक अदालत, जनोपयोगी सेवाओं का भी गठन किया गया ताकि सभी जनोपयोगी सेवाओं के मुकदमे-पूर्व चरण में मामलों का निपटारा किया जा सके। जिसमें सभी 696 मामलों में सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के लिए स्थायी लोक अदालत में लिया गया। जिसमें से 55 मामलों का निपटारा किया गया। सीजेएम जसबीर कौर ने बताया कि लोक अदालत विवादों के निपटारे के प्रभावशाली तरीकों में से एक है। लोक अदालतों में विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया जाता है।
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