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Karnal News: त्योहार के दिन घर आए बेटों के शव... खुशियों की जगह मातम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Oct 2025 12:52 AM IST
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The bodies of sons arrived home on a festival day... mourning replaced happiness.
त्योहार के दिन घर आए बेटों के शव... खुशियों की जगह मातम
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। घोघड़ीपुर गांव के पास मंगलवार की शाम को नहर में डूबे आनंद विहार वासी लक्की (15) और प्रतीक (12) का शव बड़ौता गांव के पास बरामद हो गया है। प्रतीक का शव वीरवार की रात 11:30 बजे नजर में उतराता नजर आया तो लक्की का शव शुक्रवार को सुबह 10 बजे दिखाई दिया। करवाचौथ के त्योहार के दिन दोनों बेटों के शव घर पहुंचे। ऐसे में परिवार में खुशियों की जगह मातम छा गया। लाडलों का शव देखकर दोनों के माता-पिता बेसुध हो गए।
पुलिस के अनुसार, नहर का पानी कम होने के बाद प्रतीक का शव रात को ऊपर आ गया था। गोताखोर की मदद से शव निकाला गया। वहीं शुक्रवार को सर्च अभियान के दौरान नहर का पुल पार करके एक गोताखोर ने शव उतराता देखा। बाहर निकालने पर लक्की के रूप में पहचान हुई। पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव वारिसों को सौंप दिए गए।
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एक का फिसला था पैर, दूसरे ने बचाने के लिए लगाई छलांग

मंगलवार की शाम को तीन बच्चे नहर पर घूमने गए थे। लक्की का नहर पर सेल्फी लेते हुए पैर फिसल गया। उसे बचाने के लिए प्रतीक ने भी छलांग लगा दी। तीसरा बच्चा आयुष उर्फ अमन थोड़ी दूर खड़ा था। उसने परिवार को जानकारी दी। तीनों आनंद विहार कॉलोनी में पड़ोसी थे। हमेशा एक साथ ही गली में खेलते और साइकिल चलाते थे।
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प्रतीक इकलौता तो लक्की परिवार का बड़ा बेटा था

प्रतीक अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसका जन्म बेटी के 12 साल बाद हुआ था। लक्की अपने परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। प्रतीक के दादा रमेश ने बताया कि तीनों बच्चे रोजाना गली में ही साइकिल चलाते थे। मंगलवार को भी वे गली में ही खेलते रहे। लक्की के पिता धमेंद्र ने बताया कि लक्की अपने भाई-बहन से बड़ा था। अभी 10वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था। प्रतीक की मां मंजू ने बताया कि प्रतीक सातवीं कक्षा का छात्र था।

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