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Karnal News: 265 वर्ष पहले युद्ध में वीरगति को प्राप्त मराठाओं की याद में मनाया शौर्य दिवस
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घरौंडा बसताड़ा गांव में आयोजित शौर्य दिन समारोह में उपस्थित समाज के लोग। स्वयं
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पानीपत की भूमि का नाम जिस युद्ध और मराठों की वीरता के कारण इतिहास में दर्ज हुआ उसी तीसरे युद्ध के 265 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय मराठा जागृति मंच और रोड मराठा एकता संघ ने बुधवार को बसताड़ा में शौर्य दिवस मनाया। इसमें हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती और पूंडरी बनी के महंत बालेश्वर आनंद महाराज पहुंचे।
विस अध्यक्ष ने कहा कि 14 जनवरी, 1761 को पानीपत के मैदान में एक भयंकर युद्ध हुआ। एक विदेशी आक्रांता अहमदशाह अब्दाली ने भारत की अस्मिता को ललकारा। वीर मराठों ने राष्ट्र की अस्मिता के लिए उसका दृढ़ता से सामना किया। युद्ध में मराठा सेना के हजारों सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए। मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा और इतिहासकार डॉ. वसंत राव ने बताया कि इतिहासकारों के अनुसार सन् 1761 का यह युद्ध 95.5 कोस की परिधि में लड़ा गया था। इसमें पानीपत, कुंजपुरा, कुरुक्षेत्र, करनाल इत्यादि प्रसिद्ध स्थानों के नाम आते हैं। इतिहासकारों के अनुसार दिल्ली की तरफ से अब्दाली की सेना और कुरुक्षेत्र की ओर से मराठा सेना आमने-सामने खड़ी थी। 14 जनवरी 1761 को इसी जगह पर मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ था। इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए मराठा वीरों को लोगों ने श्रद्धांजति अर्पित की।
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करनाल। पानीपत की भूमि का नाम जिस युद्ध और मराठों की वीरता के कारण इतिहास में दर्ज हुआ उसी तीसरे युद्ध के 265 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय मराठा जागृति मंच और रोड मराठा एकता संघ ने बुधवार को बसताड़ा में शौर्य दिवस मनाया। इसमें हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती और पूंडरी बनी के महंत बालेश्वर आनंद महाराज पहुंचे।
विस अध्यक्ष ने कहा कि 14 जनवरी, 1761 को पानीपत के मैदान में एक भयंकर युद्ध हुआ। एक विदेशी आक्रांता अहमदशाह अब्दाली ने भारत की अस्मिता को ललकारा। वीर मराठों ने राष्ट्र की अस्मिता के लिए उसका दृढ़ता से सामना किया। युद्ध में मराठा सेना के हजारों सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए। मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा और इतिहासकार डॉ. वसंत राव ने बताया कि इतिहासकारों के अनुसार सन् 1761 का यह युद्ध 95.5 कोस की परिधि में लड़ा गया था। इसमें पानीपत, कुंजपुरा, कुरुक्षेत्र, करनाल इत्यादि प्रसिद्ध स्थानों के नाम आते हैं। इतिहासकारों के अनुसार दिल्ली की तरफ से अब्दाली की सेना और कुरुक्षेत्र की ओर से मराठा सेना आमने-सामने खड़ी थी। 14 जनवरी 1761 को इसी जगह पर मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ था। इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए मराठा वीरों को लोगों ने श्रद्धांजति अर्पित की।
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