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Karnal News: चार पीढि़यों से जारी है देश सेवा
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संवाद न्यूज एजेंसी
मूनक। सालवन गांव के सेवानिवृत कैप्टन जयपाल राणा का परिवार चार पीढि़यों से सेना में रहकर देश की सेवा कर रहा है। जयपाल राणा ने बताया कि उनका बेटा प्रवीन राणा, राजपूत रेजीमेंट में 1998 में भर्ती हुआ और 35 वर्ष की आयु में 2015 हवलदार के पद से रिटायर हुआ। जबकि जयपाल राणा खुद 28 वर्ष राजपूत रेजीमेंट में सेवा करने के बाद कैप्टन के पद पर 1990 में रिटायर हुए।
जयपाल के चाचा बिशंबर भी आर्मी में भर्ती हुए और ड्राइवर के पद पर नौकरी की। अंग्रेजों के समय में वह सेना भर्ती हुए उनके कोई संतान नहीं थी। 1947 में भी वह अंग्रेजों की सेना में थे। जयपाल के पिता के चाचा अर्जुन सिंह भी राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। उनकी एक लड़की भी सेना में रही। अब उनका पोता जो फौज में जाने की तैयारी में हैं। उसने एनडीए का पेपर क्लियर किया है। जल्द इंटरव्यू देने के बाद सेना का अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा। कैप्टन जयपाल राणा ने बताया कि 1965 में अप्रैल से लड़ाई शुरू हुई थी और यह ऑपरेशन सितंबर में जोर पकड़कर दिसंबर में भारत ने जीत प्राप्त की थी। भारत के सैनिक लाहौर तक पहुंच गए थे। हालांकि इसमें काफी सैनिक शहीद हुए।
पाकिस्तान का भी काफी नुकसान हुआ। 1971 में बांग्लादेश को मुक्त करने के लिए इंदिरा गांधी ने मई-जून में शुरुआत की थी। दिसंबर में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कर दिया, उस समय जनरल अरोड़ा के सामने पाकिस्तान के सैनिकों ने हथियार डाल दिए। उन्होंने बताया कि 1962 व 65 में देश में गांव में लाइट नहीं थी।
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रेलवे स्टेशन पर भी लालटेन से काम लिया जाता था। शहरों में कहीं-कहीं लाइट थी। 1971 में गांव में भी कुछ जगह पर लाइट आ गई थी।
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मूनक। सालवन गांव के सेवानिवृत कैप्टन जयपाल राणा का परिवार चार पीढि़यों से सेना में रहकर देश की सेवा कर रहा है। जयपाल राणा ने बताया कि उनका बेटा प्रवीन राणा, राजपूत रेजीमेंट में 1998 में भर्ती हुआ और 35 वर्ष की आयु में 2015 हवलदार के पद से रिटायर हुआ। जबकि जयपाल राणा खुद 28 वर्ष राजपूत रेजीमेंट में सेवा करने के बाद कैप्टन के पद पर 1990 में रिटायर हुए।
जयपाल के चाचा बिशंबर भी आर्मी में भर्ती हुए और ड्राइवर के पद पर नौकरी की। अंग्रेजों के समय में वह सेना भर्ती हुए उनके कोई संतान नहीं थी। 1947 में भी वह अंग्रेजों की सेना में थे। जयपाल के पिता के चाचा अर्जुन सिंह भी राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। उनकी एक लड़की भी सेना में रही। अब उनका पोता जो फौज में जाने की तैयारी में हैं। उसने एनडीए का पेपर क्लियर किया है। जल्द इंटरव्यू देने के बाद सेना का अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा। कैप्टन जयपाल राणा ने बताया कि 1965 में अप्रैल से लड़ाई शुरू हुई थी और यह ऑपरेशन सितंबर में जोर पकड़कर दिसंबर में भारत ने जीत प्राप्त की थी। भारत के सैनिक लाहौर तक पहुंच गए थे। हालांकि इसमें काफी सैनिक शहीद हुए।
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पाकिस्तान का भी काफी नुकसान हुआ। 1971 में बांग्लादेश को मुक्त करने के लिए इंदिरा गांधी ने मई-जून में शुरुआत की थी। दिसंबर में बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कर दिया, उस समय जनरल अरोड़ा के सामने पाकिस्तान के सैनिकों ने हथियार डाल दिए। उन्होंने बताया कि 1962 व 65 में देश में गांव में लाइट नहीं थी।
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रेलवे स्टेशन पर भी लालटेन से काम लिया जाता था। शहरों में कहीं-कहीं लाइट थी। 1971 में गांव में भी कुछ जगह पर लाइट आ गई थी।