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अर्जुना हर्बल घी की पैकिंग पर नाम होने से एनडीआरआई को नोटिस
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दो फरवरी को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश पर गठित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की विशेष टीम ने करनाल के नगला रोड़ान गांव स्थित मिष्ठी फार्मर प्रोड्यूसर कोआपरेटिव लिमिटेड की देसी घी फैक्टरी पर छापा मारकर 8400 लीटर घी पकड़ा था। उसमें अर्जुना हर्बल घी ब्रांड के डिब्बा बंद पैकिंग पर निर्माता कंपनी ने ‘आईसीएआर-एनडीआरआई प्रौद्योगिकी’ भी अंकित कर रखा है। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
छापामारी के दौरान मौके पर 8400 लीटर डिब्बा बंद पैकिंग व खुला घी मिला था, जिसे सील किया गया है। इसकी पैकिंग की जांच की गई तो स्वास्थ्य महकमे में भी खलबली मच गई। क्योंकि इसी कंपनी के अर्जुना हर्बल घी ब्रांड की पैकिंग पर आईसीएआर-एनडीआरआई प्रौद्योगिकी’ लिखकर एक राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि यह पैकिंग भी एक्सपायर लाइसेंस व पंजीकरण नंबर की है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग तो इसकी जांच कर ही रहा है, साथ ही स्वास्थ्य महकमा भी हरकत में आ गया है। एसीएस (स्वास्थ्य) राजीव अरोड़ा ने एनडीआरआई से इस मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। यह भी जानना चाहा है कि एनडीआईआर के नाम के अलावा, घी समय सीमा समाप्त पंजीकरण के साथ कैसे बेचा जा रहा था। पंजीकरण 2019 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद घी की बिक्री लगातार हो रही थी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त ललित सिवाच ने भी एनडीआरआई करनाल व संबंधित वैज्ञानिकों से इस बारे में बात की है। क्योंकि तकनीकी कोलोब्रेशन के लिए ऐसा कोई समझौता नहीं है।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डा. एके डांग का कहना है कि इस व्यक्ति ने संस्थान से दुग्ध उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया था। उसके तहत व्यवसाय चलाने के लिए दो साल का एग्रीमेंट एमओयू साइन हुआ था। वह एग्रीमेंट 2015 में समाप्त हो गया था। एनडीआरआई ने किसी को उत्पाद की पैकिंग पर संस्थान का नाम लिखने की इजाजत नहीं दी। यह मामला संस्थान के संज्ञान में भी नहीं है। एग्रीमेंट खत्म होने के बाद से संस्थान का संबंधित व्यक्ति से कोई वास्ता नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है तो वह नियमों के विरुद्ध है और गलत है। संस्थान की ओर से हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नोटिस का स्पष्टीकरण दे दिया जाएगा।
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अर्जुना हर्बल घी सहित जो घी वहां मिला है, उसका पंजीकरण तो एक्सपायर है ही। दूसरी बड़ी बात यह भी है कि अर्जुना हर्बल पर जो लाइसेंस नंबर अंकित है, वह राज्य स्तर से लिया बताया गया है, जबकि इसमें तो केंद्र सरकार के भारतीय सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस लेना आवश्यक है। इसलिए मामले की जांच अभी चल रही है। सभी सैंपल प्रयोगशाला भेजी गई हैं, इसकी रिपोर्ट करीब 15 से 20 दिन में आएगी।
-डा.संदीप कादियान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी करनाल
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छापामारी के दौरान मौके पर 8400 लीटर डिब्बा बंद पैकिंग व खुला घी मिला था, जिसे सील किया गया है। इसकी पैकिंग की जांच की गई तो स्वास्थ्य महकमे में भी खलबली मच गई। क्योंकि इसी कंपनी के अर्जुना हर्बल घी ब्रांड की पैकिंग पर आईसीएआर-एनडीआरआई प्रौद्योगिकी’ लिखकर एक राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि यह पैकिंग भी एक्सपायर लाइसेंस व पंजीकरण नंबर की है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग तो इसकी जांच कर ही रहा है, साथ ही स्वास्थ्य महकमा भी हरकत में आ गया है। एसीएस (स्वास्थ्य) राजीव अरोड़ा ने एनडीआरआई से इस मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। यह भी जानना चाहा है कि एनडीआईआर के नाम के अलावा, घी समय सीमा समाप्त पंजीकरण के साथ कैसे बेचा जा रहा था। पंजीकरण 2019 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद घी की बिक्री लगातार हो रही थी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त ललित सिवाच ने भी एनडीआरआई करनाल व संबंधित वैज्ञानिकों से इस बारे में बात की है। क्योंकि तकनीकी कोलोब्रेशन के लिए ऐसा कोई समझौता नहीं है।
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी डा. एके डांग का कहना है कि इस व्यक्ति ने संस्थान से दुग्ध उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया था। उसके तहत व्यवसाय चलाने के लिए दो साल का एग्रीमेंट एमओयू साइन हुआ था। वह एग्रीमेंट 2015 में समाप्त हो गया था। एनडीआरआई ने किसी को उत्पाद की पैकिंग पर संस्थान का नाम लिखने की इजाजत नहीं दी। यह मामला संस्थान के संज्ञान में भी नहीं है। एग्रीमेंट खत्म होने के बाद से संस्थान का संबंधित व्यक्ति से कोई वास्ता नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है तो वह नियमों के विरुद्ध है और गलत है। संस्थान की ओर से हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नोटिस का स्पष्टीकरण दे दिया जाएगा।
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अर्जुना हर्बल घी सहित जो घी वहां मिला है, उसका पंजीकरण तो एक्सपायर है ही। दूसरी बड़ी बात यह भी है कि अर्जुना हर्बल पर जो लाइसेंस नंबर अंकित है, वह राज्य स्तर से लिया बताया गया है, जबकि इसमें तो केंद्र सरकार के भारतीय सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लाइसेंस लेना आवश्यक है। इसलिए मामले की जांच अभी चल रही है। सभी सैंपल प्रयोगशाला भेजी गई हैं, इसकी रिपोर्ट करीब 15 से 20 दिन में आएगी।
-डा.संदीप कादियान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी करनाल