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Karnal News: घर में कोई कागज आता था तो डर जाती थी मगर अब पढ़ लेती हूं
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परीक्षा देते बुजुर्ग
करनाल। रविवार को जिलेभर में आयोजित उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की परीक्षा में 3636 निरक्षर लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इनमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग शामिल थे, जिन्होंने वर्षों से अधूरी रही पढ़ाई को पूरा करने का अनुभव किया। कई बुजुर्ग अपने पोते-पोतियों और बच्चों के साथ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे।
परीक्षार्थियों ने बताया कि यह उनके लिए केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि वर्षों से छूटी पढ़ाई को पूरा करने जैसा है। एक बुजुर्ग ने कहा- पहले बच्चों से दवाइयों के नाम पूछने पड़ते थे, अब खुद पढ़ने का आत्मविश्वास आ रहा है। परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे पहले पढ़ नहीं पाए थे। यह परीक्षा जिले के 159 केंद्रों पर आयोजित की गई। कुल परीक्षार्थियों में 1239 पुरुष और 2347 महिलाएं थीं।
कई परीक्षार्थियों ने अपने पोते-पोतियों के साथ बैठकर पढ़ना शुरू किया। उन्होंने पहले क, ख, ग सीखा और फिर अपना नाम लिखना जाना। धीरे-धीरे वे शब्द पढ़ना, गिनती करना और हस्ताक्षर करना सीख गए। इस पहल से उनके जीवन में नया आत्मविश्वास आया है। नोडल अधिकारी सुमित मान ने बताया कि उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पहली बार जिला जेल के कैदियों के लिए परीक्षा आयोजित की गई। जेल में कुल 262 बंदियों ने पंजीकरण करवाया था जिसमें से 11 महिला और 155 पुरुष कैदियों ने परीक्षा दी।
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मेरी पोती सातवीं कक्षा में पढ़ती है। पहले वह मुझे अपनी किताब में लिखे अक्षर दिखाती थी और मैं उससे पूछती थी कि इसमें क्या लिखा है। करीब छह महीने पहले मैंने उससे कहा कि मुझे भी पढ़ना सिखाओ। उसने रोज शाम को 20-25 मिनट मेरे साथ बैठना शुरू किया। पहले मैंने गिनती सीखी, फिर अपना नाम लिखना और अब छोटे-छोटे शब्द पढ़ लेती हूं। अब घर में कोई कागज आता है तो उसे देखकर डर नहीं लगता।
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परीक्षार्थियों ने बताया कि यह उनके लिए केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि वर्षों से छूटी पढ़ाई को पूरा करने जैसा है। एक बुजुर्ग ने कहा- पहले बच्चों से दवाइयों के नाम पूछने पड़ते थे, अब खुद पढ़ने का आत्मविश्वास आ रहा है। परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे पहले पढ़ नहीं पाए थे। यह परीक्षा जिले के 159 केंद्रों पर आयोजित की गई। कुल परीक्षार्थियों में 1239 पुरुष और 2347 महिलाएं थीं।
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कई परीक्षार्थियों ने अपने पोते-पोतियों के साथ बैठकर पढ़ना शुरू किया। उन्होंने पहले क, ख, ग सीखा और फिर अपना नाम लिखना जाना। धीरे-धीरे वे शब्द पढ़ना, गिनती करना और हस्ताक्षर करना सीख गए। इस पहल से उनके जीवन में नया आत्मविश्वास आया है। नोडल अधिकारी सुमित मान ने बताया कि उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत पहली बार जिला जेल के कैदियों के लिए परीक्षा आयोजित की गई। जेल में कुल 262 बंदियों ने पंजीकरण करवाया था जिसमें से 11 महिला और 155 पुरुष कैदियों ने परीक्षा दी।
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मेरी पोती सातवीं कक्षा में पढ़ती है। पहले वह मुझे अपनी किताब में लिखे अक्षर दिखाती थी और मैं उससे पूछती थी कि इसमें क्या लिखा है। करीब छह महीने पहले मैंने उससे कहा कि मुझे भी पढ़ना सिखाओ। उसने रोज शाम को 20-25 मिनट मेरे साथ बैठना शुरू किया। पहले मैंने गिनती सीखी, फिर अपना नाम लिखना और अब छोटे-छोटे शब्द पढ़ लेती हूं। अब घर में कोई कागज आता है तो उसे देखकर डर नहीं लगता।