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Karnal News: अकेलेपन ने तोड़ा, काउंसिलिंग ने दिखाया जीवन का मार्ग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:11 AM IST
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Loneliness broke me; counseling showed me the path of life.
 जिला नागरिक अस्पताल की मनोचिकित्सा ओपीडी में मरीज को परामर्श देतीं डॉ. सौभाग्य। अमर उजाला
राम सारस्वत
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करनाल। जिंदगी से हार मानने की स्थिति में पहुंचे 194 लोगों को जिला नागरिक अस्पताल में काउंसिलिंग और उपचार के जरिये संभालने का प्रयास किया गया। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में आत्महत्या की प्रवृत्ति या विचार वाले 45 मरीज सामने आए थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 67 हो गई, जबकि 2026 में अब तक ऐसे 82 मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। सभी मरीजों को काउंसिलिंग और उपचार दिया गया तथा जरूरत के अनुसार कई मरीजों को भर्ती भी किया गया। मरीज के साथ उसके परिवार की भी नियमित काउंसिलिंग और फॉलोअप किया जाता है।



विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर सामने आए ये आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बदलती तस्वीर की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आत्महत्या की तरफ बढ़ रहे व्यक्ति में कई बार पहले ही व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगते हैं। जरूरत सिर्फ इन बदलावों को पहचानने और समय रहते व्यक्ति तक मदद पहुंचाने की है।
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जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार, ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023 में 13,068 मरीज मनोरोग ओपीडी में पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या 14,799 हुई और 2025 में बढ़कर 19,108 हो गई। 2026 में अब तक 15,401 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच चुके हैं। अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से 120 मरीज मनोरोग ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
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आत्मघाती विचार या प्रवृत्ति वाले मरीजों में सामान्य तौर पर 18 से 45 वर्ष की उम्र के लोग अधिक सामने आ रहे हैं। वहीं पूरी मनोरोग ओपीडी में 18 से 65 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या अधिक है। डॉक्टर के अनुसार पुरुष मरीजों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है।



अचानक अकेले रहने लगें तो समझें कुछ गड़बड़ है



मनोचिकित्सक डॉ सौभाग्य के अनुसार परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वह व्यक्ति के व्यवहार में अचानक आए बदलाव को पहचान सके। यदि कोई व्यक्ति लोगों से बातचीत करना बंद कर दे, अकेले रहने लगे या पहले पसंद आने वाले काम और हॉबी से दूरी बना ले तो इसे सामान्य बदलाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।



इसी तरह व्यक्ति का अपने काम में मन न लगाना, लोगों से मिलना-जुलना कम कर देना और लगातार नकारात्मक बातें करना भी चेतावनी का संकेत हो सकता है। जिंदगी का कुछ पता नहीं, अब कोई आशा नहीं रही या कुछ करके क्या ही कर लूंगा जैसी निराशा वाली बातें भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।



डॉक्टरों के मुताबिक कई बार व्यक्ति छोटी-सी पारिवारिक या व्यक्तिगत विवाद को भी बेहद गंभीरता से लेने लगता है और ऐसी स्थिति आत्मघाती सोच की तरफ ले जा सकती है।



अकेलापन सबसे बड़ी परेशानी, कर्ज का दबाव भी बढ़ा रहा तनाव



डॉ. सौभाग्य के अनुसार आज के समय में अकेलापन मानसिक परेशानी का एक बड़ा कारण बनकर सामने आ रहा है। व्यक्ति लोगों के बीच रहते हुए भी खुद को अकेला महसूस कर सकता है। युवाओं में भी यह स्थिति चिंता का विषय है।



इसके साथ पारिवारिक विवाद और आर्थिक परेशानियां भी मानसिक दबाव बढ़ा रही हैं। डॉक्टर ने विशेष रूप से नए लोन एप और कर्ज के दबाव से परेशान लोगों के मामले सामने आने की बात कही है। कर्ज की चिंता और उससे जुड़ा लगातार मानसिक दबाव व्यक्ति की परेशानी को और बढ़ा सकता है।



ऐसे व्यक्ति से बहस नहीं, उसके पास बैठना जरूरी



निजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. निर्णय सचदेवा के अनुसार यदि परिवार को किसी व्यक्ति में ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं तो उससे झगड़ने या उसकी बात को गलत साबित करने के बजाय उसके पास बैठकर बात करनी चाहिए। यदि वह बात करने के लिए तैयार है तो उसकी बात ध्यान से सुनना जरूरी है।




ऐसे समय में व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उपलब्ध काउंसलर या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर काउंसिलिंग और उपचार से व्यक्ति को संकट से बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।



मानसिक संकट की स्थिति में टेली मानस की 24×7 सेवा से भी मदद ली जा सकती है।



आंकड़ों में मानसिक स्वास्थ्य



- 2023: मनोरोग ओपीडी में 13,068 मरीज



- 2024: 14,799 मरीज



- 2025: 19,108 मरीज



- 2026 : अब तक 15,401 मरीज



- आत्मघाती विचार/प्रवृत्ति: 2024 में 45, 2025 में 67, 2026 में 82



- ऐसे मरीजों की प्रमुख उम्र: 18-45 वर्ष



- दैनिक औसत मनोरोग ओपीडी: 100-120 मरीज
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