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भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम : मुनि
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माई सिटी रिपोर्टरकरनाल। महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण देवस्थान श्री आत्म मनोहर आराधना जैन मंदिर पर शनिवार को विशेष कृपा दिवस कृष्ण चौदस के उपलक्ष्य में मासिक श्रद्धालु संगम आयोजित किया गया। जिसमें श्री घंटाकर्ण बीजमंत्र के सामूहिक जाप से दैवी शक्ति का आह्वान करते हुए लोकमंगल की कामना की गई। भजनों की स्वरलहरियों पर श्रद्धालु झूमे। भारत संत पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भक्ति आत्मा को परमात्मा तक पहुंचाने का माध्यम है। भक्तिपूर्ण समर्पण से असंभव को भी संभव किया जा सकता है और पराशक्तियों की दैवी कृपा से अलौकिक सफलता पाई जा सकती है।
सबसे पहले मुनि संयमेश, साध्वी जागृति, पवन जैन, नितिन, राशि जैन, निशा जैन, रीटा जैन, पुष्पा गोयल, कर्मवीर चौहान, रानी जैन, महेंद्र सिंह आदि ने सुमधुर भजनों से समां बांधा और श्री घंटाकर्ण देव का आह्वान करते हुए उनकी मंगलमय कृपा की याचना की। जिसमें भजन थे-वर्धमान चले आओ महावीर चले आओ, कुछ ऐसा करो महावीर सांसों में समा जाओ, तेरा दीया ही मैंने खाया-पीया है तेरा शुक्रिया है, कर दो बेड़ा पार दादा अलबेली सरकार, महावीर के सुमिरन को दिल से न जुदा करना हृदय भरी भक्ति से महावीर जपा करना, तारीफ तेरी निकली है मुख से आई है लब पे बनके कव्वाली करनाल वाले घंटाकर्ण दादा आया है तेरे दर पे सवाली आदि भजनों ने सभी को भक्ति में झूमने लगे। संत पीयूष
मुनि महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण महाप्रभावी, भक्तवत्सल देवता हैं जिनकी कृपा व्यक्ति को निहाल तथा मालामाल कर देती है। इनमें भक्तों के संकटों को टालकर भक्त के जीवन को निर्विघ्न मनाने की अप्रतिम क्षमता है। परालौकिक शक्तियां भक्ति से प्रसन्न होकर कंगाल को मालामाल, साधनहीन को साधनसंपन्न तथा दर-दर ठोकरें खाने वाले को भी शाही ठाठ-बाट से युक्त बना देती हैं। महासाध्वी प्रमिला महाराज के जन्म दिवस पर सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति-भावना भरे उद्गारों के साथ उन्हें बधाई दी और समाज की ओर से आदर की चादर भेंट की गई।
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सबसे पहले मुनि संयमेश, साध्वी जागृति, पवन जैन, नितिन, राशि जैन, निशा जैन, रीटा जैन, पुष्पा गोयल, कर्मवीर चौहान, रानी जैन, महेंद्र सिंह आदि ने सुमधुर भजनों से समां बांधा और श्री घंटाकर्ण देव का आह्वान करते हुए उनकी मंगलमय कृपा की याचना की। जिसमें भजन थे-वर्धमान चले आओ महावीर चले आओ, कुछ ऐसा करो महावीर सांसों में समा जाओ, तेरा दीया ही मैंने खाया-पीया है तेरा शुक्रिया है, कर दो बेड़ा पार दादा अलबेली सरकार, महावीर के सुमिरन को दिल से न जुदा करना हृदय भरी भक्ति से महावीर जपा करना, तारीफ तेरी निकली है मुख से आई है लब पे बनके कव्वाली करनाल वाले घंटाकर्ण दादा आया है तेरे दर पे सवाली आदि भजनों ने सभी को भक्ति में झूमने लगे। संत पीयूष
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मुनि महाराज ने कहा कि श्री घंटाकर्ण महाप्रभावी, भक्तवत्सल देवता हैं जिनकी कृपा व्यक्ति को निहाल तथा मालामाल कर देती है। इनमें भक्तों के संकटों को टालकर भक्त के जीवन को निर्विघ्न मनाने की अप्रतिम क्षमता है। परालौकिक शक्तियां भक्ति से प्रसन्न होकर कंगाल को मालामाल, साधनहीन को साधनसंपन्न तथा दर-दर ठोकरें खाने वाले को भी शाही ठाठ-बाट से युक्त बना देती हैं। महासाध्वी प्रमिला महाराज के जन्म दिवस पर सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति-भावना भरे उद्गारों के साथ उन्हें बधाई दी और समाज की ओर से आदर की चादर भेंट की गई।
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