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Karnal News: किसान बोले- आपदा में न हो फसली नुकसान, करें इंतजाम
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- आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने गांवों में जाकर किसानों, पशुपालकों से किया सीधा संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत शनिवार को वैज्ञानिकों की टीमें इंद्री, नीलोखेड़ी और असंध क्षेत्र में पहुंचीं। विभिन्न स्थानों पर कई गांवों के किसानों, पशुपालकों को एकत्र करके उन्हें नई तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही खेती और पशुपालन में आने वाले समस्याओं को लेकर उनसे संवाद किया गया। किसानों ने खुलकर अपनी बात वैज्ञानिकों के सामने रखी। जिसमें किसान बोले- कुछ ऐसा करें कि आपदा के दौरान फसलों में नुकसान न हो।
वैज्ञानिकों की टीमें सुबह आठ बजे रवाना हो गई। इसके बाद अभियान के राज्य नोडल अधिकारी एवं एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने टीमों के कार्यों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को विकसित कृषि संकल्प अभियान के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों, पशुपालकों की दिक्कतों को बारीकी से समझना तो है ही, किसानों तक नई वैज्ञानिक पद्धतियों, शोध व सरकार की नीतियों को पहुंचाना भी है।
एसबीआई-आरसी के प्रमुख डॉ एमएल छाबड़ा, ने किसानों को बेहतर खेती और पशुपालन के लिए विभिन्न नई तकनीकों से खुद को अपडेट करने के लिए प्रेरित किया। एनडीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अजय डांग ने किसानों को डेयरी पशुओं पर गर्मी के तनाव के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में समझाया। एसबीआई, क्षेत्रीय केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ पूजा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड और परीक्षण के लिए मिट्टी के सैंपलिंग विधियों के महत्व के बारे में बताया। डॉ संतोष, डॉ विकास, डॉ गौरव महला, डॉ सुरेंद्र तमक ने समाना, चुरनी, गंजोगढ़ी गांवों के 700 से अधिक किसानों के साथ संवाद किया। आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने किसानों से इस कार्यक्रम में भाग लेने और अपने ज्ञान, अनुभव और समस्याओं को वैज्ञानिकों के साथ साझा करने की अपील की। इससे वैज्ञानिकों को भविष्य के अनुसंधान कार्य को तैयार करने में मदद मिलेगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत शनिवार को वैज्ञानिकों की टीमें इंद्री, नीलोखेड़ी और असंध क्षेत्र में पहुंचीं। विभिन्न स्थानों पर कई गांवों के किसानों, पशुपालकों को एकत्र करके उन्हें नई तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही खेती और पशुपालन में आने वाले समस्याओं को लेकर उनसे संवाद किया गया। किसानों ने खुलकर अपनी बात वैज्ञानिकों के सामने रखी। जिसमें किसान बोले- कुछ ऐसा करें कि आपदा के दौरान फसलों में नुकसान न हो।
वैज्ञानिकों की टीमें सुबह आठ बजे रवाना हो गई। इसके बाद अभियान के राज्य नोडल अधिकारी एवं एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने टीमों के कार्यों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को विकसित कृषि संकल्प अभियान के उद्देश्य के बारे में बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों, पशुपालकों की दिक्कतों को बारीकी से समझना तो है ही, किसानों तक नई वैज्ञानिक पद्धतियों, शोध व सरकार की नीतियों को पहुंचाना भी है।
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एसबीआई-आरसी के प्रमुख डॉ एमएल छाबड़ा, ने किसानों को बेहतर खेती और पशुपालन के लिए विभिन्न नई तकनीकों से खुद को अपडेट करने के लिए प्रेरित किया। एनडीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अजय डांग ने किसानों को डेयरी पशुओं पर गर्मी के तनाव के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में समझाया। एसबीआई, क्षेत्रीय केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ पूजा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड और परीक्षण के लिए मिट्टी के सैंपलिंग विधियों के महत्व के बारे में बताया। डॉ संतोष, डॉ विकास, डॉ गौरव महला, डॉ सुरेंद्र तमक ने समाना, चुरनी, गंजोगढ़ी गांवों के 700 से अधिक किसानों के साथ संवाद किया। आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने किसानों से इस कार्यक्रम में भाग लेने और अपने ज्ञान, अनुभव और समस्याओं को वैज्ञानिकों के साथ साझा करने की अपील की। इससे वैज्ञानिकों को भविष्य के अनुसंधान कार्य को तैयार करने में मदद मिलेगी।
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