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Karnal News: लवणीय भूमि में विशेष किस्में बोकर पैदावार बढ़ा सकते हैं किसान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि लवण प्रभावित मिट्टी में पैदा होने वाली कई किस्में विकसित की है। इनसे किसान अपनी पैदावार करीब 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।
निदेशक ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने विकसित इन किस्मों को मिट्टी में अधिक लवणता वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया हैं। इसमें सरसों की किस्मों में सीएस 50, सीएस 60, सीएस 61, सीएस 62, सीएस 64 शामिल हैं, जिनकी औसत पैदावार 18 से 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। गेहूं की केआरएल 210, केआरएल 213, केआरएल 283 किस्में हैं, जिनकी औसत पैदावार 35 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हैं। मसूर की किस्मों में पीडीएल-1, पीएसएल-9 हैं, जो औसतन 9 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दे रही हैं। चना की किस्मों में करनाल चना-1 जो 12 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार दे रही है। हालांकि संस्थान का कहना है कि फसल की उपज मृदा में की लवणता तीव्रता निर्भर करती है। निदेशक ने बताया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के किसानों के सामने लंबे समय लवणीय भूमि पैदावार में बाधक थी, वहां अब इन किस्मों के कारण सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। इससे उनकी आमदनी में सुधार हो रहा है। ये किस्में संस्थान में उपलब्ध हैं, किसान बीज ले सकते हैं। सभी फसलों की किस्मों का वितरण पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा। किसान चाहे तो मोबाइल नंबर 9050778221, 0617015567 पर संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।
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करनाल। केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) के निदेशक डॉ. आरके यादव ने बताया कि लवण प्रभावित मिट्टी में पैदा होने वाली कई किस्में विकसित की है। इनसे किसान अपनी पैदावार करीब 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।
निदेशक ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने विकसित इन किस्मों को मिट्टी में अधिक लवणता वाले क्षेत्रों के लिए तैयार किया हैं। इसमें सरसों की किस्मों में सीएस 50, सीएस 60, सीएस 61, सीएस 62, सीएस 64 शामिल हैं, जिनकी औसत पैदावार 18 से 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। गेहूं की केआरएल 210, केआरएल 213, केआरएल 283 किस्में हैं, जिनकी औसत पैदावार 35 से 48 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हैं। मसूर की किस्मों में पीडीएल-1, पीएसएल-9 हैं, जो औसतन 9 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज दे रही हैं। चना की किस्मों में करनाल चना-1 जो 12 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार दे रही है। हालांकि संस्थान का कहना है कि फसल की उपज मृदा में की लवणता तीव्रता निर्भर करती है। निदेशक ने बताया कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के किसानों के सामने लंबे समय लवणीय भूमि पैदावार में बाधक थी, वहां अब इन किस्मों के कारण सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। इससे उनकी आमदनी में सुधार हो रहा है। ये किस्में संस्थान में उपलब्ध हैं, किसान बीज ले सकते हैं। सभी फसलों की किस्मों का वितरण पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा। किसान चाहे तो मोबाइल नंबर 9050778221, 0617015567 पर संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं।
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