{"_id":"68095772afdce602f30cbf5e","slug":"during-the-wedding-the-uncle-took-only-one-rupee-as-bhaat-karnal-news-c-18-knl1008-630791-2025-04-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: शादी के दौरान मामा भात में लिया महज एक रुपया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: शादी के दौरान मामा भात में लिया महज एक रुपया
विज्ञापन
- दादा के साढू कर्ण सिंह बोले- विनय दिवाली पर महज पांच दिन के लिए आया था घर
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अपनी शादी के दौरान लेफ्टिनेंट विनय कुमार और उनके पिता राजेश नरवाल ने मामा भात में महज एक रुपया ही लिया। जबकि उनके मामा उनके दिवंगत नाना की तरफ से एक लाख रुपये का शगुन दे रहे थे। दादा हवा सिंह के साढू रोहतक निवासी कर्ण सिंह ने बताया कि विनय और उसके पिता ने हाथ जोड़ दिए और कहा कि नेग के नाम पर महज एक रुपया ही लेंगे। बाकी की राशि आप नाना जी के नाम से चाहे तो दान कर दीजिए। कर्ण सिंह ने बताया कि विनय दिवाली पर भी महज पांच दिन के लिए घर आया था। परिवार की ओर से मसूरी में शादी समारोह में भी महज 50 लोग शामिल हुए थे। जबकि करनाल के रिस्पेशन कार्यक्रम में उन्होंने सभी को बुलाया था।
शादी का गांव में अलग से मनाया था जश्न
परिवार से रिश्ते में विनय के दादा बलबीर सिंह ने बताया कि इकलौते बेटे की शादी के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। 13 अप्रैल को गांव भूसली में भी ग्रामीणों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में पूरे गांव के लोगों को आमंत्रित किया था। विनय शांत स्वभाव का था। बचपन से ही वह किसी ने तो झगड़ता था और न ही फालतू बोलता था।
दादा के भाई कृष्ण ने बताया कि विनय बचपन से ही सेना में जाने की इच्छा जताता था। इसके लिए वह निरंतर दौड़ लगाता था और वर्जिश करता था। ताकि फिट रहे। विनय को अकेला रहना ही पसंद था। परिवार के सभी लोगों का गांव के लोगों से अच्छा संबंध और व्यवहार रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अपनी शादी के दौरान लेफ्टिनेंट विनय कुमार और उनके पिता राजेश नरवाल ने मामा भात में महज एक रुपया ही लिया। जबकि उनके मामा उनके दिवंगत नाना की तरफ से एक लाख रुपये का शगुन दे रहे थे। दादा हवा सिंह के साढू रोहतक निवासी कर्ण सिंह ने बताया कि विनय और उसके पिता ने हाथ जोड़ दिए और कहा कि नेग के नाम पर महज एक रुपया ही लेंगे। बाकी की राशि आप नाना जी के नाम से चाहे तो दान कर दीजिए। कर्ण सिंह ने बताया कि विनय दिवाली पर भी महज पांच दिन के लिए घर आया था। परिवार की ओर से मसूरी में शादी समारोह में भी महज 50 लोग शामिल हुए थे। जबकि करनाल के रिस्पेशन कार्यक्रम में उन्होंने सभी को बुलाया था।
शादी का गांव में अलग से मनाया था जश्न
परिवार से रिश्ते में विनय के दादा बलबीर सिंह ने बताया कि इकलौते बेटे की शादी के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। 13 अप्रैल को गांव भूसली में भी ग्रामीणों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में पूरे गांव के लोगों को आमंत्रित किया था। विनय शांत स्वभाव का था। बचपन से ही वह किसी ने तो झगड़ता था और न ही फालतू बोलता था।
विज्ञापन
दादा के भाई कृष्ण ने बताया कि विनय बचपन से ही सेना में जाने की इच्छा जताता था। इसके लिए वह निरंतर दौड़ लगाता था और वर्जिश करता था। ताकि फिट रहे। विनय को अकेला रहना ही पसंद था। परिवार के सभी लोगों का गांव के लोगों से अच्छा संबंध और व्यवहार रहा है।
विज्ञापन