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Karnal News: बाढ़ में बह गए अरमान, अब भटक रहे किसान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jul 2023 02:42 AM IST
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Desires washed away in flood, now farmers are wandering
- खेतों में नष्ट हो गई फसलें, दोबारा रोपाई के लिए दूसरे जिलों में तलाश रहे धान की पौध
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मुकेश राणा
करनाल/जलमाना। कुछ समय पूर्व हुई बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। किसानों की खेतों में लगाई फसलें, पशु बाड़े, चारा आदि बर्बाद हो गया। हालात ये हैं कि उन्हें दाेबारा फसल लगाने पर मजबूर होना पड़ा है मगर इसके लिए वह अब पनीरी कहां से लेकर आएं, यह सबसे बड़ी समस्या है। यहां तक कि किसानों को 100 किलोमीटर दूर दूसरे जिलों में धान की पनीरी के लिए भटकना पड़ रहा है।
गत दिवस कैथल जिले के दो किसान धान की पनीरी के लिए भटकते नजर आए। किसान कमल राणा और रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने गोंद-कशोर गांव में करीब 40 दिन पहले 35-40 एकड़ में धान की रोपाई की थी। फसल भी ऐसी थी कि इससे पहले ऐसा फुटाव देखने को नहीं मिला। लेकिन क्या पता था कि यह फसल बाढ़ लील लेगी।
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उनके क्षेत्र से गुजर रही घग्गर नदी ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। जब खेतों का पानी उतरा तो धान का एक भी पौधा नहीं बचा था। दोनों केिसानों की करीब 70 एकड़ फसल पूरी तरह मिट्टी में मिल गई। उन्होंने बताया कि जलमाना के ठरवा गांव के किसान भूपेंद्र सिंह विर्क उनके लिए मसीहा बने हैं। जिनके पास उन्हें 15 एकड़ की पनीरी मिली है। इसके अलावा गोंदर के किसान और इंद्री क्षेत्र में भी पौध के लिए बात चल रही है। उनके मामा किरणपाल, सुखपाल, सुखदेव फौजी व सहदेव राणा भी उनका साथ दे रहे हैं।
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पहली बार देखा इतना पानी
जब से होश संभाला है, अपने इलाके में इतना पानी नहीं देखा। सड़क पर पहली बार पांच-पांच फुट पानी भर गया। कई दिनों तक खेतों में पानी जमा होने से उनकी पूरी फसल तबाह हो गई। दोस्तों, रिश्तेदारों से धान की पनीरी के लिए संपर्क साधा जा रहा है।
- कमल राणा, किसान
पौध करवाई उपलब्ध


धान की पनीरी को लेकर दोस्त रुद्रप्रताप सिंह का फोन आया था। अपने पास लगते क्षेत्र में छानबीन की तो जलमाना के ठरवा गांव के किसान के पास उन्हें कुछ पौध मिली। मजदूरों द्वारा धान की पौध को उखाड़कर दिया गया है।
- सरदार गुरसहज सिंह
25 हजार प्रति एकड़ बढ़ा खर्च
एक एकड़ पर धान की रोपाई का खर्च करीब 20 हजार रुपये आता है। दोबारा रोपाई करने पर अतिरिक्त 20-25 हजार का खर्च और आएगा। पनीरी के लिए वह पिछले कई दिनों से दूसरे जिले में घूम रहे हैं। यहां पर मजदूर, खाने और ट्रांसपोर्ट पर भी उनका अतिरिक्त खर्च आएगा।


- रुद्रप्रताप सिंह, किसान
किसानों को दे चुके थे पौध


मेरे पास करीब 50 एकड़ की धान की पनीरी बची थी। वह कई किसानों को पौध दे चुके थे। अगर थोड़ी और देर हो जाती तो बची 15 एकड़ की पौध भी चली जाती। सही समय पर गुरसहज ने उनसे संपर्क किया।
- भूपेंद्र सिंह विर्क, विर्क सीड फार्म
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