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...ऐसा कॉलेज जहां पेड़ के नीचे लगती हैं कक्षाएं
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Fri, 05 Aug 2016 12:24 AM IST
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पेड़ के नीचे लगती हैं कक्षाएं
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सेक्टर-14 स्थित पंडित चिरंजी लाल शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय। जिले का सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज। यहां दाखिला लेने के लिए करनाल के ही नहीं, आसपास के जिलों के विद्यार्थी भी प्रयास करते हैं। पर, मेरिट लिस्ट ज्यादा ऊंची होने के कारण सबको दाखिला नहीं मिल पाता। लेकिन, जिनको दाखिला मिल जाता है, उनके अरमान पहले ही दिन से टूटने लगते हैं। कारण, हालात किसी स्कूल से भी बदतर। कॉलेज में कुल 4500 विद्यार्थी हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए जगह तक नहीं है। ज्यादातर विषयों की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे पेड़ों की छाया में लग रही हैं। इसके अलावा भी कई समस्याएं हैं। अमर उजाला टीम ने वीरवार को कॉलेज का मुआयना किया तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। पेश है रिपोर्ट :
छुट्टी जैसे माहौल में कक्षाएं
दिन मेें करीब 10:45 बजे कॉलेज में प्रवेश किया तो गेट पर ही सैकड़ों विद्यार्थी पेड़ों की छाया में शोरगुल करते नजर आए। ऐसे लगा रहा था कि मानो छुट्टी हो गई है, लेकिन असल में उन विद्यार्थियों में सबसे अधिक संख्या कक्षाओं से बंक मारने वालों की थी। इसके बाद टीम करीब 10:55 बजे कॉलेज के प्रशासनिक ब्लॉक के पास पहुंची। वहां आसपास के सभी पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगी हुई थीं और कक्षाओं के अगल-बगल ही पेड़ों की छाया में बैठे छात्र, आपसी बातचीत व मोबाइल पर गेमिंग, फेसबुक व व्हॉट्सअप पर व्यस्त थे। ऐसे में कक्षाओं में विद्यार्थी और अध्यापकों का ध्यान किताबों पर कम और आसपास से आने जाने वाले विद्यार्थियों पर अधिक था।
वाटर कूलर चार, एक भी चालू नहीं
अमर उजाला की टीम ने कॉलेज में पीने के पानी की सुविधा, शौचालय, कंप्यूटर लैब आदि का निरीक्षण किया। कॉलेज में चार जगहों पर लगे वाटर कूलरों में से एक भी चालू नहीं मिला। शौचालय में टूटे पाइप से बहता पानी कॉलेज व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा था। इसके बाद कॉलेज में प्रवेश करने वाले बच्चों से बातचीत कर उनकी दिल की संवेदनाओं को सुना तो ज्यादातर ने कॉलेज में फैली अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद टीम ने कॉलेज प्रबंधन से बातचीत की तो उन्होंने इस दुर्दशा का कारण बजट की कमी बताई।
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...कॉलेज में तो बेंच भी नसीब नहीं
विद्यार्थी, मोहन, गगन, राजू, सिमरन, स्वीटी, स्वाती और पूनम ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला लिया है। उन्हें कॉलेज में बेहतर शिक्षा के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद थीं, लेकिन बाद में पता चला कि उनके विभाग के पास तो कमरे ही नहीं है। अब खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी में कक्षाएं लगती हैं। जब स्कूलों में थे तो वहां बैठने के लिए बेंच मिल जाते थे, लेकिन कॉलेज में आने के बाद तो जमीन पर बैठना पड़ रहा है। सरकार एक तरफ तो डिजिटल शिक्षा देने का ऐलान कर रही है, वहीं विद्यार्थियों के लिए बैठने की जगह तक नहीं है।
बजट के अभाव में निर्माण कार्य लटका
पीडब्ल्यूडी विभाग ने बिना बजट प्लानिंग के ही भवन निर्माण कार्य शुरू किया था। अब बजट के अभाव में दो साल से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने भी निर्माण कार्य पूरा कराने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इस वजह से निर्माण कार्य की समय अवधि को पूरा हुए डेढ़ साल से अधिक समय बाद भी विभाग ने उसकी सुध नहीं ली है। ऐसे में पीजी ब्लॉक पर साढ़े चार करोड़ खर्च होने के बाद भी विद्यार्थियों को कोई सुविधा नहीं मिली है। विभाग ने पहले ढाई करोड़ के बजट से पीजी ब्लॉक बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब इस बजट को साढ़े चार करोड़ रुपये कर दिया गया था। बजट बढ़ने के बाद भी अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। बकौल प्रिंसिपल निर्माण कार्य चल रहा है।
बीएमसी व बीटीएम की कक्षाएं तीन-तीन और कमरे दो
कॉलेज में चल रहे प्रोफेशनल कोर्स बीटीएम और बीएमसी की कक्षाएं तीन-तीन हैं, लेकिन कमरे सिर्फ दो हैं। ऐसे मेें दोनों विभाग की दो-दो कक्षाएं पेड़ों के नीचे या बरामदे में लगती हैं। हर संकाय में हालात यही है। विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा और कमरों की कम। इस कारण फर्स्ट से लेकर थर्ड ईयर तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगाई जाती हैं। छात्र कमल, अमरीक सिंह ने बताया कि जब वे पहले दिन कॉलेज आए तो उन्होंने टाइम टेबल देखा। इसमें यूटी लिखा था। जब उन्होंने शिक्षक से जाकर पूछा तो उन्होंने बताया कि अंडर ट्री मतलब पेड़ के नीचे कक्षा। इन पेड़ों का भी नाम दिया गया है एक से लेकर सात नंबर तक।
कमरों में अंग्रेजी, हिंदी खुले आसमान के नीचे
कॉलेज की खासियत देखिये, अंग्रेजी विषय की ज्यादातर कक्षाएं कमरों के अंदर लगाई जाती हैं, लेकिन हिंदी की कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगती हैं। इसके अलावा इतिहास, पंजाबी और पॉलीटिकल जैसे विषयों की ज्यादातर कक्षाएं पेड़ों के नीचे लग रही हैं। टाइम टेबल में सभी कक्षाओं की बारी पेड़ के नीचे आती है। बाहर कक्षा लगने से विद्यार्थी बंक भी मार जाते हैं।
वर्जन
विद्यार्थियों की संख्या के मुताबिक कॉलेज में कमरों की व्यवस्था नहीं है। कॉलेज में पीजी ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है। दो माह में तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद खुले में कक्षाएं लगाने जैसी समस्याएं नहीं रहेंगी। फिलहाल मजबूरी में कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगानी पड़ रही हैं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
- डॉ. प्रवीण भारद्वाज, कार्यवाहक प्राचार्य, पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय
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छुट्टी जैसे माहौल में कक्षाएं
दिन मेें करीब 10:45 बजे कॉलेज में प्रवेश किया तो गेट पर ही सैकड़ों विद्यार्थी पेड़ों की छाया में शोरगुल करते नजर आए। ऐसे लगा रहा था कि मानो छुट्टी हो गई है, लेकिन असल में उन विद्यार्थियों में सबसे अधिक संख्या कक्षाओं से बंक मारने वालों की थी। इसके बाद टीम करीब 10:55 बजे कॉलेज के प्रशासनिक ब्लॉक के पास पहुंची। वहां आसपास के सभी पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगी हुई थीं और कक्षाओं के अगल-बगल ही पेड़ों की छाया में बैठे छात्र, आपसी बातचीत व मोबाइल पर गेमिंग, फेसबुक व व्हॉट्सअप पर व्यस्त थे। ऐसे में कक्षाओं में विद्यार्थी और अध्यापकों का ध्यान किताबों पर कम और आसपास से आने जाने वाले विद्यार्थियों पर अधिक था।
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वाटर कूलर चार, एक भी चालू नहीं
अमर उजाला की टीम ने कॉलेज में पीने के पानी की सुविधा, शौचालय, कंप्यूटर लैब आदि का निरीक्षण किया। कॉलेज में चार जगहों पर लगे वाटर कूलरों में से एक भी चालू नहीं मिला। शौचालय में टूटे पाइप से बहता पानी कॉलेज व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा था। इसके बाद कॉलेज में प्रवेश करने वाले बच्चों से बातचीत कर उनकी दिल की संवेदनाओं को सुना तो ज्यादातर ने कॉलेज में फैली अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद टीम ने कॉलेज प्रबंधन से बातचीत की तो उन्होंने इस दुर्दशा का कारण बजट की कमी बताई।
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...कॉलेज में तो बेंच भी नसीब नहीं
विद्यार्थी, मोहन, गगन, राजू, सिमरन, स्वीटी, स्वाती और पूनम ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद के साथ शहर के सबसे प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला लिया है। उन्हें कॉलेज में बेहतर शिक्षा के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद थीं, लेकिन बाद में पता चला कि उनके विभाग के पास तो कमरे ही नहीं है। अब खुले आसमान के नीचे भीषण गर्मी में कक्षाएं लगती हैं। जब स्कूलों में थे तो वहां बैठने के लिए बेंच मिल जाते थे, लेकिन कॉलेज में आने के बाद तो जमीन पर बैठना पड़ रहा है। सरकार एक तरफ तो डिजिटल शिक्षा देने का ऐलान कर रही है, वहीं विद्यार्थियों के लिए बैठने की जगह तक नहीं है।
बजट के अभाव में निर्माण कार्य लटका
पीडब्ल्यूडी विभाग ने बिना बजट प्लानिंग के ही भवन निर्माण कार्य शुरू किया था। अब बजट के अभाव में दो साल से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने भी निर्माण कार्य पूरा कराने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इस वजह से निर्माण कार्य की समय अवधि को पूरा हुए डेढ़ साल से अधिक समय बाद भी विभाग ने उसकी सुध नहीं ली है। ऐसे में पीजी ब्लॉक पर साढ़े चार करोड़ खर्च होने के बाद भी विद्यार्थियों को कोई सुविधा नहीं मिली है। विभाग ने पहले ढाई करोड़ के बजट से पीजी ब्लॉक बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन अब इस बजट को साढ़े चार करोड़ रुपये कर दिया गया था। बजट बढ़ने के बाद भी अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। बकौल प्रिंसिपल निर्माण कार्य चल रहा है।
बीएमसी व बीटीएम की कक्षाएं तीन-तीन और कमरे दो
कॉलेज में चल रहे प्रोफेशनल कोर्स बीटीएम और बीएमसी की कक्षाएं तीन-तीन हैं, लेकिन कमरे सिर्फ दो हैं। ऐसे मेें दोनों विभाग की दो-दो कक्षाएं पेड़ों के नीचे या बरामदे में लगती हैं। हर संकाय में हालात यही है। विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा और कमरों की कम। इस कारण फर्स्ट से लेकर थर्ड ईयर तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगाई जाती हैं। छात्र कमल, अमरीक सिंह ने बताया कि जब वे पहले दिन कॉलेज आए तो उन्होंने टाइम टेबल देखा। इसमें यूटी लिखा था। जब उन्होंने शिक्षक से जाकर पूछा तो उन्होंने बताया कि अंडर ट्री मतलब पेड़ के नीचे कक्षा। इन पेड़ों का भी नाम दिया गया है एक से लेकर सात नंबर तक।
कमरों में अंग्रेजी, हिंदी खुले आसमान के नीचे
कॉलेज की खासियत देखिये, अंग्रेजी विषय की ज्यादातर कक्षाएं कमरों के अंदर लगाई जाती हैं, लेकिन हिंदी की कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगती हैं। इसके अलावा इतिहास, पंजाबी और पॉलीटिकल जैसे विषयों की ज्यादातर कक्षाएं पेड़ों के नीचे लग रही हैं। टाइम टेबल में सभी कक्षाओं की बारी पेड़ के नीचे आती है। बाहर कक्षा लगने से विद्यार्थी बंक भी मार जाते हैं।
वर्जन
विद्यार्थियों की संख्या के मुताबिक कॉलेज में कमरों की व्यवस्था नहीं है। कॉलेज में पीजी ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है। दो माह में तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद खुले में कक्षाएं लगाने जैसी समस्याएं नहीं रहेंगी। फिलहाल मजबूरी में कक्षाएं पेड़ों के नीचे लगानी पड़ रही हैं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
- डॉ. प्रवीण भारद्वाज, कार्यवाहक प्राचार्य, पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय महाविद्यालय