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Karnal News: भाकियू ने धान की खरीद में गड़बड़ी का लगाया आरोप
Sun, 08 Oct 2023 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 08 Oct 2023 02:53 AM IST
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फर्जीवाड़ा बंद न होने पर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रवक्ता बहादुर मेहला बलड़ी ने धान की खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल फर्जीवाड़े का केंद्र बन गया है।
उन्होंने कहा कि करनाल की मंडियों में जो पीआर धान 14 और पीआर 126 2800 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक बिकना था, उसे केवल 2200 से 2300 रुपये में खरीदा जा रहा है। वहीं यूपी और बिहार से आने वाले धान की खरीद एमएसपी पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंडियों में उचित इंतजाम नहीं किए, जिससे किसानों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है।
पहले धान की सरकारी खरीद शुरू करने में देरी गई। जब खरीद शुरू हो गई तो अधिकारियों और व्यापारियों ने मिलीभगत कर किसानों को चूना लगाना शुरू कर दिया। व्यापारी मनोपली कर रहे हैं। कई मंडियों में सिर्फ एक या दो व्यापारी ही धान की खरीद के लिए जाते हैं। सरकार जल्द से जल्द इस फर्जीवाड़े को बंद करवाने के लिए ठोस कदम उठाए। फर्जीवाड़ा बंद नहीं हुआ तो किसान सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
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करनाल। भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रवक्ता बहादुर मेहला बलड़ी ने धान की खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल फर्जीवाड़े का केंद्र बन गया है।
उन्होंने कहा कि करनाल की मंडियों में जो पीआर धान 14 और पीआर 126 2800 रुपये से लेकर तीन हजार रुपये तक बिकना था, उसे केवल 2200 से 2300 रुपये में खरीदा जा रहा है। वहीं यूपी और बिहार से आने वाले धान की खरीद एमएसपी पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मंडियों में उचित इंतजाम नहीं किए, जिससे किसानों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है।
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पहले धान की सरकारी खरीद शुरू करने में देरी गई। जब खरीद शुरू हो गई तो अधिकारियों और व्यापारियों ने मिलीभगत कर किसानों को चूना लगाना शुरू कर दिया। व्यापारी मनोपली कर रहे हैं। कई मंडियों में सिर्फ एक या दो व्यापारी ही धान की खरीद के लिए जाते हैं। सरकार जल्द से जल्द इस फर्जीवाड़े को बंद करवाने के लिए ठोस कदम उठाए। फर्जीवाड़ा बंद नहीं हुआ तो किसान सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे।
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