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Karnal News: संसदीय क्षेत्र में दिखा मनोहर जलवा, खिला कमल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 09 Oct 2024 06:07 AM IST
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Beautiful splendor seen in the parliamentary constituency, lotus blooming
- 2019 में छह सीटें ही भाजपा के पास थीं, इस बार सभी नौ सीटों पर फहराया भगवा
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देव शर्मा
करनाल। संसदीय सीट करनाल पर सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का जलवा दिखा है। उन्होंने इन सभी नौ सीटों पर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को टिकट दिलाया था। उन्हें चुनाव जिताने की जिम्मेदारी भी संभाली थी और अब चुनाव परिणाम आया तो इन सीटों पर कमल खिल गया है। जबकि 2019 में इनमें से तीन सीटें कांग्रेस के पास थी और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने विजय हासिल की थी लेकिन अब भाजपा ने पहले से अपने पांच-छह सीटों को बरकरार रखते हुए चार अन्य सीटों पर भी भगवा फहरा दिया है। इससे भाजपा में उनका कद और मजबूत हुआ है।
करनाल संसदीय सीट में करनाल जिले की पांच और पानीपत जिले की चार विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें 2019 के चुनाव में करनाल जिले की तीन सीटों पर ही भाजपा का कब्जा था, जबकि एक सीट असंध कांग्रेस के पास थी और दूसरी नीलोखेड़ी से निर्दलीय प्रत्याशी धर्मपाल गोंदर चुनाव जीते थे। उस समय मनोहर लाल खुद करनाल सीट से विधायक थे लेकिन मौजूदा समय में वह करनाल संसदीय सीट से सांसद भी हैं। इसलिए संसदीय क्षेत्र की सभी नौ सीटों की नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी ही थी। ये जिम्मेदारी अधिक इसलिए भी बढ़ गई थी, इस बार विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में मनोहर लाल की ही चली थी।
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माना जाता है कि सभी नौ सीटों पर भाजपा ने मनोहर लाल के पसंदीदा उम्मीदवारों को ही टिकट दिया था। असंध तो ऐसी विधानसभा सीट थी, जो पिछले चुनाव में मोदी लहर में भी भाजपा नहीं जीत पाई थी, जिले की इकलौती यही सीट ऐसी थी, जो कांग्रेस ने जीती थी। इस बार यहां मनोहर लाल के करीबी माने जाने वाले जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा को चुनाव लड़ाया गया। इसके बाद पार्टी को यहां बगावत भी झेलनी पड़ी।
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पार्टी के दो पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा और सरदार बख्शीश सिंह बगावत कर गए। इनमें जिलेराम शर्मा ने तो निर्दलीय चुनाव लड़ा, जबकि बख्शीश सिंह कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए और भाजपा प्रत्याशी की जमकर मुखालफत भी की। असंध सीट पर कांग्रेस के पहले से विधायक शमशेर सिंह चुनाव मैदान में थे, जिनके समर्थन में कांग्रेस के बड़े नेता राहुल गांधी ने भी असंध आकर जनसभा की लेकिन इस बार ये सीट भाजपा ने कांग्रेस से छीनकर जोरदार झटका दे दिया। नीलोखेड़ी सीट पर भी कमोवेश यही स्थिति रही।
यहां से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर साढ़े चार साल तक हरियाणा की मनोहर लाल सरकार का समर्थन करते रहे थे लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान ही उन्होंने भाजपा सरकार से बेवफाई कर दी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया। परिणाम ये रहा कि कांग्रेस ने उन्हें टिकट देकर नीलोखेड़ी सीट से चुनाव मैदान में उतार दिया लेकिन यहां भाजपा ने अपने पुराने साथी भगवानदास कबीरपंथी को उतारा, जो चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं। शेष तीनों सीटें घरौंडा, करनाल और इंद्री पर तो पहले से ही भाजपा का कब्जा था, जो बरकरार रखा है। इंद्री की सीट भाजपा ने लगातार दूसरी बार जीती है यहां राम कुमार कश्यप दूसरी बार चुनाव जीते हैं। घरौंडा की सीट लगातार तीसरी बार जीतकर हरविंद्र कल्याण हैट्रिक बनाने में कामयाब रहे हैं।

इसी तरह पानीपत जिले की पानीपत शहर व पानीपत ग्रामीण सीट तो भाजपा के पास पहले से ही थी, यहां दोबारा जीत हासिल की है, तो इसराना (सुरक्षित) व समालखा सीट 2019 में कांग्रेस के पास थी लेकिन अब इन दोनों सीटों पर भी भाजपा ने भगवा फहरा दिया है। पानीपत शहर से प्रमोद कुमार विज और पानीपत ग्रामीण से महिपाल ढांडा चुनाव जीते हैं। इसराना से कृष्णलाल पंवार और समालखा से मनमोहन भड़ाना ने शानदार जीत दर्ज कर मनोहर लाल का जलवा कायम रखा है।
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