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प्रवासी मजूदर हुए भूख से परेशान, लगाई मदद की गुहार
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शहर में यूपी, बिहार से कार्यरत कामगारों को अब भूखे मरने की नौबत आ गई है। लॉॅकडाउन के चलते, पिछले दो-तीन दिन से अपने छोटे-छोटे कमरों में बंद भूख से हताश और परेशान होकर अब ये गलियों में निकलकर सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में जब यह प्रवासी कामगार असंध के मलिकपुर रोड, निकट कैप्टन जिम के पास इकट्ठा हुए तो आनन-फानन में प्रशासन इनके पास पहुंचा। इन प्रवासी मजदूरों को भोजन की चाहत थी, लेकिन इन्हें नायब तहसीलदार और कुछ अन्य लोगों द्वारा धमकाते, हड़काते हुए देखा गया। बता दें कि असंध में प्रशासन की ओर से कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं और न ही प्रशासन द्वारा शहर की सामाजिक संस्थाओं से कोई मदद ली जा रही है। इससे हालात खराब हो रहे हैं।
बोले-हमें हमारे घर भिजवा दो
प्रवासी मजदूर अजय, कमलदीप, दीपक, सुरज, राहुल, सरवन व अन्य रूंदे गले से मांग कर रहे थे कि कुछ खाने को दे दो साहब, कई दिनों से कुछ नहीं खाया। यदि खाने का कोई बंदोबस्त ना हो सके तो हमें हमारे घर भिजवाने की व्यवस्था करवा दो, साहब। इन लोगों ने सरकार व प्रशासन को उलाहना देते हुए कहा कि यह कोरोना बीमारी विदेश घूमने गए, अमीर लोग भारत में लेकर के आए हैं। हम गरीब तो मेहनत मजदूरी करके अपने घर परिवार का गुजारा करते हैं। हमने कई दिन से खाना नहीं खाया। हमारा क्या कसूर-हमें सजा क्यों दी जा रही है। इन प्रवासी मजदूरों ने कहा जो अमीर लोग विदेशों में इस बीमारी के चलते फंस गए थे, उन्हें जहाज के द्वारा भारत में लाया गया, हमें तो भारत में ही अपने प्रदेश में जाना है, हमारे लिए व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। वहीं, नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने बताया कि इस मामले में इनका जल्द ही राशन का इंतजाम किया जाएगा। इनको सरकार के आदेश के बाद इनके गांव में भेजा जाएगा।
प्रशासन इसे गंभीरता से ले : पूनिया
इस बारे में कांग्रेस नेता पंकज पूनिया ने बताया कि लॉॅकडाउन से पहले इन प्रवासी मजदूरों के लिए राहत पैकेज पहुंच जाने चाहिए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक इन लोगों के पास कोई राहत पैकेज नहीं पहुंच पाया है। यह प्रशासन की विफलता है। इन मजदूरों ने सरकार और प्रशासन से जीवित रहने के लिए भोजन और अपने गांव नगर में जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करवाने की मांग की है। नगर के सक्षम लोगों से भी यह आशा की जाती है कि वे इन भूखे, गरीब लोगों की सहायता के लिए आगे आएंगे।
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गुड़ मंडी में बिहार राज्य के मजदूरों के सामने भोजन का संकट
करनाल। गुड़ मंडी करनाल में भी मजदूरों का हाल बेहाल है। यहां कई मजदूर जो बिहार राज्य से आए है। यह लोग शहरभर में आइसक्रीम बिक्री, नौकरी, सब्जी बिक्री आदि अलग अलग तरह के कार्यो को करके अपनी जीविका चलाते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद काम धंधा चौपट हो गया है। यह सभी मजदूर अब अपने घर लौटना चाहते हैं, क्योंकि मजदूर व उनके परिवारों को भोजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
बिहार राज्य के दरभंगा शहर के करीब तीस से अधिक मजदूर परिवार हर साल करनाल आकर अलग अलग तरह के छोटे छोटे कारोबार करके अपनी जीविका चलाते हैं। इस बार भी यह श्रमिक एक मार्च को करनाल पहुंच गए थे। अभी उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने की तैयारी ही की थी कि होली के बाद लॉकडाउन की स्थिति शुरू हो गई। जिससे इन श्रमिकों का कारोबार भी शुरू होने से पहले ही चौपट हो गया।
-क्या करें, कारोबार तो शुरू नहीं हुआ, जो पास में धन था, सब खत्म हो गया है। अब किसी के पास खाने पीने की व्यवस्था के लिए भी पैसे नहीं है। एक स्थान पर रहे रह रहे पच्चीस परिवारों ने शुक्रवार की शाम को किसी तरह खाने का जुगाड़ किया था लेकिन शनिवार की सुबह खाने की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। जिससे सभी परिवार जिसमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल है। जिला प्रशासन से उन्होंने परिवारों के खाने के साथ साथ उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।
-अरुण यादव, श्रमिक।
-गुड़ मंडी में दरभंगा से आए श्रमिकों ने अपना ठिकाना बनाया है लेकिन रोजी रोटी छिन गई है। अब यहां रहकर आखिर क्या करेंगे। इसलिए सभी परिवार अब अपने घरों को लौटना चाहते हैं, परिवारों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है। जिससे सभी परिवारों को भूखा रहना पड़ रहा है। इस तरफ तो सामाजिक संगठन व सरकारी इंतजामों की तरह भोजन भी नहीं पहुंचाया जा रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाए।
-लालू यादव, श्रमिक।
बच्चों सहित बार्डर पर फंसे अप्रवासी मजदूर, पुलिस ने जाने से रोका
सनौली। लॉक डाउन में भी शनिवार को अप्रवासी मजदूर पानीपत छोड़ यूपी की ओर जाते नजर आए। यूपी और हरियाणा यमुना बार्डर पर तैनात दोनों राज्यों की पुलिस ने उन्हें बार्डर पार करने नहीं दिया और वे मजबूर होकर बार्डर के नजदीक ही सड़क किनारे खाली पडे़ ढाबों पर ठहर गए।
अप्रवासी मजदूर सलीम, महबूब, नसीम, सुरेश आदि ने बताया कि कई दिनों से लॉकडाउन के चलते फैक्टरियां बंद हो जाने पर मजदूरी का काम पूरी तरह से ठप्प हो गया है, जिसके कारण उनको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें दो दिनों से पैदल चलते हुए अपने बच्चों को साथ लेकर अपने गांव शहर यूपी शामली, कैराना जा रहे थे, मगर बार्डर पर पुलिस टीम तैनात होने पर उन्हें जाने नहीं दिया। अब वे सड़क किनारे पर ही भूखे प्यासे पडे़ हुए हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। छोटे-छोटे बच्चे भूखे प्यास से तड़प रहे हैं। सनौली थाना एसएचओ सुरेंद्र दहिया का कहना है कि हरियाणा और यूपी सीमा पूरी तरह से सील है। लॉकडाउन के चलते किसी को भी आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। यूपी की ओर से किसी को भी आने-जाने पर पूरी तरह से रोक लगाई हुई हैं। उन्हें चेतावनी भी दी कि वे अपने घरों में ही रहें, अगर सड़क पर घूमते मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बोले-हमें हमारे घर भिजवा दो
प्रवासी मजदूर अजय, कमलदीप, दीपक, सुरज, राहुल, सरवन व अन्य रूंदे गले से मांग कर रहे थे कि कुछ खाने को दे दो साहब, कई दिनों से कुछ नहीं खाया। यदि खाने का कोई बंदोबस्त ना हो सके तो हमें हमारे घर भिजवाने की व्यवस्था करवा दो, साहब। इन लोगों ने सरकार व प्रशासन को उलाहना देते हुए कहा कि यह कोरोना बीमारी विदेश घूमने गए, अमीर लोग भारत में लेकर के आए हैं। हम गरीब तो मेहनत मजदूरी करके अपने घर परिवार का गुजारा करते हैं। हमने कई दिन से खाना नहीं खाया। हमारा क्या कसूर-हमें सजा क्यों दी जा रही है। इन प्रवासी मजदूरों ने कहा जो अमीर लोग विदेशों में इस बीमारी के चलते फंस गए थे, उन्हें जहाज के द्वारा भारत में लाया गया, हमें तो भारत में ही अपने प्रदेश में जाना है, हमारे लिए व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही। वहीं, नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने बताया कि इस मामले में इनका जल्द ही राशन का इंतजाम किया जाएगा। इनको सरकार के आदेश के बाद इनके गांव में भेजा जाएगा।
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प्रशासन इसे गंभीरता से ले : पूनिया
इस बारे में कांग्रेस नेता पंकज पूनिया ने बताया कि लॉॅकडाउन से पहले इन प्रवासी मजदूरों के लिए राहत पैकेज पहुंच जाने चाहिए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक इन लोगों के पास कोई राहत पैकेज नहीं पहुंच पाया है। यह प्रशासन की विफलता है। इन मजदूरों ने सरकार और प्रशासन से जीवित रहने के लिए भोजन और अपने गांव नगर में जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करवाने की मांग की है। नगर के सक्षम लोगों से भी यह आशा की जाती है कि वे इन भूखे, गरीब लोगों की सहायता के लिए आगे आएंगे।
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गुड़ मंडी में बिहार राज्य के मजदूरों के सामने भोजन का संकट
करनाल। गुड़ मंडी करनाल में भी मजदूरों का हाल बेहाल है। यहां कई मजदूर जो बिहार राज्य से आए है। यह लोग शहरभर में आइसक्रीम बिक्री, नौकरी, सब्जी बिक्री आदि अलग अलग तरह के कार्यो को करके अपनी जीविका चलाते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद काम धंधा चौपट हो गया है। यह सभी मजदूर अब अपने घर लौटना चाहते हैं, क्योंकि मजदूर व उनके परिवारों को भोजन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
बिहार राज्य के दरभंगा शहर के करीब तीस से अधिक मजदूर परिवार हर साल करनाल आकर अलग अलग तरह के छोटे छोटे कारोबार करके अपनी जीविका चलाते हैं। इस बार भी यह श्रमिक एक मार्च को करनाल पहुंच गए थे। अभी उन्होंने अपना कारोबार शुरू करने की तैयारी ही की थी कि होली के बाद लॉकडाउन की स्थिति शुरू हो गई। जिससे इन श्रमिकों का कारोबार भी शुरू होने से पहले ही चौपट हो गया।
-क्या करें, कारोबार तो शुरू नहीं हुआ, जो पास में धन था, सब खत्म हो गया है। अब किसी के पास खाने पीने की व्यवस्था के लिए भी पैसे नहीं है। एक स्थान पर रहे रह रहे पच्चीस परिवारों ने शुक्रवार की शाम को किसी तरह खाने का जुगाड़ किया था लेकिन शनिवार की सुबह खाने की कोई व्यवस्था नहीं हो सकी। जिससे सभी परिवार जिसमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल है। जिला प्रशासन से उन्होंने परिवारों के खाने के साथ साथ उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है।
-अरुण यादव, श्रमिक।
-गुड़ मंडी में दरभंगा से आए श्रमिकों ने अपना ठिकाना बनाया है लेकिन रोजी रोटी छिन गई है। अब यहां रहकर आखिर क्या करेंगे। इसलिए सभी परिवार अब अपने घरों को लौटना चाहते हैं, परिवारों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है। जिससे सभी परिवारों को भूखा रहना पड़ रहा है। इस तरफ तो सामाजिक संगठन व सरकारी इंतजामों की तरह भोजन भी नहीं पहुंचाया जा रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाए।
-लालू यादव, श्रमिक।
बच्चों सहित बार्डर पर फंसे अप्रवासी मजदूर, पुलिस ने जाने से रोका
सनौली। लॉक डाउन में भी शनिवार को अप्रवासी मजदूर पानीपत छोड़ यूपी की ओर जाते नजर आए। यूपी और हरियाणा यमुना बार्डर पर तैनात दोनों राज्यों की पुलिस ने उन्हें बार्डर पार करने नहीं दिया और वे मजबूर होकर बार्डर के नजदीक ही सड़क किनारे खाली पडे़ ढाबों पर ठहर गए।
अप्रवासी मजदूर सलीम, महबूब, नसीम, सुरेश आदि ने बताया कि कई दिनों से लॉकडाउन के चलते फैक्टरियां बंद हो जाने पर मजदूरी का काम पूरी तरह से ठप्प हो गया है, जिसके कारण उनको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें दो दिनों से पैदल चलते हुए अपने बच्चों को साथ लेकर अपने गांव शहर यूपी शामली, कैराना जा रहे थे, मगर बार्डर पर पुलिस टीम तैनात होने पर उन्हें जाने नहीं दिया। अब वे सड़क किनारे पर ही भूखे प्यासे पडे़ हुए हैं। उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। छोटे-छोटे बच्चे भूखे प्यास से तड़प रहे हैं। सनौली थाना एसएचओ सुरेंद्र दहिया का कहना है कि हरियाणा और यूपी सीमा पूरी तरह से सील है। लॉकडाउन के चलते किसी को भी आने-जाने नहीं दिया जा रहा है। यूपी की ओर से किसी को भी आने-जाने पर पूरी तरह से रोक लगाई हुई हैं। उन्हें चेतावनी भी दी कि वे अपने घरों में ही रहें, अगर सड़क पर घूमते मिले तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।