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अक्षय तृतीया : अबूझ शुभ मुहूर्त में आज खूब बजेंगी शहनाइयां
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अक्षय तृतीया यानी एक अबूझ शुभ मुहूर्त। इसलिए मांगलिक व अन्य शुभ कार्यों के लिए किसी अन्य शुभ मुहूर्त का पता करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस दिन जो रिश्ते बनते हैं, वो मजबूत या जो दानपुण्य किया जाता है, उसका फल अक्षय माना जाता है। यह शुभ तिथि तीन मई है। यही कारण है कि शहर के अधिकांश बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल आदि पहले से ही बुक हैं। उम्मीद है कि मंगलवार देर रात तक खूब शहनाइयां बजेंगी।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री बताते हैं कि अक्षय तृतीया को आक्खा तीज के नाम से भी जानते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। इस साल अक्षय तृतीया 3 मई 2022 मंगलवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 03 मई सुबह 05 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 04 मई सुबह 07 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 12 बजकर 34 मिनट से 04 मई की सुबह 03 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
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अबूझ शुभ मुहूर्त में विवाह के साथ वस्त्र, आभूषण, भवन व वाहन आदि की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन धार्मिक कार्य शुभ फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान करने से सुख-संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। अक्षय तृतीया के दिन जप तप पूजा पाठ का भी विशेष महत्व है।
ये हैं पौराणिक कहानियां
श्रीराम मंदिर सेक्टर आठ के पुजारी अनिल शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया मनाने के पीछे कई पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस दिन परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। एक मान्यता यह भी है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा का जन्म हुआ। इसलिए कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन रसोई घर व अनाज की पूजा जरूर करनी चाहिए।
नर नारायण ने लिया था अवतार
अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था। इस ग्रंथ में श्री भगवत गीता भी समाहित हैं। इसलिए इस दिन श्री भगवत गीता के 18वें अध्याय का पाठ अवश्य करना चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन ही नर नारायण ने भी अवतार लिया था। इसलिए इस दिन को शुभ माना जाता है।।
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करनाल। अक्षय तृतीया यानी एक अबूझ शुभ मुहूर्त। इसलिए मांगलिक व अन्य शुभ कार्यों के लिए किसी अन्य शुभ मुहूर्त का पता करने की आवश्यकता नहीं होती है। इस दिन जो रिश्ते बनते हैं, वो मजबूत या जो दानपुण्य किया जाता है, उसका फल अक्षय माना जाता है। यह शुभ तिथि तीन मई है। यही कारण है कि शहर के अधिकांश बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल आदि पहले से ही बुक हैं। उम्मीद है कि मंगलवार देर रात तक खूब शहनाइयां बजेंगी।
- Anupam Kher (@anupampkher) 3 May 2022
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श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री बताते हैं कि अक्षय तृतीया को आक्खा तीज के नाम से भी जानते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ती है। इस साल अक्षय तृतीया 3 मई 2022 मंगलवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 03 मई सुबह 05 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 04 मई सुबह 07 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 12 बजकर 34 मिनट से 04 मई की सुबह 03 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
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- Madan Kaushik (@madankaushikbjp) 3 May 2022
अबूझ शुभ मुहूर्त में विवाह के साथ वस्त्र, आभूषण, भवन व वाहन आदि की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। साथ ही इस दिन धार्मिक कार्य शुभ फलदायी माने जाते हैं। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान करने से सुख-संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। अक्षय तृतीया के दिन जप तप पूजा पाठ का भी विशेष महत्व है।
- ISKCON,Inc (@iskconinc) 3 May 2022
ये हैं पौराणिक कहानियां
श्रीराम मंदिर सेक्टर आठ के पुजारी अनिल शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया मनाने के पीछे कई पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस दिन परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। एक मान्यता यह भी है कि इस दिन मां अन्नपूर्णा का जन्म हुआ। इसलिए कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन रसोई घर व अनाज की पूजा जरूर करनी चाहिए।
- Ashish Vidyarthi (@ashishvidyarthi) 3 May 2022
नर नारायण ने लिया था अवतार
अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था। इस ग्रंथ में श्री भगवत गीता भी समाहित हैं। इसलिए इस दिन श्री भगवत गीता के 18वें अध्याय का पाठ अवश्य करना चाहिए। अक्षय तृतीया के दिन ही नर नारायण ने भी अवतार लिया था। इसलिए इस दिन को शुभ माना जाता है।।