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एग्रीकल्चर इम्पलीमेंट उद्योग को बजट से बड़ी राहत की उम्मीदें

Mon, 29 Jan 2018 12:24 AM IST
Updated Mon, 29 Jan 2018 12:24 AM IST
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एग्रीकल्चर इम्पलीमेंट उद्योग को बजट से बड़ी राहत की उम्मीदें
एग्रीकल्चर इंपलिमेंट उद्योग को बजट से बड़ी राहत की उम्मीद
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट को लेकर एग्रीकल्चर इंपलिमेेंट उद्योगपतियों की भी निगाहें लगी हैं। जीएसटी और नोटबंदी के बाद से उद्योग में आई मंदी के बाद से उद्यमियों को उम्मीद है कि बजट उनके लिए राहत की खबर लाएगा। बातचीत के दौरान उद्योगपतियों ने कहा कि उद्योग को बढ़ावा देने को विशेष राहत दी जाए, साथ ही जीएसटी की अलग-अलग स्लैब को एक समान किया जाए। सभी उद्योगपतियों ने एक सुर में मांग की कि इनकम टैक्स की छूट सीमा बढ़ाई जाए, ताकि टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ सके और इससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

800 करोड़ रुपये का है कारोबार
दुनियाभर में कृषि उपकरणों के लिए कर्ण नगरी मशहूर है। करीब 40 देशों में यहां से कृषि उपकरण एक्सपोर्ट होते हैं। एक अनुमान है कि सालाना करीब 800 करोड़ रुपये के उपकरण विदेशों में भेजे जाते हैं। करनाल में कृषि उपकरण बनाने की करीब 75 यूनिट हैं। इन उद्योगों में कल्टीवेटर, लेवलर, ट्रॉली, टिलर, रोटावेटर आदि कृषि उपकरण बनाए जाते हैं। इसके अलावा इन उपकरण में काम आने नट-बोल्ट भी बनाए जाते हैं। करनाल से अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, थाईलैंड समेत करीब 40 देशों में उपकरणों का निर्यात होता है। उद्योगपतियों का कहना है कि करनाल से कुल कारोबार का आधे से ज्यादा विदेशों में भी पूरे भारत में सामान भेजा जाता है।
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यह उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। कारण- सरकार की कोई ठोस नीति इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अभी तक नहीं आई। न तो किसान की आमदन बढ़ रही है और न ही उपकरण खरीद पा रहा है। इस उद्योग का सीधा सा मतलब किसान से है। इसके लिए जरूरी है कि बजट कृषि पर आधारित हो, ताकि किसान और उद्योगपति और मजदूर यानि सभी को इसका लाभ मिल सके। बजट में एग्रीकल्चर इंपलिमेंट उद्योग के लिए विशेष राहत दी जाए, ताकि दोबारा से यह उद्योग ऊंचाईयों को छू सके। इसके लिए सबसे जरूरी है कि अलग अलग उपकरणों को जीएसटी की अलग-अलग स्लैब में रखा गया है, ट्रॉली पर 18 फीसदी, जबकि उसके हुक पर 28 फीसदी जीएसटी है, इससे उद्योगपतियों और किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। -प्रवीन डाबरा, उद्योगपति
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अभी तक किसी भी सरकार ने इस उद्योग पर खास ध्यान नहीं दिया। हालांकि, इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए
कलस्टर जोन तो बनाया गया है, लेकिन अभी भी इस क्षेत्र में करने के लिए बहुत कुछ है। सबसे जरूरी है कि यहां पर टेस्ट लैब स्थापित हो। बजट से उम्मीद करते हैं कि कृषि आधारित उद्योगों को राहत दी जाए, ताकि ये उद्योग फिर से जी उठे। जीएसटी को लेकर मांग करते हैं कि इसे उद्योग में एक समान किया जाए, इससे उद्योगपतियों को काफी सहूलियत मिलेगी। -अशोक राजपाल, उद्योगपति।



बजट से एग्रीकल्चर इंपलिमेंट उद्योग को काफी उम्मीदें हैं। उम्मीद करते हैं कि बजट उद्योग के लिए राहत की खबर लाएगा। दरअसल, इस उद्योग को खास पैकेज की जरूरत है, क्योंकि पिछले कई साल से इस उद्योग से जुड़ी यूनिट बढ़ने की बजाए घट रही हैं। उद्योगपतियों को सस्ती दरों पर बैंक ऋण मिले और जीएसटी में सभी लोहे के उपकरणों को एक स्लैब में लिया जाए। इस समय उद्योगपति जीएसटी को लेकर काफी परेशानियां सामने आ रही हैं। इसको दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए। -भूषण गोयल, उद्योगपति।
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