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Karnal News: टोकन मिला, फिर भी टिकट की गारंटी नहीं
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करनाल। तत्काल टिकट लेने के लिए रेलवे की नई टोकन व्यवस्था यात्रियों के लिए राहत के साथ नई उलझन भी लेकर आई है। रेलवे स्टेशन पर तत्काल टिकट के लिए पहले चरण में सीमित संख्या में टोकन दिए जा रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को सुबह निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचकर पहले टोकन हासिल करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि टोकन मिलने के बाद भी टिकट की गारंटी नहीं है, क्योंकि तत्काल कोटे में सीट या बर्थ उपलब्ध होने पर ही टिकट जारी होगी।
नई व्यवस्था का उद्देश्य तत्काल टिकट की बुकिंग के दौरान आरक्षण काउंटरों पर लगने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करना है। इसके तहत यात्री पहले निर्धारित समय में टोकन लेते हैं और बाद में तय प्रक्रिया के अनुसार तत्काल टिकट की बुकिंग कराते हैं। टोकन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरित किए जाते हैं।
शुरुआती व्यवस्था के तहत प्रत्येक आरक्षण काउंटर पर एसी तत्काल के लिए 10 और नॉन-एसी तत्काल के लिए 15 टोकन जारी किए जाने का प्रावधान है। यात्रियों की संख्या और जरूरत के अनुसार टोकन की संख्या में बदलाव भी किया जा सकता है। एसी तत्काल के लिए टोकन वितरण का समय सुबह 8:30 से 9 बजे और नॉन-एसी तत्काल के लिए 9 से 9:30 बजे तक रखा गया है।
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10 टोकन का मतलब दस टिकट पक्के नहीं
यात्रियों में सबसे बड़ी उलझन यही है कि टोकन लेने के बाद टिकट मिलेगा या नहीं। दरअसल, टोकन केवल बुकिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता देता है। यदि तत्काल कोटे की सीट या बर्थ खत्म हो जाती है तो टोकन होने के बावजूद टिकट मिलना तय नहीं है। टोकन धारकों की बुकिंग पूरी होने के बाद सीट बचने पर अन्य यात्रियों को भी पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर टिकट दिया जा सकता है। टोकन किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
पहले टिकट की लाइन, अब टोकन की लाइन
तत्काल टिकट की मांग अधिक होने के कारण आरक्षण काउंटरों पर पहले से ही भीड़ रहती है। नई व्यवस्था में यात्रियों को लगातार काउंटर पर खड़े रहने के बजाय पहले टोकन लेने की प्रक्रिया अपनाई गई है। हालांकि, सीमित टोकन होने के कारण यात्रियों को निर्धारित समय से पहले स्टेशन पहुंचने की जरूरत पड़ रही है।
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अजय माइकल के अनुसार, टोकन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरित किए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में निर्धारित संख्या में टोकन दिए जा रहे हैं और उपलब्ध सीटों के अनुसार ही टिकट जारी किए जाते हैं। तत्काल की सामान्य व्यवस्था के तहत एसी टिकट बुकिंग सुबह 10 बजे और नॉन-एसी की 11 बजे शुरू होती है।
एक पीएनआर पर चार यात्री
तत्काल टिकट व्यवस्था में एक पीएनआर पर अधिकतम चार यात्रियों की बुकिंग की जा सकती है। तत्काल बुकिंग में आधार प्रमाणीकरण और ओटीपी आधारित व्यवस्था भी लागू है। ऑनलाइन बुकिंग के साथ आरक्षण काउंटर पर भी निर्धारित मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी से प्रमाणीकरण का प्रावधान है।
यात्रियों के बोल
टोकन लेने के बाद भी टिकट की गारंटी नहीं है। पहले टिकट के लिए एक ही जगह इंतजार करना पड़ता था, अब पहले टोकन और फिर टिकट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।- अमरपाल, यात्री
तत्काल टिकट की जरूरत होने पर यात्री उम्मीद लेकर स्टेशन पहुंचता है। यहां पहले सीमित संख्या में टोकन मिल रहे हैं और उसके बाद सीट बचने का इंतजार करना पड़ता है। टिकट नहीं मिली तो पूरा समय और मेहनत बेकार चली जाती है। - रोहित, यात्री
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नई व्यवस्था का उद्देश्य तत्काल टिकट की बुकिंग के दौरान आरक्षण काउंटरों पर लगने वाली भीड़ और अव्यवस्था को नियंत्रित करना है। इसके तहत यात्री पहले निर्धारित समय में टोकन लेते हैं और बाद में तय प्रक्रिया के अनुसार तत्काल टिकट की बुकिंग कराते हैं। टोकन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरित किए जाते हैं।
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शुरुआती व्यवस्था के तहत प्रत्येक आरक्षण काउंटर पर एसी तत्काल के लिए 10 और नॉन-एसी तत्काल के लिए 15 टोकन जारी किए जाने का प्रावधान है। यात्रियों की संख्या और जरूरत के अनुसार टोकन की संख्या में बदलाव भी किया जा सकता है। एसी तत्काल के लिए टोकन वितरण का समय सुबह 8:30 से 9 बजे और नॉन-एसी तत्काल के लिए 9 से 9:30 बजे तक रखा गया है।
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10 टोकन का मतलब दस टिकट पक्के नहीं
यात्रियों में सबसे बड़ी उलझन यही है कि टोकन लेने के बाद टिकट मिलेगा या नहीं। दरअसल, टोकन केवल बुकिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता देता है। यदि तत्काल कोटे की सीट या बर्थ खत्म हो जाती है तो टोकन होने के बावजूद टिकट मिलना तय नहीं है। टोकन धारकों की बुकिंग पूरी होने के बाद सीट बचने पर अन्य यात्रियों को भी पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर टिकट दिया जा सकता है। टोकन किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
पहले टिकट की लाइन, अब टोकन की लाइन
तत्काल टिकट की मांग अधिक होने के कारण आरक्षण काउंटरों पर पहले से ही भीड़ रहती है। नई व्यवस्था में यात्रियों को लगातार काउंटर पर खड़े रहने के बजाय पहले टोकन लेने की प्रक्रिया अपनाई गई है। हालांकि, सीमित टोकन होने के कारण यात्रियों को निर्धारित समय से पहले स्टेशन पहुंचने की जरूरत पड़ रही है।
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अजय माइकल के अनुसार, टोकन पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरित किए जा रहे हैं। शुरुआती चरण में निर्धारित संख्या में टोकन दिए जा रहे हैं और उपलब्ध सीटों के अनुसार ही टिकट जारी किए जाते हैं। तत्काल की सामान्य व्यवस्था के तहत एसी टिकट बुकिंग सुबह 10 बजे और नॉन-एसी की 11 बजे शुरू होती है।
एक पीएनआर पर चार यात्री
तत्काल टिकट व्यवस्था में एक पीएनआर पर अधिकतम चार यात्रियों की बुकिंग की जा सकती है। तत्काल बुकिंग में आधार प्रमाणीकरण और ओटीपी आधारित व्यवस्था भी लागू है। ऑनलाइन बुकिंग के साथ आरक्षण काउंटर पर भी निर्धारित मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी से प्रमाणीकरण का प्रावधान है।
यात्रियों के बोल
टोकन लेने के बाद भी टिकट की गारंटी नहीं है। पहले टिकट के लिए एक ही जगह इंतजार करना पड़ता था, अब पहले टोकन और फिर टिकट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।- अमरपाल, यात्री
तत्काल टिकट की जरूरत होने पर यात्री उम्मीद लेकर स्टेशन पहुंचता है। यहां पहले सीमित संख्या में टोकन मिल रहे हैं और उसके बाद सीट बचने का इंतजार करना पड़ता है। टिकट नहीं मिली तो पूरा समय और मेहनत बेकार चली जाती है। - रोहित, यात्री