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चकबंदी पीड़ित पांच गांवों को फैसले के छह माह बाद भी नहीं मिला न्याय

Wed, 22 Nov 2017 09:06 PM IST
Updated Wed, 22 Nov 2017 09:06 PM IST
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चकबंदी पीड़ित पांच गांवों को फैसले के छह माह बाद भी नहीं मिला न्याय
फोटो संख्या-8,8आर-किसानों ने एसडीएम कार्यालय में जमकर काटा बवाल, नारेबाजीअमर उजाला ब्यूरोघरौंडा। पांच गांवों के चकबंदी पीड़ित किसानों को फैसले के छह माह बाद भी उनका हक नही मिल पाया है। इससे किसानों में प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा है। न्याय की मांग को लेकर चकबंदी पीड़ित किसानों ने एसडीएम कार्यालय में जमकर बवाल काटा और भूमाफियाओं के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों प्रदेश मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। साथ ही उन्होंने चेताया कि 10 दिसंबर तक उन्हें उनकी जमीनें नही लौटाई गई तो 11 दिसंबर को अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन करेंगे। बुधवार को गांव कालरम, अराईपुरा, भरतपुर, लालुपुरा और अमृतपुर कलां के किसान चकबंदी संयोजक प्रदीप कालरम की अगुवाई में एसडीएम कार्यालय में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। चकबंदी पीड़ित किसानों ने अपनी व्यथा एसडीएम को बताई और प्रदेश मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि प्रदेश मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला उपायुक्त के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी ने कई माह पहले ही अपनी रिपोर्ट रोहतक आयुक्त को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक,चकबंदी रिकार्ड में ओवराईटिंग, कटिंग, कई प्रकार की धांधली कर भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने की बात कही थी। इसके साथ ही जांच कमेटी ने तकसीम को रद्द करने की बात भी स्पष्ट तौर पर लिखी थी। गत 30 जून को रोहतक आयुक्त ने फैसला देकर किसानों की खरीद पूरी करने, रिकार्ड से छेड़छाड़ करने वाले अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। किसानों का आरोप है कि तहसीलदार घरौंडा ने पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस मामले में सुनवाई के लिए प्रत्येक बुधवार निश्चित किया गया है, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर किसानों को हर बार मायूसी हाथ लगती है। वहीं, दूसरी ओर स्टे के बावजूद भी भू माफिया जमीन पर कब्जा करते जा रहे हैं। इससे तनाव का स्थिति बनी रहती है। उन्होंने मांग की है कि स्टे वाली जमीन पर कब्जा रोकने, चकबंदी की तकसीम को रदद करने और जिन अधिकारियों के नाम विजिलेंस ने दिए हैं, उनके व भूमाफियाओं के साथ कार्रवाई की मांग की है। यदि 10 दिसंबर तक कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें जमीनें वापस नहीं मिली तो अपने बीवी बच्चों के साथ 11 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंच जाएंगे और प्रधानमंत्री से न्याय की गुहार लगाएंगे। वर्जन- चकबंदी पीड़ित किसानों ने जमीन को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। इसको जिला उपायुक्त के माध्यम से सीएम ऑफिस भेज दिया जाएगा और किसी भी किसान के साथ अन्याय नही होने दिया जाएगा। -मो. इमरान रजा, एसडीएम घरौंडा।
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