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Karnal News: कफ सीरप बनाने वाली 15 फैक्टरियों की होगी जांच, 28 टीमों का गठन
Wed, 08 Oct 2025 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 08 Oct 2025 01:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए केंद्र सरकार की ओर से कफ सीरप पर लगाई गई रोक के बाद जिला औषधि नियंत्रण विभाग और सख्ती करने जा रहा है। जिले में कफ सीरप बनाने वाली करीब 15 फैक्टरियों की जांच की जाएगी। इसके लिए 28 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें कफ सीरप के नमूने लेंगी। जांच में डीईजी (डाइएथिलीन ग्लाइकोल) और पीईजी (प्रोपाइलीन ग्लाइकोल) और सोर्बिटोल सॉल्वेंट की मात्रा की पड़ताल होगी। नमूने चंडीगढ़ की लैब में भेजे जाएंगे।
औषधि विभाग के अनुसार, कफ सीरप निर्माण में पीजी और सोर्बिटोल सॉल्वेंट का इस्तेमाल सामान्य रूप से किया जाता है। लेकिन कुछ फैक्टरियों में सीरप की मात्रा को बढ़ा देने से नुकसान होता है। कफ सीरप में डीईजी रासायनिक पदार्थ भी मिलाने की अनुमति है, लेकिन 0.01 प्रतिशत की तय सीमा से अधिक मात्रा में मिल जाए तो बच्चों के लीवर, किडनी और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। यही कारण है कि अब हर सीरप बनाने बनाने वाली फैक्टरी की जांच की जाएगी। हरियाणा फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएल शर्मा ने बताया कि सीरप निर्माण में सॉल्वेंट की मात्रा बेहद संवेदनशील होती है। पीजी साल्वेंट और सोर्बिटोल में डीईजी साल्वेंट की मात्रा अधिक होेने से सीरप जहरीला बन सकता है।
जिला औषधि इंस्पेक्टर विकास राठी ने बताया कि सोमवार को 20 मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण भी किया गया था। दो कफ सीरप के हांसी रोड़ और निर्मल मार्केट स्थित मेडिकल स्टोर से नमूने लिए थे। इनकी रिपोर्ट 10 से 15 दिन में आएगी। मेडिकल स्टोर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सीरप न दें।
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कुल 57 फैक्टरियों की होगी जांच
जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि करनाल की 15 फैक्टरियों समेत 10 जिलों में जांच होगी। अंबाला की 6, फरीदाबाद की 6, गुड़गांव की 2, झज्जर की 4, जींद की 1, पंचकूला की 6, पानीपत की दो, सोनीपत की 9 और यमूनानगर की 5 फैक्टरियों की जांच की जाएगी। करनाल में शिव कॉलोनी, सेक्टर-13, ऊंचाना, काछवा और रांवर रोड़ स्थित कफ सीरप की फैक्टरियों की जांच होगी।
शहद, नेबुलाइजर और आयुर्वेदिक दवा दें
जिला नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनीश प्रुथी ने बताया कि अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं है। दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्राकृतिक उपाय सबसे सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि शहद की आधा चम्मच खुराक दिन में दो बार देने से गले को नमी मिलती है और बलगम का स्राव कम होता है। शहद एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो बच्चों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता। नेबुलाइजर से फेफड़ों में जमी कफ को निकालने में मदद मिलती है। डॉक्टर की सलाह से इसका प्रयोग किया जाए। उन्होंने बताया कि तुलसी, अदरक और मुलेठी जैसे तत्वों से बनी हल्की आयुर्वेदिक दवाएं या काढ़ा गले की सूजन कम करते हैं।
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करनाल। दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए केंद्र सरकार की ओर से कफ सीरप पर लगाई गई रोक के बाद जिला औषधि नियंत्रण विभाग और सख्ती करने जा रहा है। जिले में कफ सीरप बनाने वाली करीब 15 फैक्टरियों की जांच की जाएगी। इसके लिए 28 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें कफ सीरप के नमूने लेंगी। जांच में डीईजी (डाइएथिलीन ग्लाइकोल) और पीईजी (प्रोपाइलीन ग्लाइकोल) और सोर्बिटोल सॉल्वेंट की मात्रा की पड़ताल होगी। नमूने चंडीगढ़ की लैब में भेजे जाएंगे।
औषधि विभाग के अनुसार, कफ सीरप निर्माण में पीजी और सोर्बिटोल सॉल्वेंट का इस्तेमाल सामान्य रूप से किया जाता है। लेकिन कुछ फैक्टरियों में सीरप की मात्रा को बढ़ा देने से नुकसान होता है। कफ सीरप में डीईजी रासायनिक पदार्थ भी मिलाने की अनुमति है, लेकिन 0.01 प्रतिशत की तय सीमा से अधिक मात्रा में मिल जाए तो बच्चों के लीवर, किडनी और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। यही कारण है कि अब हर सीरप बनाने बनाने वाली फैक्टरी की जांच की जाएगी। हरियाणा फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान आरएल शर्मा ने बताया कि सीरप निर्माण में सॉल्वेंट की मात्रा बेहद संवेदनशील होती है। पीजी साल्वेंट और सोर्बिटोल में डीईजी साल्वेंट की मात्रा अधिक होेने से सीरप जहरीला बन सकता है।
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जिला औषधि इंस्पेक्टर विकास राठी ने बताया कि सोमवार को 20 मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण भी किया गया था। दो कफ सीरप के हांसी रोड़ और निर्मल मार्केट स्थित मेडिकल स्टोर से नमूने लिए थे। इनकी रिपोर्ट 10 से 15 दिन में आएगी। मेडिकल स्टोर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सीरप न दें।
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कुल 57 फैक्टरियों की होगी जांच
जिला औषधि अधिकारी विकास राठी ने बताया कि करनाल की 15 फैक्टरियों समेत 10 जिलों में जांच होगी। अंबाला की 6, फरीदाबाद की 6, गुड़गांव की 2, झज्जर की 4, जींद की 1, पंचकूला की 6, पानीपत की दो, सोनीपत की 9 और यमूनानगर की 5 फैक्टरियों की जांच की जाएगी। करनाल में शिव कॉलोनी, सेक्टर-13, ऊंचाना, काछवा और रांवर रोड़ स्थित कफ सीरप की फैक्टरियों की जांच होगी।
शहद, नेबुलाइजर और आयुर्वेदिक दवा दें
जिला नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनीश प्रुथी ने बताया कि अभिभावकों को घबराने की जरूरत नहीं है। दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्राकृतिक उपाय सबसे सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि शहद की आधा चम्मच खुराक दिन में दो बार देने से गले को नमी मिलती है और बलगम का स्राव कम होता है। शहद एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है, जो बच्चों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता। नेबुलाइजर से फेफड़ों में जमी कफ को निकालने में मदद मिलती है। डॉक्टर की सलाह से इसका प्रयोग किया जाए। उन्होंने बताया कि तुलसी, अदरक और मुलेठी जैसे तत्वों से बनी हल्की आयुर्वेदिक दवाएं या काढ़ा गले की सूजन कम करते हैं।