फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   सीएम सिटी में ठंड में ठिठुर रहा बचपन

सीएम सिटी में ठंड में ठिठुर रहा बचपन

Wed, 20 Dec 2017 11:54 PM IST
Updated Wed, 20 Dec 2017 11:54 PM IST
विज्ञापन
सीएम सिटी में ठंड में ठिठुर रहा बचपन
सीएम के शहर में बच्चे जमीं पर विभाग के दावे आसमां में
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
सरकार और विभाग के दावे सच्चे नहीं है, बल्कि आसमानी नजर आ रहे हैं। बेशक सीएम सिटी के शहर में छह डिग्री के तापमान में नौनिहाल ठिठुरते हुए जमीन पर पढ़ाई कर रहें हैं। लेकिन विभाग के ‘आसमानी’ दावे हैं कि उनके पास तो अतिरिक्त बैंच हैं। अब सवाल यह उठता है कि अगर अतिरिक्त बैंच हैं तो फिर बच्चे जमीन पर टाट-पट्टी के सहारे पढ़ाई करने को क्यों मजबूर हैं।
बेशक साल 2016 में सूबे के मुखिया मनोहर लाल ने घोषणा की थी कि स्कूलों में कोई भी बच्चा जमीन नहीं बैठेगा, लेकिन उनकी घोषणा का पालन उन्हीं के हलके में नहीं हो रहा है। एक तरफ कड़ाके की ठंड की शुरुआत हो चुकी है और न्यूनतम पारा 6 डिग्री तक पहुंच रहा है, दूसरी ओर टाट पट्टी पर बैठे बच्चे सीएम की घोषणा लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सर्दी के साथ-साथ बच्चों की परेशानी भी बढ़ेगी, जो बच्चों के स्वास्थ्य के अलावा अभिभावकों पर भी भारी पड़ सकती है।
विज्ञापन

अमर उजाला की टीम ने कई स्कूलों का दौरा किया। मॉडल टाउन के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में करीब 400 बच्चे हैं, जबकि कमरे केवल 5 हैं। बैंचों की संख्या बहुत कम हैं। स्कूल में दो कमरों का निर्माण कार्य जारी होने के कारण बच्चे ठंड में बरामदे में टाट पर बैठकर ठिठुरन में पढ़ाई करते हैं। ऐसी ही स्थिति शहर के साथ लगते गांव छोटी मंगलपुर के राजकीय प्राथमिक स्कूल की है। जहां पांच कक्षाओं के लिए चार कमरे हैं, जबकि बच्चों की संख्या को देखते हुए बैंचों की काफी कमी हैं। कड़ाके की ठंड में नौनिहाल टाट पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। छात्र रवि, कमल, प्रिया ने बताया कि बैंचों पर दूसरे बच्चे बैठते हैं, वह तो गर्मी-सर्दी दोनों मौसम में जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करते हैं, जबकि अध्यापकों का रटा रटाया जवाब है कि बैंचों की मांग के लिए विभाग को पत्र भेजा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले में हैं कुल 488 प्राइमरी स्कूल
करनाल जिले में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 488 हैं। इन स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिले के असंध ब्लॉक में 63 स्कूल, घरौंडा में 70, इंद्री में 102, करनाल ब्लॉक में 105, नीलोखेड़ी में 89 और निसिंग ब्लॉक में 59 प्राथमिक पाठशाला है। इन स्कूलों में काफी स्कूल ऐसे हैं, जहां बैंचों की भारी कमी है और बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।

स्कूलों में कोई सफाई कर्मचारी नहीं
कई प्राथमिक पाठशालाओं में स्कूल की सफाई करने के लिए सफाई कर्मचारी नहीं है। जिस कारण शौचालयों और स्कूल में गंदगी फैली है। हालात यह है कि जब गंदगी ज्यादा हो जाती है तो स्कूल में कार्यरत अध्यापिका खुद के पैसों से बाहर से सफाई कर्मचारी को बुलाकर सफाई करवाती हैं। वहीं स्कूल के अन्य कार्य के लिए चपरासी भी नहीं है। स्कूल शौचालयों में गंदगी होने के कारण बच्चों में बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है।


सभी स्कूलों में बैंचों की सुविधा है। कई स्कूलों में जरूरत से भी ज्यादा बैंच है। अगर जहां नहीं है वहां के अध्यापक संबंधित बीईओ को मांग करते है तो वहां बैंच पहुंचा दिए जाएंगे। वहीं स्कूलों में बच्चों के लिए टाट भी उपलब्ध है। ताकि बच्चों को ठंड में नीचे न बैठना पड़े। अगर कहीं बैंचों की कमी है तो बैंच आने तक टाट का प्रयोग किया जा सकता है। -सरोज बाला गुर, डीईईओ, करनाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed