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कैथलः अपने ही चक्रव्यूह में फंसकर मारे गए महंत रामभज, 80 करोड़ की संपत्ति हड़पना चाहते थे
Mon, 06 Jul 2020 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला, कैथल
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jul 2020 10:57 PM IST
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श्रृंगी ऋषि आश्रम सांघन के महंत एवं षडदर्शन समाज हरियाणा के उपाध्यक्ष रामभज की हत्या का मामला गद्दी को लेकर रचा गया उन्हीं का चक्रव्यूह था, जिसमें वे खुद ही फंसकर मारे गये। डेरे की करीब 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक 98 साल के महंत राघवदास की हत्या के लिए जिन बदमाशों को महंत रामभज ने सुपारी दी थी, उन पर कई जिलों में अनेकों गंभीर अपराधों के आरोप में मामले दर्ज हैं।
महंत की हत्या के बाद ग्रामीणों और संतों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और खुलासे के लिए आंदोलन भी किये। सड़कों पर उतरकर मार्ग जाम किया, जिसमें तमाम आरोपियों के खिलाफ केस भी दर्ज किये गये, लेकिन पुलिस की जांच और महंत के साथ रहने वाले कुलबीर से हुई पूछताछ में जो तथ्य सामने आये वो चौंकाने वाले रहे। हत्या के मामले में कुलबीर और दो अन्य पर केस भी दर्ज करवाया गया था।
पूछताछ में उसने बताया कि महंत रामभज ने महंत राघवदास शास्त्री की हत्या की साजिश रची थी, लेकिन एडवांस को लेकर हुए विवाद में बदमाशों ने रामभज की ही हत्या कर दी। साजिश के तहत युवा महंत रामभज एक तीर से दो निशाना साधना चाहते थे। महंत छविदास सांघन डेरे के संभावित महंत बनने वाले थे। महंत रामभज ने मुख्य महंत राघवदास शास्त्री की हत्या की साजिश रचकर आरोप महंत छविराम दास पर मढ़ने की योजना बनाई थी।
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ये था मामला: 15 जून की रात को जूस पिलवाने के बहाने महंत रामभज की बुलाकर हत्या कर दी गई थी। महंत ने इलाज के दौरान दम तोड़ने से पहले तीन व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट कर नकदी और गाड़ी छीनने का आरोप लगाया था। पुलिस ने डेरे से जुड़े गांव सांघन निवासी अमनदीप की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित लूटपाट करने के आरोप में केस दर्ज कर लिया था। आरोपियों में कुलबीर, छविदास और मेहरा का नाम शामिल था।
लोगों से अपील, पुलिस पर अनावश्यक दबाव ना बनाएं: एसपी शशांक कुमार सावन ने आमजन को संदेश दिया कि कोई भी अप्रिय वारदात होने के उपरांत पुलिस अपराधियों को काबू करने के लिए प्रयासरत रहती है। ऐसे में अपराध के बाद अगले कुछ दिन अपराधियों के नजदीक पहुंचने में पुलिस के लिए अहम दिन होते हैं, परंतु इन्हीं शुरुआती दिनों में आमतौर पर आमजन द्वारा सड़कों पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन करने के कारण पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस कारण अपराधी पुलिस से और दूर हो जाता है।
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महंत की हत्या के बाद ग्रामीणों और संतों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और खुलासे के लिए आंदोलन भी किये। सड़कों पर उतरकर मार्ग जाम किया, जिसमें तमाम आरोपियों के खिलाफ केस भी दर्ज किये गये, लेकिन पुलिस की जांच और महंत के साथ रहने वाले कुलबीर से हुई पूछताछ में जो तथ्य सामने आये वो चौंकाने वाले रहे। हत्या के मामले में कुलबीर और दो अन्य पर केस भी दर्ज करवाया गया था।
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पूछताछ में उसने बताया कि महंत रामभज ने महंत राघवदास शास्त्री की हत्या की साजिश रची थी, लेकिन एडवांस को लेकर हुए विवाद में बदमाशों ने रामभज की ही हत्या कर दी। साजिश के तहत युवा महंत रामभज एक तीर से दो निशाना साधना चाहते थे। महंत छविदास सांघन डेरे के संभावित महंत बनने वाले थे। महंत रामभज ने मुख्य महंत राघवदास शास्त्री की हत्या की साजिश रचकर आरोप महंत छविराम दास पर मढ़ने की योजना बनाई थी।
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ये था मामला: 15 जून की रात को जूस पिलवाने के बहाने महंत रामभज की बुलाकर हत्या कर दी गई थी। महंत ने इलाज के दौरान दम तोड़ने से पहले तीन व्यक्तियों के खिलाफ मारपीट कर नकदी और गाड़ी छीनने का आरोप लगाया था। पुलिस ने डेरे से जुड़े गांव सांघन निवासी अमनदीप की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित लूटपाट करने के आरोप में केस दर्ज कर लिया था। आरोपियों में कुलबीर, छविदास और मेहरा का नाम शामिल था।
लोगों से अपील, पुलिस पर अनावश्यक दबाव ना बनाएं: एसपी शशांक कुमार सावन ने आमजन को संदेश दिया कि कोई भी अप्रिय वारदात होने के उपरांत पुलिस अपराधियों को काबू करने के लिए प्रयासरत रहती है। ऐसे में अपराध के बाद अगले कुछ दिन अपराधियों के नजदीक पहुंचने में पुलिस के लिए अहम दिन होते हैं, परंतु इन्हीं शुरुआती दिनों में आमतौर पर आमजन द्वारा सड़कों पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन करने के कारण पुलिस को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस कारण अपराधी पुलिस से और दूर हो जाता है।