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फर्जी आरसी और लाइसेंस तैयार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Sun, 07 Feb 2016 12:11 AM IST
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चोरी किए गए वाहनों की फर्जी आरसी और हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने गिरोह सदस्य को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट से तीन दिन के रिमांड पर लिया है। गिरोह सरगना ने स्वीकार किया कि उसके साथ इस जालसाजी में कई अन्य युवक भी शामिल हैं। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
पुलिस पीआरओ ने बताया कि प्यौदा निवासी वेदप्रकाश ने शिकायत दी थी कि वह एक छोटी गाड़ी लेने के लिए कसान निवासी अमित से मिला था जिसकी अपने गांव के बस अड्डे पर फोटोस्टेट लेमिनेशन की दुकान है। अमित ने उसे एक सेंट्रो गाड़ी दिखाई जो साफ दिख रही थी लेकिन गाड़ी के कागजात व मालिक के बारे में नहीं बताया और कहा कि 50 हजार रुपये लेकर तितरम मोड़ पर आ जाना। वह गाड़ी व गाड़ी के कागजात भी उसके नाम बनाकर दे देगा।
इतनी जल्दी कागजात बनवाने की बात उसे हजम नहीं हुई। उसे शक हुआ कि वह चोरी हुई या फाइनेंस की गाड़ी के जाली कागजात तैयार करके उसे धोखाधड़ी से बेचना चाहता है। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि अमित गाड़ी व कागजात सहित तितरम मोड़ पर आने वाला है। पुलिस ने अमित को काबू कर उसके पास से गाड़ी व डेशबोर्ड से वेदपाल के नाम से बनी आरसी मिली जो रजिस्ट्रर्ड अथॉरिटी गुड़गांव द्वारा 2 अप्रैल, 2008 को जारी की गई थी।
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पूछताछ में अमित ने कबूला कि वह अपने साथी रामप्रसाद निवासी सोनीपत के साथ मिलकर लोगों के जाली ड्राइविंग लाइसेंस, चोरी हुई और फाइनेंस गाड़ियों की जाली आरसी बनाकर बेचने का धंधा करता है। यह कार उसे रामप्रसाद ने बेचने के लिए दी थी। दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी तथा वारदात में प्रयोग कंप्यूटर, स्कैनर, तैयार जाली डीएल व आरसी बरामद करने के लिए आरोपी का छह फरवरी को अदालत से तीन दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।
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पुलिस पीआरओ ने बताया कि प्यौदा निवासी वेदप्रकाश ने शिकायत दी थी कि वह एक छोटी गाड़ी लेने के लिए कसान निवासी अमित से मिला था जिसकी अपने गांव के बस अड्डे पर फोटोस्टेट लेमिनेशन की दुकान है। अमित ने उसे एक सेंट्रो गाड़ी दिखाई जो साफ दिख रही थी लेकिन गाड़ी के कागजात व मालिक के बारे में नहीं बताया और कहा कि 50 हजार रुपये लेकर तितरम मोड़ पर आ जाना। वह गाड़ी व गाड़ी के कागजात भी उसके नाम बनाकर दे देगा।
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इतनी जल्दी कागजात बनवाने की बात उसे हजम नहीं हुई। उसे शक हुआ कि वह चोरी हुई या फाइनेंस की गाड़ी के जाली कागजात तैयार करके उसे धोखाधड़ी से बेचना चाहता है। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि अमित गाड़ी व कागजात सहित तितरम मोड़ पर आने वाला है। पुलिस ने अमित को काबू कर उसके पास से गाड़ी व डेशबोर्ड से वेदपाल के नाम से बनी आरसी मिली जो रजिस्ट्रर्ड अथॉरिटी गुड़गांव द्वारा 2 अप्रैल, 2008 को जारी की गई थी।
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पूछताछ में अमित ने कबूला कि वह अपने साथी रामप्रसाद निवासी सोनीपत के साथ मिलकर लोगों के जाली ड्राइविंग लाइसेंस, चोरी हुई और फाइनेंस गाड़ियों की जाली आरसी बनाकर बेचने का धंधा करता है। यह कार उसे रामप्रसाद ने बेचने के लिए दी थी। दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी तथा वारदात में प्रयोग कंप्यूटर, स्कैनर, तैयार जाली डीएल व आरसी बरामद करने के लिए आरोपी का छह फरवरी को अदालत से तीन दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है।