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एक झटके में मां बाप ने खोई इकलौता चिराग
Updated Mon, 12 Mar 2018 11:58 PM IST
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एक झटके में मां बाप ने खोया इकलौता चिराग
एक मां बाप को दिखाता था खुश रहने के सपने.. तो दूसरे ने परिवार को खुश रखने के लिए अध्यापक की नौकरी छोड़ शुरू किया था अपना काम
कमल कुमार
कैथल।
एक झटके में रविवार की रात दो परिवारों के चिराग बुझ गए। तीन में से एक ही जीवित बचे पुत्र ने गांव फतेहपुर में पारिवारिक विवाद में आत्मदाह करके मौत को गले लगा लिया तो गांव मानस में अध्यापक की नौकरी छोड़कर मोटरसाइकिल रेहड़ी का काम शुरू करने वाले इकलौते पुत्र की अज्ञात ने हत्या कर दी। दोनों ही परिवारों पर दुखों के पहाड़ टूट पड़े हैं। सोमवार सुबह दोनों गांवों से भारी संख्या में लोग जिला अस्पताल में उमड़ पड़े और परिजनों को ढांढस बंधाते दिखाई दिए।
गांव फतेहपुर में आत्मदाह करने वाला युवक राजेंद्र के पिता नंदलाल ने बताया कि उसका बेटा उसे कहता था बापू तैने पिसयां की कोई कमी नहीं रैण द्यूंगा। तेरी कोई भी जरूरत पूरी हौण तै न रैज..। बाबू तेरी सारी जरूरत पूरी करूंगा। लेकिन राजेंद्र के पिता को नहीं पता था कि जिस लड़की को वह घर की बहू बनाकर लाया वही उसके बेटे की मौत का कारण बनी। नंदलाल का बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया। नंदलाल का बड़ा बेटा इससे पूर्व एक सड़क हादसे में मारा गया था। एक बेटा बीमारी के चलते चल बसा था। उसके तीन बेटे थे। जिसमें से राजेंद्र ही बचा था। अब उसने भी मौत को गले लगा लिया।
वहीं गांव मानस निवासी मृतक सुरेंद्र ने अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अध्यापक बन अपने परिवार को खुशियां देने की सोची थी। लेकिन किसी कारणवश वह अध्यापक बन परिवार को खुशियां नहीं दे सका तो रोजगार का अपना अलग साधन बना काम करने लगा। लेकिन उसकी मौत ने उसकी परिवार वालों की उम्मीद को ही खत्म कर दिया। उसकी दो मासूम बेटियां हैं। एक बेटी सात साल की है तो दूसरी अभी डेढ़ साल की है।
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एक मां बाप को दिखाता था खुश रहने के सपने.. तो दूसरे ने परिवार को खुश रखने के लिए अध्यापक की नौकरी छोड़ शुरू किया था अपना काम
कमल कुमार
कैथल।
एक झटके में रविवार की रात दो परिवारों के चिराग बुझ गए। तीन में से एक ही जीवित बचे पुत्र ने गांव फतेहपुर में पारिवारिक विवाद में आत्मदाह करके मौत को गले लगा लिया तो गांव मानस में अध्यापक की नौकरी छोड़कर मोटरसाइकिल रेहड़ी का काम शुरू करने वाले इकलौते पुत्र की अज्ञात ने हत्या कर दी। दोनों ही परिवारों पर दुखों के पहाड़ टूट पड़े हैं। सोमवार सुबह दोनों गांवों से भारी संख्या में लोग जिला अस्पताल में उमड़ पड़े और परिजनों को ढांढस बंधाते दिखाई दिए।
गांव फतेहपुर में आत्मदाह करने वाला युवक राजेंद्र के पिता नंदलाल ने बताया कि उसका बेटा उसे कहता था बापू तैने पिसयां की कोई कमी नहीं रैण द्यूंगा। तेरी कोई भी जरूरत पूरी हौण तै न रैज..। बाबू तेरी सारी जरूरत पूरी करूंगा। लेकिन राजेंद्र के पिता को नहीं पता था कि जिस लड़की को वह घर की बहू बनाकर लाया वही उसके बेटे की मौत का कारण बनी। नंदलाल का बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया। नंदलाल का बड़ा बेटा इससे पूर्व एक सड़क हादसे में मारा गया था। एक बेटा बीमारी के चलते चल बसा था। उसके तीन बेटे थे। जिसमें से राजेंद्र ही बचा था। अब उसने भी मौत को गले लगा लिया।
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वहीं गांव मानस निवासी मृतक सुरेंद्र ने अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अध्यापक बन अपने परिवार को खुशियां देने की सोची थी। लेकिन किसी कारणवश वह अध्यापक बन परिवार को खुशियां नहीं दे सका तो रोजगार का अपना अलग साधन बना काम करने लगा। लेकिन उसकी मौत ने उसकी परिवार वालों की उम्मीद को ही खत्म कर दिया। उसकी दो मासूम बेटियां हैं। एक बेटी सात साल की है तो दूसरी अभी डेढ़ साल की है।
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