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न खरीद, न उठान, न बारदाना, न भुगतान, किसान व आढ़ती परेशान
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कैथल। नई अनाज मंडी में किसानों व आढ़तियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। एक तो खरीद सिस्टम में ही इस बार कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरा आढ़ती एसोसिएशन की फूट के कारण भी सामान्य आढ़ती शोषण के शिकार हैं। मंडी में न पूरी तरह से खरीद हो पा रही, न उठान, न बारदाना, न भुगतान। आढ़तियों व किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वेयर हाउस व एफसीआई के कर्मचारी नहीं कर रहे हैं पूरी खरीद : नई अनाज मंडी में आढ़तियों ने बताया कि वेयर हाउस व एफसीआई के कर्मचारियों द्वारा कोई सहयोग नहीं किया जा रहा। एक दुकान पर यदि 15 ढेरी हैं तो मुश्किल से 2 या 3 ढेरी लिख रहे हैं। जबकि आढ़ती से किसान उसकी गेहूं बिकवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। बीच में आढ़ती पिस रहे हैं। इसी तरह की परेशानियां दूसरी एजेंसियों के काम में भी आ रही हैं। जहां पूरी गेहूं की खरीद नहीं हो रही।
बारदाना के लिए मची है हायतौबा : दोनों ही एसोसिएशनों के आढ़तियों ने कहा कि सबसे ज्यादा किल्लत बारदाने की झेलनी पड़ रही है। एक-एक गांठ के लिए आढ़तियों को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। यदि किसी दुकान पर 4 से 5 हजार कट्टों का गेहूं आया हुआ है तो उसे दो दिन में 500 कट्टों की एक गांठ मिल रही है। ऐसे में बाकी गेहूं खुले में ढेरी के रूप में रखना पड़ रहा है। आढ़ती बिना बोरियों में भरे गेहूं को कब तक पहरा देंगे।
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उठान न के बराबर, फूट के बीच आढ़तियों से अवैध वसूली : उठान न के बराबर हो रहा है। स्थिति यह है कि नई अनाज मंडी में शनिवार शाम तक 6 लाख 56 हजार कट्टों की खरीद हो चुकी है। जिसमें से इसी अवधि तक महज 1 लाख 81 हजार कट्टों का उठान हुआ है। करीब 4 लाख से अधिक कट्टे का अंबार अनाज मंडी में लगा हुआ है। अगले दो-तीन दिनों तक यह मात्रा और भी बढ़ेगी। जबकि दो साल तक आढ़तियों की कमेटी द्वारा उठान के लिए पर्चियां दी जाती थीं, लेकिन इस बार दो एसोसिएशन होने के कारण पर्ची की व्यवस्था नहीं हो पा रही।
गोदामों में कट्टों के रूप में कट लगाने का सिलसिला जारी : आढ़ती बीरभान जैन ने कहा कि मंडी से जो गेहूं के कट्टे एजेंसियों के गोदामों में ले जाए जा रहे हैं, उसमें नमी के नाम पर 2 से लेकर 10 तक कट्टों का कट लगाया जा रहा था। आढ़ती मजबूरन यह कट स्वीकार कर रहा है। क्योंकि यदि उसे गोदाम से वह गेहूं वापस लाना पड़ गया और दूसरा गेहूं उसमें लोड करके भेजना पड़ गया तो उसे ट्रांसपोर्टेशन व मजदूरी के लिए ही अलग से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में उन्हें काफी परेशानी हो रही है। हालांकि अमर उजाला में खबर छपने के बाद रविवार को काफी हद तक कट्टों का लगाया जा रहा कट कम हुआ है। लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी बारदाने की हो रही है। वेयर हाउस, एफसीआई व हैफेड के कर्मचारी ढेरी लिख ही नहीं रहे हैं। बारदाने को लेकर कोई सुनवाई नहीं। खरीद कर भेजे गए कट्टों का कट लग रहा है। इस बार काफी परेशानी हो रही है।
इसी प्रकार से द फूड ग्रेन एसोसिएशन के प्रधान शमशेर मित्तल ने कहा कि मंडी में बारिश से पहले खरीद शुरू हुई थी। जो गेहूं खरीदा जा चुका था, उसमें भी नमी की मात्रा बढ़ गई। आढ़ती अपना कोई बढ़ी हुई मात्रा का गेहूं नहीं मांग रहे। उनकी सरकार से मांग है कि कांग्रेस सरकार की तर्ज पर 12 की बजाए 14 प्रतिशत तक नमी वाला गेहूं खरीदा जाए। इस समय आढ़तियों को ही 100 से 125 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से नुकसान हो रहा है। कट्टों को लेकर लगाया जाने वाला कट रविवार को कम रहा। उन्होंने कहा कि वेयर हाउस व हैफेड की ओर से बारदाना नहीं दिया जा रहा।
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वेयर हाउस व एफसीआई के कर्मचारी नहीं कर रहे हैं पूरी खरीद : नई अनाज मंडी में आढ़तियों ने बताया कि वेयर हाउस व एफसीआई के कर्मचारियों द्वारा कोई सहयोग नहीं किया जा रहा। एक दुकान पर यदि 15 ढेरी हैं तो मुश्किल से 2 या 3 ढेरी लिख रहे हैं। जबकि आढ़ती से किसान उसकी गेहूं बिकवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। बीच में आढ़ती पिस रहे हैं। इसी तरह की परेशानियां दूसरी एजेंसियों के काम में भी आ रही हैं। जहां पूरी गेहूं की खरीद नहीं हो रही।
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बारदाना के लिए मची है हायतौबा : दोनों ही एसोसिएशनों के आढ़तियों ने कहा कि सबसे ज्यादा किल्लत बारदाने की झेलनी पड़ रही है। एक-एक गांठ के लिए आढ़तियों को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। यदि किसी दुकान पर 4 से 5 हजार कट्टों का गेहूं आया हुआ है तो उसे दो दिन में 500 कट्टों की एक गांठ मिल रही है। ऐसे में बाकी गेहूं खुले में ढेरी के रूप में रखना पड़ रहा है। आढ़ती बिना बोरियों में भरे गेहूं को कब तक पहरा देंगे।
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उठान न के बराबर, फूट के बीच आढ़तियों से अवैध वसूली : उठान न के बराबर हो रहा है। स्थिति यह है कि नई अनाज मंडी में शनिवार शाम तक 6 लाख 56 हजार कट्टों की खरीद हो चुकी है। जिसमें से इसी अवधि तक महज 1 लाख 81 हजार कट्टों का उठान हुआ है। करीब 4 लाख से अधिक कट्टे का अंबार अनाज मंडी में लगा हुआ है। अगले दो-तीन दिनों तक यह मात्रा और भी बढ़ेगी। जबकि दो साल तक आढ़तियों की कमेटी द्वारा उठान के लिए पर्चियां दी जाती थीं, लेकिन इस बार दो एसोसिएशन होने के कारण पर्ची की व्यवस्था नहीं हो पा रही।
गोदामों में कट्टों के रूप में कट लगाने का सिलसिला जारी : आढ़ती बीरभान जैन ने कहा कि मंडी से जो गेहूं के कट्टे एजेंसियों के गोदामों में ले जाए जा रहे हैं, उसमें नमी के नाम पर 2 से लेकर 10 तक कट्टों का कट लगाया जा रहा था। आढ़ती मजबूरन यह कट स्वीकार कर रहा है। क्योंकि यदि उसे गोदाम से वह गेहूं वापस लाना पड़ गया और दूसरा गेहूं उसमें लोड करके भेजना पड़ गया तो उसे ट्रांसपोर्टेशन व मजदूरी के लिए ही अलग से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में उन्हें काफी परेशानी हो रही है। हालांकि अमर उजाला में खबर छपने के बाद रविवार को काफी हद तक कट्टों का लगाया जा रहा कट कम हुआ है। लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी बारदाने की हो रही है। वेयर हाउस, एफसीआई व हैफेड के कर्मचारी ढेरी लिख ही नहीं रहे हैं। बारदाने को लेकर कोई सुनवाई नहीं। खरीद कर भेजे गए कट्टों का कट लग रहा है। इस बार काफी परेशानी हो रही है।
इसी प्रकार से द फूड ग्रेन एसोसिएशन के प्रधान शमशेर मित्तल ने कहा कि मंडी में बारिश से पहले खरीद शुरू हुई थी। जो गेहूं खरीदा जा चुका था, उसमें भी नमी की मात्रा बढ़ गई। आढ़ती अपना कोई बढ़ी हुई मात्रा का गेहूं नहीं मांग रहे। उनकी सरकार से मांग है कि कांग्रेस सरकार की तर्ज पर 12 की बजाए 14 प्रतिशत तक नमी वाला गेहूं खरीदा जाए। इस समय आढ़तियों को ही 100 से 125 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से नुकसान हो रहा है। कट्टों को लेकर लगाया जाने वाला कट रविवार को कम रहा। उन्होंने कहा कि वेयर हाउस व हैफेड की ओर से बारदाना नहीं दिया जा रहा।