{"_id":"5bf1a35cbdec22697b1174e9","slug":"181542562652-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों की नौकरी बचाने को अध्यादेश लेकर आए हरियाणा सरकार-सतबीर गोयत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों की नौकरी बचाने को अध्यादेश लेकर आए हरियाणा सरकार-सतबीर गोयत
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर्मचारियों की नौकरी बचाने को अध्यादेश लाने की मांग
कैथल। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सरकार से विधानसभा के मानसून सत्र में दिए वचन को पूरा कर अध्यादेश लाकर माननीय हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रेस प्रवक्ता सतबीर गोयत ने कहा कि वस्तु स्थिति यह है कि हाईकोर्ट के निर्णय व सरकार के अनिर्णय के रवैये के कारण 50000 अनियमित कर्मचारियों की नौकरियों पर तलवार लटक गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र से पूर्व 30 मई, 2018 को आए हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग को लेकर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा लंबा आंदोलन किया और विधानसभा के मानसून सत्र में बिल लाने की मांग की थी। सरकार बिल लाने को तैयार हो गई थी, जिसका ड्राफ्ट भी सरकार द्वारा सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा को सुझावों के लिए भेजा गया था।
उस समय सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था कि सरकार बिल लाने से पहले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने की मांग करेंगी। अगर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज हो गई या स्टे नहीं मिला तो सरकार अध्यादेश लाकर हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय को लागू करने की समय अवधि 30 नवंबर को पूरी हो रही है। अभी तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। इसलिए सरकार को बिना किसी देरी के अध्यादेश लाने की मांग की, ताकि हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने और विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जा सके।
विज्ञापन
कैथल। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सरकार से विधानसभा के मानसून सत्र में दिए वचन को पूरा कर अध्यादेश लाकर माननीय हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रेस प्रवक्ता सतबीर गोयत ने कहा कि वस्तु स्थिति यह है कि हाईकोर्ट के निर्णय व सरकार के अनिर्णय के रवैये के कारण 50000 अनियमित कर्मचारियों की नौकरियों पर तलवार लटक गई है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र से पूर्व 30 मई, 2018 को आए हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग को लेकर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा लंबा आंदोलन किया और विधानसभा के मानसून सत्र में बिल लाने की मांग की थी। सरकार बिल लाने को तैयार हो गई थी, जिसका ड्राफ्ट भी सरकार द्वारा सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा को सुझावों के लिए भेजा गया था।
उस समय सरकार ने सदन को आश्वासन दिया था कि सरकार बिल लाने से पहले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगाने की मांग करेंगी। अगर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज हो गई या स्टे नहीं मिला तो सरकार अध्यादेश लाकर हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय को लागू करने की समय अवधि 30 नवंबर को पूरी हो रही है। अभी तक सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। इसलिए सरकार को बिना किसी देरी के अध्यादेश लाने की मांग की, ताकि हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी बचाने और विभिन्न विभागों में कार्यरत सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जा सके।
विज्ञापन