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महिलाओं ने कहा अनुच्छेद 370 हट सकता है दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा क्यों नहीं

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Thu, 05 Dec 2019 12:03 AM IST
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तेलगांना में पशु चिकित्सक की हत्या के मामले में समाज का हर वर्ग दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहा है। बुधवार को एकलव्य स्टेडियम में परिचर्चा के दौरान महिलाओं ने कहा कि अगर देशहित के लिए सरकार अनुच्छेद 370 हटा सकती है तो दुष्कर्म के दोषियों को भी फांसी की सजा देने प्रावधान होना चाहिए। तभी सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का नारा सफल होगा, वरना सरकार का यह नारा निराधार है। दुष्कर्म जैसी घटनाओं के कारण महिलाओं को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। ऐसे में कड़ी से कड़ी सजा दोषियों को देनी चाहिए।
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सरेआम दी जाए फांसी
पशु चिकित्सक के साथ हुई दुष्कर्म की घटना के बाद समाज में रोष है। दोषियों को सरेआम फांसी दी जानी चाहिए, जिससे समाज में ऐसे भेड़ियों का सफाया हो सकेगा। जिनके चलते महिलाओं का घर से बाहर निकलना ही मुश्किल हो गया है। इस तरह से बेटियों के शरीर को नोंचने वाले दरिंदों को उसी की भाषा में सजा देनी चाहिए। तभी महिलाओं को छोड़ आरोपियों में डर का माहौल होगा।
मुस्कान।
दुष्कर्म जैसी अमानवीय घटनाएं कर रहीं समाज को शर्मिंदा
दुष्कर्म जैसी घटनाएं समाज को शर्मसार कर रही है। इन घटनाओं के कारण महिलाओं को डर के साये में जीना पड़ रहा है। तेलंगाना में जो घटना घटी है इससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज नारी जाति पर लगातार घोर अत्याचार बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए कड़ी कानून व्यवस्था की जरूरत है।
तमन्ना।
फांसी की सजा देने पर ही मिलेगा इंसाफ
पशु चिकित्सक को तभी इंसाफ मिलेगा जब आरोपियों को सरेआम फांसी दी जाए। देश में जब तक इस तरह के अपराधों को वारदात देने वालों के खिलाफ कड़ी और शीघ्र सजा देने का प्रावधान नहीं होता, तब तक देश में इस तरह की घटनाओं को रोकने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। सभी दोषियों को सरेआम मौत के घाट उतारना चाहिए, ताकि देश में बेटियों की सुरक्षा को लेकर एक अच्छा संदेश जाए।
लविका।
न जाने कितनी महिलाएं होती हैं दुष्कर्म का शिकार
ना जाने कितनी महिलाएं हर रोज दुष्कर्म का शिकार होती हैं। कुछ घटनाएं सामने आती हैं तो कुछ नहीं। ऐसे में जो घटनाएं सामने नहीं आती तो आरोपियों को हौसला और बढ़ जाता है। वहीं जो मामले सामने आते हैं उनमें भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ा कानून हो और शीघ्र सुनवाई हो। महिलाएं कानून की लंबी लड़ाई होने के कारण अपने ऊपर हुए जुर्म को छुपाती हैं। इसके कारण महिला वर्ग पर होने वाले अपराध लगातार बढ़ रहे हैं।
कमलेश।
बेटियों को स्कूल व कॉलेज भेजने में भी लगता है डर
तेलंगाना में घटी घटना से आज समाज में अभिभावक अपनी बेटियों को स्कूल और कॉलेज में भेजने से भी डरने लगे हैं। इस तरह की घटनाओं के कारण अधिकतर लड़कियां शिक्षा से भी वंचित रहती हैं। हमें इस तरह की घटनाओं पर पूर्ण रूप से विराम लगाने के लिए कड़ी कानून व्यवस्था की जरूरत है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह ऐसे आरोपियों को फांसी जैसी कड़ी सजा सुनाए ताकि इन घटनाओं पर रोक लगे।
सुदेश।
घर में फिर से कैद हुईं बेटियां
दुष्कर्म जैसी घटनाओं के कारण बेटियां फिर से घर में कैद हो गई हैं। पहले की अपेक्षा अभिभावकों ने बेटियों को भी बेटों के समान शिक्षा व खेलकूद के अधिकार देकर घर से बाहर उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए भेजना शुरू किया था, लेकिन इस तरह की दरिंदगी की घटनाएं सामने आने के बाद दोबारा से बेटियां घरों में कैद होने पर मजबूर होंगी।
रितु
हजारों केस लंबित
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े कानून तो बने ही साथ में शीघ्र सजा का प्रावधान होना चाहिए। आज न्यायालयों में हजारों केस लंबित हैं। इनके कारण महिलाएं न्याय के लिए वर्षों तक तड़पती हैं। न्याय शीघ्र नहीं मिलता और अधिकतर महिलाएं कोर्ट के चक्कर में ज्यादा लंबे समय तक नहीं पड़ना चाहती। इनके कारण दुष्कर्म जैसी घटनाएं घटती हैं। ऐसा कानून बनाना चाहिए कि आरोपी को जल्द से जल्द सजा मिले और पीड़ित महिला को न्याय। तभी ऐसी घटनाओं का समाधान हो सकेगा।
गीता।
समय पर न्याय नहीं मिल पाता
दुष्कर्म की घटनाओं पर समाज में रोष फैलता है। महिलाएं हर समय डर के माहौल में अपना जीवन जीती हैं। कहने को तो महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बने हुए हैं, लेकिन महिलाओं को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। ऐसी कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिस पर समाज के लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर रोष प्रकट किया। ऐसे दरिंदों के लिए तो फांसी की सजा का प्रावधान होना चाहिए।
आशा।
महिलाओं को आजादी क्यों नहीं
ऐसी घटनाओं के चलते महिलाएं फिर से घर में कैद हो गई हैं। महिलाओं को घर से बाहर जाने पर प्रतिबंधित किया जाने लगा है। महिलाएं पहले भी प्रताड़ित होती थी और आज भी प्रताड़ित हो रही हैं। सालों साल घरेलू हिंसा व दुष्कर्म जैसे केस अदालत में चलते रहते हैं। महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है। पुरुषों को हर जगह जाने की आजादी है तो महिलाओं को क्यों नहीं।
सरोज।
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