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झमाझम बारिश से सड़कों पर जलभराव, आवागमन रहा प्रभावित, गर्मी से मिली राहत

Sun, 19 Jun 2022 12:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jun 2022 12:15 AM IST
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Waterlogging on roads due to heavy rain, traffic affected, relief from heat
रानी तालाब के पास सड़क पर भरे पानी से निकलते वाहन चालक। संवाद। - फोटो : Jind
जींद। जिले में शुक्रवार को बूंदाबांदी के बाद दूसरे दिन शनिवार की सुबह हुई मूसलाधार बारिश से लोगों को गर्मी से राहत तो मिली लेकिन सड़कों पर जलभराव होने से आवागमन प्रभावित रहा। कई सड़कों पर बने गड्ढों में भी पानी भर गया। ऐसे में गड्ढों का पता नहीं चल रहा है और दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो तीन-चार में और अच्छी बारिश होगी जिससे फसलों को लाभ होगा।
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दो दिन से मौसम में बदलाव आया है। शुक्रवार को बूंदाबांदी से तापमान गिरा था लेकिन शनिवार सुबह हुई बारिश ने तापमान में काफी गिरावट आई है। शनिवार को अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियम तथा न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नरवाना में सबसे अधिक 50 एमएम, उचाना में 35, अलेवा में 32, जींद में 25, पिल्लूखेड़ा में नौ तथा जुलाना में दो एमएम बारिश दर्ज की गई। इससे फसलों को काफी लाभ हुआ है। वहीं जरा सी बारिश के बाद शहर में टूटी सड़कों पर पानी खड़ा हो गया।
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मूसलाधार बारिश से शहर में पटियाला चौक, सब्जीमंडी रोड, रानी तालाब, अर्बन इस्टेट में एलआईसी की तरफ जाने वाले रास्ते पर जलभराव हो गया। इसके चलते आवागमन प्रभावित हुआ। खासतौर से बाइक सवारों को परेशानी हुई और पानी की छींटे पड़ने से उनके कपड़े खराब हो गए। इन सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भरने से गड्ढों का पता नहीं चला जिससे कुछ स्थानों पर बाइक सवार अनियंत्रित होकर गिर गए। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन-चार दिन तक मौसम परिवर्तनशील बना रहेगा और वर्षा की संभावना रहेगी। इस बारिश से फसलों को काफी लाभ होगा।
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बारिश से फसलों को पहुंचेगा लाभ
15 जून से धान की रोपाई का कार्य शुरू हो चुका है। ऐसे में यह बारिश धान की रोपाई के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगी। जिले में लगभग 1.40 लाख हेक्टेयर में धान की फसल की रोपाई की जाती है। ज्यादा रोपाई का कार्य जुलाई महीने में मानसून के आने पर होता है। अगर प्री मानसून की अच्छी बारिश होती है तो इससे कपास, हरे चारे की फसलों को भी लाभ होता है। जून के पहले पखवाड़े में भीषण गर्मी पड़ी, जिससे धान की नर्सरी भी सूख गई थी। किसानों को दोबारा धान की नर्सरी तैयार करनी पड़ रही है। कपास की फसल बारिश नहीं होने के कारण सूख रही थी। इस बारिश के कपास की फसल को भी काफी लाभ होगा।

शनिवार को नरवाना में सबसे अधिक 50 एमएम बारिश दर्ज की गई। सबसे कम जुलाना में दो एमएम बारिश हुई। फसलों के लिए यह बारिश लाभकारी रहेगी। कपास की फसल में सिंचाई करने की जरूरत नहीं है। धान की रोपाई का कार्य भी इस समय सबसे उचित है। तीन-चार दिन अच्छी बारिश की संभावना है।-डॉ. राजेश कुमार, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र पांडु पिंडारा।
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