{"_id":"61b6368f95337e6a79295786","slug":"the-one-year-long-protest-on-khatkar-toll-will-end-tomorrow-jind-news-rtk6325373193","type":"story","status":"publish","title_hn":"खटकड़ टोल पर एक साल से चल रहा धरना कल होगा समाप्त, राकेश टिकैत और चढ़ूनी आएंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खटकड़ टोल पर एक साल से चल रहा धरना कल होगा समाप्त, राकेश टिकैत और चढ़ूनी आएंगे
विज्ञापन
खटकड़ टोल पर चल रहे धरने पर पहुंचे विभिन्न गांवों से किसान।
- फोटो : Jind
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उचाना। कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए एक साल से अधिक समय से खटकड़ टोल पर चल रहे किसानों के धरने का 14 दिसंबर को समापन होगा। समापन कार्यक्रम में किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, विकास सींसर, युद्धबीर सहरावत, अभिमन्यु कोहाड़, रवि आजाद, संदीप चौधरी व सुदेश गोयत पहुंचेंगे।
खटकड़ टोल पर हुई टोल कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि 14 दिसंबर को दिल्ली से पंजाब की तरफ जाने वाले किसानों का फूलमालाओं से स्वागत किया जाएगा। यहां पर भंडारा भी लगाया जाएगा, जिसका खर्च टोल कमेटी वहन करेगी। कमेटी प्रधान सतबीर पहलवान ने कहा कि किसान आंदोलन जन आंदोलन बन गया। आखिरकार किसानों के संयम, अनुशासन व धैर्य की जीत हुई। जो लोग कहते थे कि कानून रद्द नहीं होते, वह अब दिखाई नहीं दे रहे हैं। हर वर्ग के लोगों ने पूरा सहयोग आंदोलन में किसी, जिसका किसान व मजदूर वर्ग हमेशा शुक्रगुजार रहेगा। प्रवक्ता सुशील नरवाल ने कहा कि देश की आजादी के बाद ऐसा बड़ा आंदोलन हुआ, जिसके आगे सरकार को झुकना पड़ा। किसान व मजदूर की एकता ने साबित किया कि समय तो लग सकता है, लेकिन एकजुटता व भाईचारा हमेशा जीतता है। इस जीत से अहंकार की हार हुई है। 700 से अधिक किसानों को हमने इस आंदोलन में खो दिया।
टाइम लग्या सी पर अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती
उचाना। दिल्ली के बॉर्डर से किसान अब अपने घर लौट रहे हैं। दूसरे दिन भी रविवार को किसानों का पंजाब की तरफ जाना जारी है। हाईवे पर उचाना की अतिरिक्त मंडी के पास किसानों पर फूलों की बारिश मशीन से कर उनका स्वागत आढ़तियों ने किया। यहां पर कई दिनों से चल रहा किसानों के लिए लंगर जारी है।
विज्ञापन
लंगर में हलवा, पूरी, खीर व देसी घी की जलेबी के अलावा रायता, लस्सी का प्रबंध किया हुआ है। किसान आंदोलन में मिली जीत के बाद यहां पर लगे डीजे पर टाइम लग्या सी अर अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती किसानी गानों पर महिलाओं, पुरुषों व युवाओं ने जमकर डांस किया। शनिवार देर रात तक भी भंडारा चला। दिल्ली से जाने वाले किसानों के लिए यहां पर रुकने की व्यवस्था भी की गई थी। मंडी में मैदान में पार्किंग वाहनों की होने के चलते हाईवे पर जाम की स्थिति नहीं बनी। आढ़ती वीरेंद्र संदलाना, दलबीर श्योकंद, रामदत्त शर्मा, रमेश मखंड व जितेंद्र श्योकंद ने कहा कि मंडी द्वारा कई दिनों से दिल्ली से पंजाब की तरफ जा रहे किसानों के लिए भंडारा लगाया हुआ है। 11 दिसंबर के दिन दिल्ली से किसानों की पंजाब वापसी पर यहां पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो अब भी जारी है। 11 दिसंबर का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है। यह दिन किसान व मजदूर के लिए विजयी दिन है।
विज्ञापन
खटकड़ टोल पर हुई टोल कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि 14 दिसंबर को दिल्ली से पंजाब की तरफ जाने वाले किसानों का फूलमालाओं से स्वागत किया जाएगा। यहां पर भंडारा भी लगाया जाएगा, जिसका खर्च टोल कमेटी वहन करेगी। कमेटी प्रधान सतबीर पहलवान ने कहा कि किसान आंदोलन जन आंदोलन बन गया। आखिरकार किसानों के संयम, अनुशासन व धैर्य की जीत हुई। जो लोग कहते थे कि कानून रद्द नहीं होते, वह अब दिखाई नहीं दे रहे हैं। हर वर्ग के लोगों ने पूरा सहयोग आंदोलन में किसी, जिसका किसान व मजदूर वर्ग हमेशा शुक्रगुजार रहेगा। प्रवक्ता सुशील नरवाल ने कहा कि देश की आजादी के बाद ऐसा बड़ा आंदोलन हुआ, जिसके आगे सरकार को झुकना पड़ा। किसान व मजदूर की एकता ने साबित किया कि समय तो लग सकता है, लेकिन एकजुटता व भाईचारा हमेशा जीतता है। इस जीत से अहंकार की हार हुई है। 700 से अधिक किसानों को हमने इस आंदोलन में खो दिया।
विज्ञापन
टाइम लग्या सी पर अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती
उचाना। दिल्ली के बॉर्डर से किसान अब अपने घर लौट रहे हैं। दूसरे दिन भी रविवार को किसानों का पंजाब की तरफ जाना जारी है। हाईवे पर उचाना की अतिरिक्त मंडी के पास किसानों पर फूलों की बारिश मशीन से कर उनका स्वागत आढ़तियों ने किया। यहां पर कई दिनों से चल रहा किसानों के लिए लंगर जारी है।
विज्ञापन
लंगर में हलवा, पूरी, खीर व देसी घी की जलेबी के अलावा रायता, लस्सी का प्रबंध किया हुआ है। किसान आंदोलन में मिली जीत के बाद यहां पर लगे डीजे पर टाइम लग्या सी अर अस्सी दिल्ली फतेह कर दीती किसानी गानों पर महिलाओं, पुरुषों व युवाओं ने जमकर डांस किया। शनिवार देर रात तक भी भंडारा चला। दिल्ली से जाने वाले किसानों के लिए यहां पर रुकने की व्यवस्था भी की गई थी। मंडी में मैदान में पार्किंग वाहनों की होने के चलते हाईवे पर जाम की स्थिति नहीं बनी। आढ़ती वीरेंद्र संदलाना, दलबीर श्योकंद, रामदत्त शर्मा, रमेश मखंड व जितेंद्र श्योकंद ने कहा कि मंडी द्वारा कई दिनों से दिल्ली से पंजाब की तरफ जा रहे किसानों के लिए भंडारा लगाया हुआ है। 11 दिसंबर के दिन दिल्ली से किसानों की पंजाब वापसी पर यहां पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो अब भी जारी है। 11 दिसंबर का दिन इतिहास में दर्ज हो गया है। यह दिन किसान व मजदूर के लिए विजयी दिन है।