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Jind News: तीन साल में बीबीपुर हैंडबाल नर्सरी से निकले 8 राष्ट्रीय खिलाड़ी
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23जेएनडी33: खेल नर्सरी के मैदान में कोच के साथ मौजूद खिलाड़ी। संवाद
जींद। कभी खेलों के क्षेत्र में किसी बड़े खिलाड़ी के नाम से पहचान नहीं रखने वाला बीबीपुर गांव अब हैंडबाल खिलाड़ियों की पौध तैयार कर रहा है। तीन साल पहले बहबलपुर गांव की बहू और हैंडबाल की सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता सीमा अहलावत ने गांव में खेल नर्सरी शुरू की थी।
बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण देकर खेलों में आगे बढ़ाने की यह पहल अब गांव की तस्वीर बदल रही है। नर्सरी से अब तक आठ खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर और 25 खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुके हैं।
नर्सरी में प्रतिदिन करीब 70 खिलाड़ी सुबह और शाम अभ्यास करते हैं। सीमा अहलावत खिलाड़ियों को हैंडबाल की तकनीक, फिटनेस और प्रतियोगिताओं की तैयारी का प्रशिक्षण देती हैं।
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उनके मार्गदर्शन में गांव की साक्षी, रितु, सलोचना, मनु, राधिका, साहनी और आयुषा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुकी हैं। इनमें सलोचना, मनु, राधिका और आयुषा ने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक भी जीते हैं। वहीं कुशुम ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
खेल नर्सरी में खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बेहतर खेल मैदान उपलब्ध है। खिलाड़ियों के लिए पेयजल समेत जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है जिससे प्रशिक्षण के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। सुबह और शाम नियमित अभ्यास होने से खिलाड़ियों में अनुशासन और खेल के प्रति निरंतरता बनी रहती है।
नर्सरी में आने वाले खिलाड़ियों में कई ऐसे हैं, जिन्होंने शुरुआत गांव स्तर से की और प्रशिक्षण के बाद जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचे। इससे गांव के अन्य बच्चों में भी खेलों के प्रति रुचि बढ़ी है।
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बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण देकर खेलों में आगे बढ़ाने की यह पहल अब गांव की तस्वीर बदल रही है। नर्सरी से अब तक आठ खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर और 25 खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुके हैं।
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नर्सरी में प्रतिदिन करीब 70 खिलाड़ी सुबह और शाम अभ्यास करते हैं। सीमा अहलावत खिलाड़ियों को हैंडबाल की तकनीक, फिटनेस और प्रतियोगिताओं की तैयारी का प्रशिक्षण देती हैं।
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उनके मार्गदर्शन में गांव की साक्षी, रितु, सलोचना, मनु, राधिका, साहनी और आयुषा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुकी हैं। इनमें सलोचना, मनु, राधिका और आयुषा ने राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक भी जीते हैं। वहीं कुशुम ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
खेल नर्सरी में खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बेहतर खेल मैदान उपलब्ध है। खिलाड़ियों के लिए पेयजल समेत जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है जिससे प्रशिक्षण के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। सुबह और शाम नियमित अभ्यास होने से खिलाड़ियों में अनुशासन और खेल के प्रति निरंतरता बनी रहती है।
नर्सरी में आने वाले खिलाड़ियों में कई ऐसे हैं, जिन्होंने शुरुआत गांव स्तर से की और प्रशिक्षण के बाद जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचे। इससे गांव के अन्य बच्चों में भी खेलों के प्रति रुचि बढ़ी है।

23जेएनडी33: खेल नर्सरी के मैदान में कोच के साथ मौजूद खिलाड़ी। संवाद