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Jind News: जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 8 माह से एक्स-रे फिल्म नहीं
Wed, 07 Jan 2026 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:10 AM IST
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06जेएनडी24: मोबाइल से एक्सरे की फोटो लेते रेडियोलॉजिस्ट । संवाद
जुलाना। कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करीब आठ महीने से एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक्स-रे जांच का काम मोबाइल फोन के सहारे चलाया जा रहा है।
सीएचसी में प्रतिदिन दर्जनों मरीज हड्डी टूटने, दुर्घटना, सीने की बीमारी और अन्य गंभीर समस्याओं के चलते एक्स-रे जांच के लिए पहुंचते हैं लेकिन फिल्म न होने के कारण एक्स-रे मशीन से ली गई इमेज को मोबाइल फोन पर देखकर ही डॉक्टरों को रिपोर्ट तैयार करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी निजी संस्थानों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि निजी एक्स-रे जांच का खर्च वहन करना उनके लिए आसान नहीं होता। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। एक्स-रे फिल्म की मांग कई बार उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
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मोबाइल पर इमेज देखकर रिपोर्ट करना केवल अस्थायी व्यवस्था है, जो लंबे समय तक सुरक्षित और भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। इससे गलत निदान की आशंका भी बनी रहती है।
वर्जनफिल्म की कमी की जानकारी विभाग को दी जा चुकी है। अस्पताल में एक्सरे भेजना का कोई भी ऑनलाइन सिस्टम नही है। मरीजों के एक्सरे को चिकित्सकों के मोबाइल पर भेज दिया जाता है। जिसे देखकर चिकित्सक इलाज करते हैं।
-- - सुभाष, रेडियोलॉजी अफसर जुलाना।
वर्जन
सीएचसी में फिल्म नही है। इस बारे में एसएमओ से बात करेंगे। आयुष्मान भारत के तहत बजट है तो एसएमओ को फिल्म खरीदनी चाहिए।
-- - डॉ सुमन कोहली, सीएमओ जींद।
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सीएचसी में प्रतिदिन दर्जनों मरीज हड्डी टूटने, दुर्घटना, सीने की बीमारी और अन्य गंभीर समस्याओं के चलते एक्स-रे जांच के लिए पहुंचते हैं लेकिन फिल्म न होने के कारण एक्स-रे मशीन से ली गई इमेज को मोबाइल फोन पर देखकर ही डॉक्टरों को रिपोर्ट तैयार करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी निजी संस्थानों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि निजी एक्स-रे जांच का खर्च वहन करना उनके लिए आसान नहीं होता। कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। एक्स-रे फिल्म की मांग कई बार उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
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मोबाइल पर इमेज देखकर रिपोर्ट करना केवल अस्थायी व्यवस्था है, जो लंबे समय तक सुरक्षित और भरोसेमंद नहीं मानी जा सकती। इससे गलत निदान की आशंका भी बनी रहती है।
वर्जनफिल्म की कमी की जानकारी विभाग को दी जा चुकी है। अस्पताल में एक्सरे भेजना का कोई भी ऑनलाइन सिस्टम नही है। मरीजों के एक्सरे को चिकित्सकों के मोबाइल पर भेज दिया जाता है। जिसे देखकर चिकित्सक इलाज करते हैं।
वर्जन
सीएचसी में फिल्म नही है। इस बारे में एसएमओ से बात करेंगे। आयुष्मान भारत के तहत बजट है तो एसएमओ को फिल्म खरीदनी चाहिए।