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नोटबंदी से को-ऑपरेटिव सोसायटी के बैंकों को करोड़ों का फटका

Mon, 05 Dec 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद Updated Mon, 05 Dec 2016 12:06 AM IST
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The banks millions of Notbandi Cooperative Society Shot, jind news
को-ऑपरेटिव बैंक - फोटो : jind
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी से को-ऑपरेटिव सोसायटी के बैंकों को करोड़ों रुपये का फटका लगा है। नोटबंदी से सोसायटी के बैंकों की करोड़ों रुपये की राशि किसानों की तरफ अटकी हुई है। वहीं, नोटबंदी से कैश की ट्रांजेक्शन भी काफी प्रभावित हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों को लगभग 16 करोड़ रुपये कम के ऋण जारी हो पाए हैं। 
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जिले में को-ऑपरेटिव बैंकों पर नोटबंदी की भारी मार पड़ी है। अगर इस एक माह के को-ऑपरेटिव बैंकों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो इस बार लगभग 24 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ है। पिछले वर्ष जींद के को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा दो दिसंबर तक किसानों से 130 करोड़ रुपये की रिकवरी की गई थी, जबकि इस बार बैंक द्वारा सिर्फ 106 करोड़ रुपये की रिकवरी हो पाई है। वहीं पिछले वर्ष किसानों को बैंक द्वारा 67 करोड़ रुपये ऋण के तौर पर दिए गए थे। जबकि इस बार यह आंकड़ा महज 51 करोड़ रुपये तक रह गया है।
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बैंक में कैश की कमी के चलते बैंक का लेन-देन प्रभावित हो रहा है। अगर पिछले व इस वर्ष के एक माह के बैंक के लेन-देन पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2015 में नवंबर माह में बैंक में लगभग 50 करोड़ का लेन-देन हुआ था। इस बार इस एक माह में एक करोड़ का लेन-देन ही हो पाया है।
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बुढ़ापा पेंशन की पांच करोड़ की राशि बैंक में अटकी
नोटबंदी के कारण बुढ़ापा पेंशन भी प्रभावित हो गई है। को-ऑपरेटिव बैंक को पर्याप्त कैश नहीं मिल पाने के कारण लगभग पिछले माह की बुढ़ापा पेंशन की पांच करोड़ की राशि बैंक में ही अटकी हुई है। अब जल्द ही दिसंबर माह की लगभग साढ़े पांच करोड़ की बुढ़ापा पेंशन की राशि भी आनी है, लेकिन बुढ़ापा पेंशन वितरण में कैश का अभाव अड़चन बनी हुई है।

आज फिर लोगी बैंकों की अग्नि परीक्षा
रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को जैसे ही बैंक खुलेंगे, फिर से भारी भीड़ होने की उम्मीद है। वहीं, एलडीएम एमके झा के अनुसार कैश मिलने के संभावना है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं होगा। वेतन आने के बाद से ही बैंकों में नकदी की दिक्कत चल रही है। सोमवार को बैंक खुलते ही कर्मचारी भी वेतन के लिए लाइन में लगेंगे। इससे लाइनें लंबी हो सकती हैं।


बैंक को जरूरत के अनुसार पर्याप्त कैश नहीं मिल पाने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक के पास लगभग पांच करोड़ की राशि बुढ़ापा पेंशन की अटकी हुई है। करेंसी चेस्ट से उन्हें प्रतिदिन महज पांच से सात लाख रुपये ही मिल पाता है। नोटबंदी के कारण इस बार ऋण की रिकवरी करने व किसानों को ऋण वितरण में भी काफी कमी आई है।
निहाल सिंह, महाप्रबंधक, को-ऑपरेटिव सोसायटी बैंक, जींद
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