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पशुपालन विभाग बेखबर, जिले में हो रही स्वाइन फ्लू से सूअरो की मौत
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जींद। जिले में लगातार सूअरों की मौत हो रही है, लेकिन इससे पशुपालन विभाग बिल्कुल बेखबर है। सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू फैल चुका है, जो लगातार सूअरों की जान ले रहा है, लेकिन विभाग अभी तक किसी भी सूअर की मौत से मना कर रहा है। पशुपालन विभाग के पास इस बीमारी से निपटने के लिए कोई इंतजाम भी नहीं है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने अब फोन भी उठाने बंद कर दिए हैं।
प्रदेश में लंपी चर्म रोग के साथ-साथ सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू भी फैल रहा है। अकेले मोरखी गांव में ही तीन दिनों के भीतर 20 से ज्यादा सूअरों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार इस बीमारी के कारण सूअरों की गर्दन नीली पड़ जाती है। उनको सांस लेने में तकलीफ होती है तथा उल्टियां लगती हैं। दो से तीन दिन में ही सूअर की मौत हो जाती है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है। वहीं पशुपालन विभाग इस बीमारी का जींद में प्रवेश होने से मना कर रहा है। गांव मोरखी निवासी रोशन के पांच, बंटी के पांच, प्रेम के तीन सूअर मर चुके हैं। इसके अलावा अन्य ग्रामीणों के भी दो-दो सूअरों की मौत हो चुकी है। मोरखी गांव में 20 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण गड्ढा खोदकर इन सूअरों के शवों को दफना रहे हैं।
बॉक्स
रोशन के मर चुके हैं पांच सूअर
गांव मोरखी निवासी रोशन ने बताया कि चार दिन पहले उसके एक सूअर को कुछ उल्टियां लगी थीं। इसके बाद उसने खाना छोड़ दिया और उसकी गर्दन नीली पड़ गई। चार दिन में उसके सूअर की सांस लेने में दिक्कत होने से मौत हो गई। उसने बड़ी मुश्किल से सूअर पाले थे, लेकिन इस बीमारी के कारण उसे काफी नुकसान हुआ है।
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बंटी के भी मर चुके हैं पांच सूअर
मोरखी निवासी महिला बंटी ने भी सूअर पाले हुए हैं। उसके पास 10 सूअर हैं। इनमें से पांच सूअरों की मौत हो चुकी हैं। इनमें तीन बच्चे शामिल हैं। बंटी ने कहा कि उसके सूअरों को भी पहले उल्टियां लगीं, इसके बाद उन्होंने खाना छोड़ दिया। धीरे-धीरे उसके सूअर मौत के आगोश में चले गए।
वर्जन
जिले में अभी तक एक भी सूअर की मौत का समाचार नहीं है। पशुपालन विभाग के पास किसी भी पशुपालक की इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है।
--डॉ. रविंद्र हुड्डा, उपनिदेशक पशुपालन विभाग।
वर्जन
सूअरों की मौत का कोई भी आंकड़ा पशुपालन विभाग ने अभी तक नहीं बताया है। यदि सूअरों की मौत हो रही है तो जिले में सर्वेक्षण के लिए पशुपालन विभाग को निर्देश दिए जाएंगे। सभी पशुपालकों से अनुरोध है कि अपने बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखे तथा चिकित्सकों से उपचार करवाए।
--डॉ. मनोज कुमार, डीसी, जींद।
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प्रदेश में लंपी चर्म रोग के साथ-साथ सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू भी फैल रहा है। अकेले मोरखी गांव में ही तीन दिनों के भीतर 20 से ज्यादा सूअरों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार इस बीमारी के कारण सूअरों की गर्दन नीली पड़ जाती है। उनको सांस लेने में तकलीफ होती है तथा उल्टियां लगती हैं। दो से तीन दिन में ही सूअर की मौत हो जाती है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है। वहीं पशुपालन विभाग इस बीमारी का जींद में प्रवेश होने से मना कर रहा है। गांव मोरखी निवासी रोशन के पांच, बंटी के पांच, प्रेम के तीन सूअर मर चुके हैं। इसके अलावा अन्य ग्रामीणों के भी दो-दो सूअरों की मौत हो चुकी है। मोरखी गांव में 20 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण गड्ढा खोदकर इन सूअरों के शवों को दफना रहे हैं।
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रोशन के मर चुके हैं पांच सूअर
गांव मोरखी निवासी रोशन ने बताया कि चार दिन पहले उसके एक सूअर को कुछ उल्टियां लगी थीं। इसके बाद उसने खाना छोड़ दिया और उसकी गर्दन नीली पड़ गई। चार दिन में उसके सूअर की सांस लेने में दिक्कत होने से मौत हो गई। उसने बड़ी मुश्किल से सूअर पाले थे, लेकिन इस बीमारी के कारण उसे काफी नुकसान हुआ है।
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बंटी के भी मर चुके हैं पांच सूअर
मोरखी निवासी महिला बंटी ने भी सूअर पाले हुए हैं। उसके पास 10 सूअर हैं। इनमें से पांच सूअरों की मौत हो चुकी हैं। इनमें तीन बच्चे शामिल हैं। बंटी ने कहा कि उसके सूअरों को भी पहले उल्टियां लगीं, इसके बाद उन्होंने खाना छोड़ दिया। धीरे-धीरे उसके सूअर मौत के आगोश में चले गए।
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जिले में अभी तक एक भी सूअर की मौत का समाचार नहीं है। पशुपालन विभाग के पास किसी भी पशुपालक की इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है।
--डॉ. रविंद्र हुड्डा, उपनिदेशक पशुपालन विभाग।
वर्जन
सूअरों की मौत का कोई भी आंकड़ा पशुपालन विभाग ने अभी तक नहीं बताया है। यदि सूअरों की मौत हो रही है तो जिले में सर्वेक्षण के लिए पशुपालन विभाग को निर्देश दिए जाएंगे। सभी पशुपालकों से अनुरोध है कि अपने बीमार पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखे तथा चिकित्सकों से उपचार करवाए।
--डॉ. मनोज कुमार, डीसी, जींद।