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लघु सचिवालय में सख्ती, बस स्टैंड, नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में नहीं हो रहा आदेशों का पालन
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: बस स्टैंड पर लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : Jind
एक जनवरी से सरकार के नो मास्क, नो सर्विस के निर्देश आधे अधूरे ही लागू हो पा रहे हैं। लघु सचिवालय में, एसपी ऑफिस व सिविल सर्जन कार्यालय में ही सख्ती थी। यहां पर काम के लिए आने वाले लोगों से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र देखे जा रहे थे। नागरिक अस्पताल में, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के अलावा डीआरडीए में कहीं कोई भी वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र नहीं देख रहा था। बाजारों में भी भीड़ पहले की तरह रही। तीन दिन बाद भी जिला प्रशासन इन निर्देशों की सही तरीके से पालना करने में असफल रहा है। लोग खुलेआम भीड़ में घूम रहे हैं। जहां भीड़ होती है, वहां पर लोग मास्क भी नहीं लगा रहे। इससे लोग कोरोना वायरस को बढ़ावा दे रहे हैं।
सरकार के निर्देशों के अनुसार एक जनवरी से प्रदेशभर में नो मास्क, नो सर्विस के साथ-साथ बिना कोरोना टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाए सार्वजनिक कार्यालयों में प्रवेश पर पाबंदी लगनी थी। तीन दिन बाद भी जिले में इस प्रकार के निर्देशों की कोई पालना नहीं हो रही है। लघु सचिवालय तथा एसपी ऑफिस में ही इन नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है। लघु सचिवालय में आने वाले लोगों से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र देखे जा रहे थे। इसके अलावा यहां पर वैक्सीन लगाने की भी व्यवस्था थी। वहीं नागरिक अस्पताल में स्थित केवल सिविल सर्जन कार्यालय में ही यह निर्देश लागू किए थे। अस्पताल की अन्य बिल्डिंग में लोग भीड़ में ही आते-जाते रहे, इनको रोकने वाला कोई नहीं था। नई बिल्डिंग में तो मास्क चेक करने के लिए भी किसी कर्मचारी की कोई ड्यूटी नहीं थी। यही हाल बस स्टैंड का था। यहां पर भीड़ में लोग बिना मास्क लगाए ही खड़े थे। बसों में चढने से पहले या बस स्टैंड में घुसने से पहले न तो मास्क ही देखे जा रहे थे और न ही कोरोना वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की जांच की जा रही थी।
लघु सचिवालय में हुआ सख्ती से पालन
लघु सचिवालय की बिल्डिंग में घुसने के लिए तहसील ऑफिस में दो गेट हैं। यहां पर एक गेट बंद था लेकिन दूसरे गेट पर कोई जांच नहीं थी। डीसी ऑफिस की बिल्डिंग में घुसने के लिए गेट हैं। यहां पर सभी गेट बंद थे केवल एक ही मुख्य गेट खुला था। इस गेट में घुसने से पहले लोगों से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र मांगे जा रहे थे। यहां पर वैक्सीन लगाने की भी व्यवस्था की गई थी।
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अस्पताल में केवल सिविल सर्जन कार्यालय में ही सख्ती
नागरिक अस्पताल में सिविल सर्जन कार्यालय के पांच कमरों में ही सख्ती बरती जा रही थी। यहां पर सभी गेट बंद करके एक गेट खोला गया था और डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान खुद भी काफी देर तक यहां बैठे और खुद लोगों के वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र देखे। कुछ लोग जो बिना वैक्सीन लगवाए पहुंचे थे उनको वापस भेज दिया। इसके अलावा पूरे अस्पताल की बिल्डिंग में कहीं कोई रोक-टोक नहीं रही।
बस स्टैंड पर सबसे बुरा हाल
बस स्टैंड पर जिले में सबसे बुरा हाल रहा। यहां टिकट लाइन में लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। इसके अलावा बसों में भी काफी भीड़ थी। बस स्टैंड परिसर में घुसने से लेकर बसों में सफर करने तक कहीं पर वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र नहीं देखे गए और न ही लोगों को मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा था। बसों में लोग बेखौफ होकर सफर कर रहे थे।
बॉक्स
बाजारों में भीड़ भी, नियमों का पालन भी नहीं
इसी प्रकार शहर के बाजारों में भीड़ भी रही और नियमों का पालन भी नहीं हुआ। लोग बिना मास्क के तथा बिना शारीरिक दूरी के बाजार में देखे गए। पूरे बाजार में कहीं कोई भी पुलिस कर्मचारी या अन्य कर्मचारी वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की कोई जांच नहीं कर रहा था और न ही मास्क लगाने के लिए कोई बोल रहा था।
बॉक्स
डीसी केवल अपील तक ही सीमित रहे
डीसी नरेश नरवाल ने लोगों से आह्वान किया है कि वह वैक्सीन जरूर लगवाएं। बिना वैक्सीन के किसी भी कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में टीमें लगातार काम कर रही हैं तथा लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं।
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सरकार के निर्देशों के अनुसार एक जनवरी से प्रदेशभर में नो मास्क, नो सर्विस के साथ-साथ बिना कोरोना टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाए सार्वजनिक कार्यालयों में प्रवेश पर पाबंदी लगनी थी। तीन दिन बाद भी जिले में इस प्रकार के निर्देशों की कोई पालना नहीं हो रही है। लघु सचिवालय तथा एसपी ऑफिस में ही इन नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है। लघु सचिवालय में आने वाले लोगों से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र देखे जा रहे थे। इसके अलावा यहां पर वैक्सीन लगाने की भी व्यवस्था थी। वहीं नागरिक अस्पताल में स्थित केवल सिविल सर्जन कार्यालय में ही यह निर्देश लागू किए थे। अस्पताल की अन्य बिल्डिंग में लोग भीड़ में ही आते-जाते रहे, इनको रोकने वाला कोई नहीं था। नई बिल्डिंग में तो मास्क चेक करने के लिए भी किसी कर्मचारी की कोई ड्यूटी नहीं थी। यही हाल बस स्टैंड का था। यहां पर भीड़ में लोग बिना मास्क लगाए ही खड़े थे। बसों में चढने से पहले या बस स्टैंड में घुसने से पहले न तो मास्क ही देखे जा रहे थे और न ही कोरोना वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की जांच की जा रही थी।
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लघु सचिवालय में हुआ सख्ती से पालन
लघु सचिवालय की बिल्डिंग में घुसने के लिए तहसील ऑफिस में दो गेट हैं। यहां पर एक गेट बंद था लेकिन दूसरे गेट पर कोई जांच नहीं थी। डीसी ऑफिस की बिल्डिंग में घुसने के लिए गेट हैं। यहां पर सभी गेट बंद थे केवल एक ही मुख्य गेट खुला था। इस गेट में घुसने से पहले लोगों से वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र मांगे जा रहे थे। यहां पर वैक्सीन लगाने की भी व्यवस्था की गई थी।
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अस्पताल में केवल सिविल सर्जन कार्यालय में ही सख्ती
नागरिक अस्पताल में सिविल सर्जन कार्यालय के पांच कमरों में ही सख्ती बरती जा रही थी। यहां पर सभी गेट बंद करके एक गेट खोला गया था और डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान खुद भी काफी देर तक यहां बैठे और खुद लोगों के वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र देखे। कुछ लोग जो बिना वैक्सीन लगवाए पहुंचे थे उनको वापस भेज दिया। इसके अलावा पूरे अस्पताल की बिल्डिंग में कहीं कोई रोक-टोक नहीं रही।
बस स्टैंड पर सबसे बुरा हाल
बस स्टैंड पर जिले में सबसे बुरा हाल रहा। यहां टिकट लाइन में लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े थे। इसके अलावा बसों में भी काफी भीड़ थी। बस स्टैंड परिसर में घुसने से लेकर बसों में सफर करने तक कहीं पर वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र नहीं देखे गए और न ही लोगों को मास्क लगाने के लिए कहा जा रहा था। बसों में लोग बेखौफ होकर सफर कर रहे थे।
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बाजारों में भीड़ भी, नियमों का पालन भी नहीं
इसी प्रकार शहर के बाजारों में भीड़ भी रही और नियमों का पालन भी नहीं हुआ। लोग बिना मास्क के तथा बिना शारीरिक दूरी के बाजार में देखे गए। पूरे बाजार में कहीं कोई भी पुलिस कर्मचारी या अन्य कर्मचारी वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की कोई जांच नहीं कर रहा था और न ही मास्क लगाने के लिए कोई बोल रहा था।
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डीसी केवल अपील तक ही सीमित रहे
डीसी नरेश नरवाल ने लोगों से आह्वान किया है कि वह वैक्सीन जरूर लगवाएं। बिना वैक्सीन के किसी भी कार्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में टीमें लगातार काम कर रही हैं तथा लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं।