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29 एमएम बारिश में ही खुली 35 करोड़ रुपये की बरसाती पानी निकासी परियोजना की पोल
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पिछले करीब तीन साल से शहर का बरसाती पानी निकासी के लिए परियोजना पर काम चल रहा है, लेकिन इस बारिश के मौसम में भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। 35 करोड़ रुपये से शहर में बारिश के पानी की निकासी के लिए व सीवर लाइन डाली गई है। इसके बावजूद करीब दो घंटे तक हुई 29 एमएम बारिश में शहर की सड़कें तालाब में बदल गई और दुकानों व मकानों में भी पानी भर गया। हालांकि बारिश से पहले ही जींद के भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने अधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन यह सब बेमानी साबित हुए। पाइप लाइन डालने वाला ठेेकेदार पिछले करीब एक महीने से अधिकारियों को लाइन की टेस्टिंग के लिए टरका रहा है। आज तक लाइन की टेस्टिंग नहीं हुई है।
दरअसल जींद शहर में अभी तक बारिश का पानी निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते जनस्वास्थ्य विभाग की सीवर लाइन से ही पानी की निकासी की जाती थी। तीन साल पहले नगर परिषद द्वारा शहर में बारिश का पानी निकासी के लिए पाइप लाइन डालने का काम शुरू हुआ। हालांकि इसे एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तीन साल बाद भी इस लाइन से शहर का बारिश का पानी नहीं निकल पा रहा है।
राहत की बजाय आफत बनी परियोजना
हालांकि प्रशासन द्वारा अमरूत योजना के तहत बारिश के पानी की निकासी के लिए बिछाई जा रही लाइन शहर के लिए वरदान बताई जा रही थी, लेकिन अब यह आफत बन गई है। इसके चलते शहर के सभी मुख्य मार्गों को खोद दिया गया है। ऐसे में इस लाइन से बारिश का पानी तो नहीं निकल रहा, लेकिन इसके कारण खोदे गए रास्तों पर जलभराव हो रहा है। अमरूत योजना के तहत शहर में करीब 25 किलोमीटर लंबी बारिश के पानी की निकासी के लिए लाइन डाली गई है।
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अभी काफी काम बाकी
नगर परिषद सूत्रों के अनुसार भले ही ठेकेदार लाइन की टेस्टिंग की बात कह रहा है, लेकिन अभी तक काफी काम बाकी है। इसके तहत काठ मंडी से पुरानी अनाज मंडी होते हुए रानी तालाब, डाकघर के साथ से मिनी बाईपास तक लाइन डाली जानी बाकी है। इसके अलावा डाली गई लाइन में सड़कों के किनारे से कनेक्शन ही नहीं हुए हैं। अभी तक बूस्टिंग स्टेशन भी तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में परियोजना को पूरा होने में अभी और समय लगेगा।
बॉक्स
पिछले कई दिन से ठेकेदार को लाइन टेस्टिंग के लिए कहा जा रहा है, लेकिन ठेकेदार गंभीर नहीं है। अभी तक काफी काम बाकी है। इसको लेकर मुख्यालय में बात की है। अधिकारियों ने कहा है कि ठेकेदार जल्द काम पूरा करेगा।
सुमित कुमार, एक्सईएन, जींद नगर परिषद।
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दरअसल जींद शहर में अभी तक बारिश का पानी निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके चलते जनस्वास्थ्य विभाग की सीवर लाइन से ही पानी की निकासी की जाती थी। तीन साल पहले नगर परिषद द्वारा शहर में बारिश का पानी निकासी के लिए पाइप लाइन डालने का काम शुरू हुआ। हालांकि इसे एक साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तीन साल बाद भी इस लाइन से शहर का बारिश का पानी नहीं निकल पा रहा है।
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राहत की बजाय आफत बनी परियोजना
हालांकि प्रशासन द्वारा अमरूत योजना के तहत बारिश के पानी की निकासी के लिए बिछाई जा रही लाइन शहर के लिए वरदान बताई जा रही थी, लेकिन अब यह आफत बन गई है। इसके चलते शहर के सभी मुख्य मार्गों को खोद दिया गया है। ऐसे में इस लाइन से बारिश का पानी तो नहीं निकल रहा, लेकिन इसके कारण खोदे गए रास्तों पर जलभराव हो रहा है। अमरूत योजना के तहत शहर में करीब 25 किलोमीटर लंबी बारिश के पानी की निकासी के लिए लाइन डाली गई है।
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अभी काफी काम बाकी
नगर परिषद सूत्रों के अनुसार भले ही ठेकेदार लाइन की टेस्टिंग की बात कह रहा है, लेकिन अभी तक काफी काम बाकी है। इसके तहत काठ मंडी से पुरानी अनाज मंडी होते हुए रानी तालाब, डाकघर के साथ से मिनी बाईपास तक लाइन डाली जानी बाकी है। इसके अलावा डाली गई लाइन में सड़कों के किनारे से कनेक्शन ही नहीं हुए हैं। अभी तक बूस्टिंग स्टेशन भी तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में परियोजना को पूरा होने में अभी और समय लगेगा।
बॉक्स
पिछले कई दिन से ठेकेदार को लाइन टेस्टिंग के लिए कहा जा रहा है, लेकिन ठेकेदार गंभीर नहीं है। अभी तक काफी काम बाकी है। इसको लेकर मुख्यालय में बात की है। अधिकारियों ने कहा है कि ठेकेदार जल्द काम पूरा करेगा।
सुमित कुमार, एक्सईएन, जींद नगर परिषद।