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Jind News: हमारी खेल नर्सरी ....गांव में सुविधा नहीं थी तो कोच ने खोला खेल का रास्ता

Mon, 28 Sep 2026 12:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 12:30 AM IST
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Our sports nursery... there were no facilities in the village, so the coach paved the way for sports.
फोटो कैप्शन27जेएनडी37: खेल नर्सरी में राज्य स्तर पर गोल्ड विजेता पदक। संवाद
जींद। गांव बराह कलां में कभी खेल प्रतिभाएं सुविधाओं के अभाव में गांव तक ही सिमटकर रह जाती थीं। मैदान और प्रशिक्षण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों का हुनर आगे नहीं बढ़ पा रहा था। करीब दो साल पहले राष्ट्रीय स्तर के विजेता खिलाड़ी और कोच रामजेश ने इस कमी को दूर करने का बीड़ा उठाया और गांव में भगत सिंह स्पोर्ट्स अकादमी की शुरुआत की।
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आज अकादमी में करीब 40 बच्चे नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रहे हैं और कई खिलाड़ियों ने राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए अपना स्थान पक्का कर लिया है। रोहतक के छोटूराम स्टेडियम में आयोजित उन्नीसवीं हरियाणा स्टेट ग्रैपलिंग चैंपियनशिप-2026 में बराह कलां के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।
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प्रतियोगिता में अकादमी के खिलाड़ियों ने अलग-अलग भार वर्गों में हिस्सा लिया। दक्ष ने 20 किलोग्राम और 21 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। अंश ने 47 किलोग्राम तथा 42 किलोग्राम वर्ग में, शिवम ने 73 किलोग्राम, कार्तिक ने 38 किलोग्राम, अनमोल और यश ने 24 किलोग्राम, तनूज ने 40 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। दीपांशु ने भी प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर राज्य स्तर पर स्वर्ण जीता है। संवाद
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अब राष्ट्रीय स्तर पर आजमाएंगे ताकत
राज्य स्तर पर पदक जीतने वाले अंश, तनूज, शिवम, यश, दक्ष, दीपांशु, कार्तिक और अनमोल समेत कई खिलाड़ियों का चयन अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। इससे पहले अकादमी से दीपांशु स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुका है। खिलाड़ियों के चयन से गांव में खुशी का माहौल है और अभिभावकों को उम्मीद है कि बच्चे राष्ट्रीय मंच पर भी पदक जीतकर गांव और जिले का नाम रोशन करेंगे।


कोच की मेहनत ने बदली तस्वीर
कोच रामजेश खुद राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बच्चों को प्रशिक्षण देने के दौरान सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की थी। इसके बावजूद बच्चों की प्रतिभा और मेहनत को देखते हुए उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा। दो साल में खिलाड़ियों ने जिस तरह राज्य स्तर पर पहचान बनाई है, उससे उनका उत्साह बढ़ा है। उनका लक्ष्य गांव की अधिक से अधिक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। पहले गांव में खेलों के लिए उचित सुविधा नहीं थी लेकिन अब बच्चों को घर के पास ही प्रशिक्षण मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में छिपी प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिला है। अब राज्य स्तर पर पदक जीत चुके खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन को पदक में बदलने की तैयारी में जुटे हैं।
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